फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Haryana: New 'social engineering' to break anti-Congress challenge in anti-Congress riots

Haryana: चुनावी दंगल में एंटी-इनकम्बेंसी से जूझती भाजपा, कांग्रेसी चुनौती को काटने के लिए नई 'सोशल इंजीनियरिंग

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 16 Aug 2024 10:02 PM IST
विज्ञापन
सार

चुनाव से कुछ माह पहले ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बदलना पड़ा। उनकी जगह पर पिछड़े वर्ग से आने वाले नायब सैनी को सीएम पद की कमान सौंपी गई। साढ़े चार साल तक चला भाजपा और जजपा का गठबंधन टूट गया।

loader
Haryana: New 'social engineering' to break anti-Congress challenge in anti-Congress riots
हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की परीक्षा (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

हरियाणा में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। पहली अक्तूबर को प्रदेश की सभी 90 सीटों पर मतदान होगा, जबकि नतीजे चार अक्तूबर को आएंगे। 2019 के मुकाबले, हरियाणा में इस बार का चुनावी माहौल अलग है। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'एंटी-इनकम्बेंसी' फैक्टर है। चुनाव से कुछ माह पहले ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बदलना पड़ा। उनकी जगह पर पिछड़े वर्ग से आने वाले नायब सैनी को सीएम पद की कमान सौंपी गई। साढ़े चार साल तक चला भाजपा और जजपा का गठबंधन टूट गया। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भाजपा की इस कमजोरी का भरपूर फायदा उठाया। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कांग्रेस पार्टी की अंदरुनी फूट के बावजूद भाजपा को घेरने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। इसका परिणाम लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। कांग्रेस पार्टी ने 2019 में प्रदेश की सभी दस लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा से 2024 में पांच सीटें छीन लीं। अब हरियाणा के दंगल में एंटी-इनकम्बेंसी से जूझ रही भाजपा ने कांग्रेस को चुनौती देने के लिए नई 'सोशल इंजीनियरिंग' तैयार की है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गैर जाट मतदाता, जो कुल आबादी का लगभग 75 फीसदी हैं, उन पर फोकस करने की रणनीति बनाई है।



बता दें कि लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही हरियाणा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला था। मनोहर लाल को हटाकर नायब सैनी को मुख्यमंत्री बनाया गया। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह, प्रदेश में खट्टर सरकार को लेकर लोगों में 'एंटी-इनकम्बेंसी' रही है। कांग्रेस पार्टी ने भाजपा सरकार के प्रति लोगों में पनपी 'एंटी-इनकम्बेंसी' का भरपूर फायदा उठाया। कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनाव में एक मजबूत प्लेटफार्म तैयार किया गया। भाजपा को पांच सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद दिल्ली में हुई शीर्ष नेतृत्व की एक बैठक में यह तय किया गया कि विधानसभा चुनाव में भाजपा पुराने 'सोशल इंजीनियरिंग' के फॉर्मूले पर लौटेगी। लोकसभा चुनाव में मिले वोटों का विश्लेषण किया गया, तो सामने आया कि भाजपा को जाट समुदाय के वोट नहीं मिले थे। चूंकि प्रदेश में गैर-जाट मतदाता, जो कुल आबादी का लगभग 75 फीसदी हैं, भाजपा ने उन पर ही फोकस करने का निर्णय लिया। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले मोहनलाल बड़ौली को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा, गैर जाट वोटरों पर ही फोकस कर रही है। मौजूदा समय में प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सैनी, पिछड़े वर्ग से आते हैं तो वहीं अब पार्टी के नव नियुक्त प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली, ब्राह्मण समुदाय से हैं। 


2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदेश में अपने दम पर सरकार बनाई थी। पंजाबी समुदाय से आने वाले मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया गया। इससे पहले कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा लगातार दस साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। उस वक्त रामबिलास शर्मा, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष थे। चुनाव में जीत के बाद पार्टी ने रणनीति बदली और जाट समुदाय से आने वाले सुभाष बराला को प्रदेशाध्यक्ष बना दिया गया। उस वक्त पार्टी, जाटों को नाराज नहीं करना चाहती थी। ये अलग बात है कि हरियाणा की सत्ता में आने से पहले भाजपा को लेकर यही कहा जाता था कि यह गैर-जाट वर्ग की पार्टी है। उस वक्त प्रदेश का जाट वोटर, ज्यादातर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पक्ष में शिफ्ट हो चुका था। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पहले यह वोट बैंक, खासतौर पर चौटाला परिवार के पक्ष में माना जाता था। 

हरियाणा की राजनीति को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र कुमार बताते हैं, प्रदेश की सियासत दो ही वर्गों में विभाजित रही है। भले ही प्रदेश में सत्ता किसी की भी रही हो, लेकिन जाट और गैर जाट, राजनीति के केंद्र में रहे हैं। भाजपा को तो शुरु से ही गैर जाटों की पार्टी माना जाता रहा है। हरियाणा में यह कहावत आम रही है कि भाजपा, शहर वालों की पार्टी है। इसी के चलते 1980 से लेकर अब तक, भाजपा के अधिकांश प्रदेशाध्यक्ष, गैर जाट ही रहे हैं। सबसे पहले डॉ. कमला वर्मा को प्रदेशाध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई। उसके बाद 1984 में डॉ. सूरजभान एक वर्ष के लिए इस पद पर आसीन हुए। डॉ. मंगलसेन ने 1986 में यह पद संभाला। वे करीब चार वर्ष तक प्रदेशाध्यक्ष रहे। 1990 में रामबिलास शर्मा को तीन साल के लिए अध्यक्ष बनाया गया। उनके बाद रमेश जोशी ने यह पद संभाला। 1998 में ओमप्रकाश ग्रोवर और 2000 में रतनलाल कटारिया, प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए। 2003 में गणेशीलाल को इस पद पर नियुक्त किया गया। उक्त नेता, गैर-जाट समुदाय से ताल्लुख रखते थे। 

