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हथिनीकुंड से दिल्ली छोड़ा गया पानी, बाढ़ से निबटने को प्रशासन सतर्क

Mon, 30 Jul 2018 03:35 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 30 Jul 2018 03:35 AM IST
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Haryana Hathnikund barrage releases water will reach soon in Yamuna river of Delhi

हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया तीन लाख क्यूसेक पानी रविवार देर रात तक दिल्ली पहुंच रहा है। रविवार के अलावा शुक्रवार और शनिवार को भी पानी छोड़ा गया था। इससे पहले ही खतरे के निशान से लगभग 75 सेमी ऊपर बह रही यमुना में बाढ़ आना तय है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यमुना के निचले इलाकों को खाली करा दिया है।

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हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी को दिल्ली तक पहुंचने में तीव्रता के आधार पर 48 घंटे से 72 घंटे तक का समय लगता है। इस आधार पर पूरा पानी दिल्ली पहुंच जाने पर बांध जैसे हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली के निचले इलाकों में बाढ़ के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने उच्च स्तरीय मीटिंग कर स्थिति से निबटने की तैयारियों का जायजा लिया है। 
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जानकारी के मुताबिक बाढ़ राहत और सिंचाई विभाग की टीम किसी भी आपात स्थिति से निबटने के लिए पूरी तरह तैयार है। सभी प्रमुख जगहों ओखला डूब क्षेत्र, मयूर विहार, शास्त्री पार्क, सीलमपुर और सोनिया विहार के पास बोट और तैराकों की तैनाती कर दी गई है। शुक्रवार और शनिवार को दिल्ली में भी अच्छी बारिश हुई थी जिससे कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। अभी भी प्रशासन ने और बारिश होने की चेतावनी जारी की है।

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पुराने पुल से ट्रैफिक का संचालन बंद कराया

Haryana Hathnikund barrage releases water will reach soon in Yamuna river of Delhi

पूर्वी दिल्ली के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक पुराने दिल्ली के पुल पर गुजरने वाली ट्रैफिक को किसी आशंका के मद्देनजर तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। लेकिन उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नितिन चौधरी के मुताबिक रेलवे का संचालन अभी सामान्य रुप से चल रहा है।

 सड़कों के किनारे बनाया आशियाना

यमुना के डूब क्षेत्र में रहने वालों को बाढ़ के प्रति शनिवार को ही सतर्क कर दिया गया था। यही कारण है कि लोगों ने यमुना के डूब क्षेत्र को छोड़कर यमुना पुश्ते से शास्त्री पार्क, लक्ष्मीनगर होते हुए नोएडा को जाने वाली मुख्य रोड के किनारे अपना आशियाना बना लिया है। कई लोगों ने सरकारी टेंटों में रहने की जगह पा ली है तो सैकड़ों की संख्या में परिवार सड़क किनारे अपने बनाए तंबू में जगह पा ली है।

अपने खेतों के सामने बना रहे तंबू

Haryana Hathnikund barrage releases water will reach soon in Yamuna river of Delhi

बिहार के मधेपुरा से खेती के मजदूर के रुप में काम करने दिल्ली आए हरिराम ने बताया कि अभी भी बहुत से लोग अपनी झुग्गियों को छोड़कर बाहर नहीं आए हैं। उनके बाहर आने से लोगों की संख्या बढ़ेगी।

सरकार की तरफ से बनाए गए तंबू अभी भी खाली पड़े हैं, लेकिन लोग सड़कों के किनारे अपने तंबू में रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। पूछने पर हरिराम बताते हैं कि सरकार के तंबू उनके खेतों से काफी दूर हैं। लोग अपने खेतों की सीध में सड़कों पर ही तंबू बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं जिससे कि बाढ़ कम होने पर अपने खेतों में जाकर काम कर सकें।

सरकार से मिल रही पूरी सुविधा

बदायूं से परिवार के साथ खेतिहर मजदूर के रुप में काम करने आए वीरपाल बताते हैं कि सरकारी टेंटों में इस समय पूरी सुविधा दी जा रही है।  पीने के पानी का टैंकर आता रहता है। 

मोबाइल टॉयलेट भी आ चुका है और रविवार दोपहर को उन्हें सरकार की तरफ से खाना भी मिला था। खाने के प्रत्येक पैकेट में चार पूड़ी और सब्जी होती है। 

साल 2006 से परिवार के साथ दिल्ली आ चुके वीरपाल बताते हैं कि खाने में बदलाव भी होता रहता है। उनके साथ उनकी पत्नी और चार बच्चे रहते हैं। वे खुद 300 रुपये रोज और पत्नी 200 रुपये रोज की मजदूरी पाते हैं। लेकिन बाढ़ जैसे हालात होने पर उन्हें कोई मजदूरी नहीं मिल पाती है।

चिकित्सा सुविधा का भी इंतजाम

मयूर विहार के डूब क्षेत्र में एक सिविल डिफेंस कर्मचारी ने बताया कि डूब क्षेत्र से बाहर निकाले गये लोगों के लिए इस समय पांच सौ से ज्यादा टेंट लगाए जा चुके हैं। लोगों के बढ़ने के साथ टेंट भी बढ़ा दिए जाते हैं। अभी भी टेंट का सामान लगातार आ रहा है।

कर्मचारी के मुताबिक डूब के कारण बीमारियों के फैलने की संभावना भी बहुत अधिक होती है। इसी कारण लोगों के लिए डायरिया, दस्त या मलेरिया जैसे रोगों के लिए दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। किसी भी व्यक्ति के बीमार होने पर उसके इलाज की पूरी सुविधा तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।

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