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PM Modi: कांग्रेस पर हमलावर होकर क्या गठबंधन में बड़ी दरार डाल गए मोदी! समझिए कांग्रेस पर निशाने के मायने

Fri, 11 Aug 2023 03:40 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 11 Aug 2023 03:40 PM IST
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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान मणिपुर से लेकर देश के अन्य तमाम राज्यों में होने वाली अस्थिरता पर कांग्रेस को निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नाम पर सबसे पहले कांग्रेस के संसदीय दल के नेता अधीन रंजन चौधरी पर कटाक्ष के साथ शुरुआत की।
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Has Pm Modi created a big rift in the alliance by attacking the Congress? know what dose it mean
PM Modi - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सदन में अपने दो घंटे से ज्यादा के अभिभाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के नाम पर सबसे ज्यादा कांग्रेस को ही घेरा। मोदी का कांग्रेस पर यह हमला तब सबसे ज्यादा आक्रामक था जब तमाम दलों के गठबंधन के साथ विपक्षी दलों ने अपना बड़ा गठबंधन INDIA बनाया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूं ही विपक्ष के नाम पर कांग्रेस को नहीं घेरा है। इसके कई सियासी मायने हैं। उन तमाम सियासी मायनों में एक सबसे बड़ा पहलू यह भी माना जा रहा है कि विपक्षी दलों में कांग्रेस को सबसे बड़ा बताकर अन्य प्रमुख विपक्षी दलों को कांग्रेस की तुलना में कमजोर साबित किया जाए। 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान मणिपुर से लेकर देश के अन्य तमाम राज्यों में होने वाली अस्थिरता पर कांग्रेस को निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नाम पर सबसे पहले कांग्रेस के संसदीय दल के नेता अधीन रंजन चौधरी पर कटाक्ष के साथ शुरुआत की। उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार कांग्रेस पर हमला बोला। राहुल गांधी के हरियाणा के किसानों से खेतों में हुई मुलाकात को लेकर भी प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को घेरा तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पर परिवारवाद से लेकर दरबारबाद का भी आरोप लगाया। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने जब नॉर्थईस्ट से लेकर केरल और दक्षिण भारत के अलग-अलग हिस्सों में विपक्ष को घेरने की कोशिश की तो उसमें भी प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस को ही सबसे आगे रखा। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि प्रधानमंत्री की ओर से कांग्रेस को ही सामने रखे जाने से एक साथ भारतीय जनता पार्टी के कई सियासी तीर भी छोड़े जा रहे थे। ताकि विपक्ष के नाम पर सिर्फ कांग्रेस का ही नाम सामने आए।


वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एन सुदर्शन कहते हैं कि विपक्ष के नाम पर सबसे ज्यादा कांग्रेस को घेरे जाने पर प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों के बड़े गठबंधन में भी सेंधमारी करने का एक बड़ा सियासी दांव चला है। उनका कहना है इसके एक साथ कई मायने निकाले जा सकते हैं। पहला तो यह कि अगर प्रधानमंत्री की ओर से विपक्षी दलों के बड़े गठबंधन में सिर्फ कांग्रेस को ही सबसे आगे प्रमुखता से रखा जाएगा तो अन्य दलों की हैसियत को कमतर साबित करने का एक प्रयास होगा। ऐसी दशा में विपक्षी दलों की एकता में टूट भले ना पड़े लेकिन अंदर ही अंदर इस बात की चर्चा होने की संभावना जरूर रहेगी कि कहीं ऐसा तो नहीं विपक्षियों के बीच में सबसे बड़े नेता और सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेसी ही मानी जाएगी। 



राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विपक्षी दलों के इस गठबंधन ने सभी राजनैतिक दल खुद को न सिर्फ महत्वपूर्ण मानकर चल रहे हैं बल्कि इस बात की भी अंदर खाने में उठापटक मची रहती है कि उनका दल गठबंधन में निचले पायदान पर ना समझा जाए। राजनीतिक जानकार इंद्रेश चतुर्वेदी कहते हैं जब सदन में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया तो उस।दौरान गठबंधन के कई दलों ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि उनके नेताओं के दस्तखत क्यों नहीं करवाए गए। चतुर्वेदी कहते हैं कि यह चर्चाएं पहले भी होती रहीं है कि कहीं इस पूरे गठबंधन में कांग्रेस बाजी ना मार ले जाए। इसलिए अन्य दलों के नेता लगातार न सिर्फ अपनी पार्टी का पक्ष आगे रखते आ रहे हैं बल्कि कांग्रेस भी इस बात को समझते हुए अन्य दलों को पूरी तवज्जो दे रही है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अविश्वास प्रस्ताव पर अपने दिए जाने वाले अभिभाषण में विपक्षी दलों के अंदर खाने चल रहे इस मिजाज को न सिर्फ भली-भांति परखा बल्कि उस पर सियासी शॉट भी लगा दिया।

सियासी जानकार बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो घंटे से ज्यादा चले भाषण का सार अगर समझा जाए तो उसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यही निकल कर आती है कि मोदी ने अपने समूचे अभिभाषण का अपनी सरकार की उपलब्धियां से लेकर कांग्रेस को निशाने पर लेने का भरपूर उपयोग किया। राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते है कि जब बुधवार को अमित शाह की ओर से मणिपुर मामले में विस्तार से सब कुछ सदन बताया गया तो अनुमान यही लगाया जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अब मणिपुर मामले में फिर वह सब दोहराया नहीं जाएगा। सिंह कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुरुआती अभिभाषण के दौरान विपक्ष को लगातार निशाने पर लिया और विपक्ष के नाम पर कांग्रेस सबसे ज्यादा निशाने पर रही। हालांकि कांग्रेस को निशाने पर लेने के मामले में जटाशंकर सिंह का मानना है कि क्योंकि कांग्रेस ने बहुत लंबे समय तक देश पर शासन किया है, इसीलिए जब पुराने मामलों का जिक्र होता है तो कांग्रेस का ही नाम सबसे पहले आता है। उनका मानना है कि विपक्षी एकता में प्रधानमंत्री के भाषण से कोई बहुत बड़ा असर नहीं पड़ने वाला है।
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