साल 2006 में जाट समुदाय के ओमप्रकाश धनखड़ को भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। उसके बाद 2009 में गैर जाट कृष्णपाल गुर्जर को इस पद की कमान सौंपी गई। 2013 में रामबिलास शर्मा को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया। वे करीब दो वर्ष तक इस पद पर रहे थे। सरकार में शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने यह पद छोड़ दिया। जाट समुदाय से आने वाले सुभाष बराला को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई। वे पांच वर्ष से कुछ ज्यादा समय तक इस पद पर रहे। 2020 में दोबारा से ओमप्रकाश धनखड़ को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। गत वर्ष नायब सैनी को प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपी गई। 1980 से लेकर अब तक के इतिहास पर नजर डालें, तो सुभाष बराला व ओमप्रकाश धनखड़, ये दो जाट नेता ही भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पद पर रहे हैं। बतौर रविंद्र कुमार, लोकसभा चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि हरियाणा में भाजपा को जाट समुदाय का समर्थन नहीं मिलेगा। इसी के चलते आज पार्टी, बैकफुट पर आ गई है। 

पार्टी को अपनी पहले वाली सोशल इंजीनियरिंग पर लौटना पड़ा है। जिस वर्ग यानी गैर जाटों को भाजपा अपना बताने का दावा करती है, उसकी संख्या करीब 75 फीसदी है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने पूरी तरह से जाट समुदाय का समर्थन हासिल किया है। जाट वोटों पर अपना हक जताने वाली इनेलो और जजपा, को नकार दिया गया है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मौजूदा समय में एक मात्र जाट नेता के तौर पर स्थापित हुए हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को केवल जाट समुदाय का ही नहीं, बल्कि गैर जाट वोटरों का भी समर्थन हासिल था। विशेषकर एससी समुदाय के लोगों ने कांग्रेस को वोट दिया है। दूसरे समुदाय के लोग भी कांग्रेस के पक्ष में खड़े हुए नजर आए। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में जाट समुदाय के वोट हासिल करने के लिए तमाम प्रयास किए, मगर उसे समर्थन नहीं मिल सका।  

लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह से भाजपा ने पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर को केंद्र में केबिनेट मंत्री बनाया, उससे पहले नायब सैनी को मुख्यमंत्री बनाना और अब मोहनलाल बड़ौली को प्रदेशाध्यक्ष के पद पर बैठाना, ये सब बातें इशारा करती हैं कि भाजपा 2014 से पहले वाली मूल सोशल इंजीनियरिंग के सहारे विधानसभा चुनाव में उतरेगी। खट्टर के जरिए पंजाबी समुदाय को साधा गया है, तो नायब सैनी के जरिए पिछड़े एवं एससी मतदाताओं को संदेश दिया गया है। मोहन लाल बड़ौली को अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने यह बताने का प्रयास किया है कि विधानसभा चुनाव में उसका फोकस गैर जाट समुदाय के वोटरों पर है।

2014 में विधानसभा चुनाव में अमित शाह ने हरियाणा में गैर जाट वोटरों पर फोकस किया था। अब वे दोबारा से उसी राह पर सक्रिय हैं। उन्होंने 16 जुलाई को महेंद्रगढ़ में प्रदेश स्तरीय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सम्मेलन को संबोधित कर चुनावी बिगुल फूंक दिया था। शाह ने लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में छाई मायूसी को दूर करने का प्रयास किया। अमित शाह ने ओबीसी सम्मान समारोह के जरिए दक्षिणी हरियाणा की करीब दो दर्जन सीटों को साधने का प्रयास किया था। उनकी नजर रेवाड़ी,  महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, भिवानी, झज्जर, गुरुग्राम व मेवात सहित दूसरे जिलों की विधानसभा सीटों के ओबीसी वोट बैंक पर है।

शाह ने कहा था, भाजपा से हिसाब मांगने वाली कांग्रेस को अपने समय मे नौकरियों में भ्रष्टाचार करने, जातिवाद फैलाने, ओबीसी समाज के साथ अन्याय करने और परिवारवाद का हिसाब देना चाहिए। हरियाणा भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता और प्रदेश की जनता, कांग्रेस से उनके 10 साल के कुशासन का हिसाब मांगना चाहिए। शाह ने कहा, उनकी पार्टी ने देश को पहला ऐसा सशक्त प्रधानमंत्री दिया है, जो पिछड़े वर्ग से आते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल के 71 में से 27 मंत्री पिछड़ा वर्ग के हैं। उनमें 2 मंत्री हरियाणा से हैं। नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश और हरियाणा के ओबीसी समाज का सम्मान किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed