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Haryana: चौ. बंसीलाल को धमकी पंजाब के नेताओं को पड़ी थी भारी; 'हम तो चंडीगढ़ जाएंगे, अब तुम दिल्ली जाकर दिखाओ'
सार
बता दें कि चौ. बंसीलाल, चार बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे थे। 1967 में बंसीलाल पहली बार सीएम बने थे। 1972 में बंसीलाल दोबारा मुख्यमंत्री बन गए। 1985 में बंसीलाल ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद 1996 में बंसीलाल, चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे।
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चौधरी बंसीलाल।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल अपने सख्त मिजाज के लिए जाने जाते थे। उनकी छवि एक कठोर प्रशासक वाली थी। अस्सी के दशक में पंजाब के नेताओं ने एसवाईएल नहर की खुदाई को लेकर टिप्पणी की शैली में चौ. बंसीलाल को धमकी दे दी थी। इस धमकी में कहा गया था कि वे चंडीगढ़ जाने का रास्ता रोक देंगे। बस यही बात चौ. बंसीलाल दिल पर ले गए। उन्होंने भी तय कर लिया कि अब पंजाब की जमीन से होकर चंडीगढ़ नहीं जाएंगे। रातोंरात एक नई सड़क तैयार करा दी गई। वह सड़क सीधे हरियाणा की जमीन से होते हुए राजधानी चंडीगढ़ पहुंचती थी। तब बंसीलाल ने कहा, 'हम तो चंडीगढ़ पहुंचेंगे, मगर अब तुम दिल्ली जाकर दिखाओ'। ध्यान रहे, पंजाब से दिल्ली जाने का रास्ता, हरियाणा से होकर गुजरता है।
बता दें कि चौ. बंसीलाल, चार बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। 1967 में बंसीलाल पहली बार सीएम बने थे। 1972 में बंसीलाल दोबारा मुख्यमंत्री बन गए। 1985 में बंसीलाल ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद 1996 में बंसीलाल, चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उनके तीसरे कार्यकाल में पंजाब के नेताओं ने एसवाईएल विवाद के संदर्भ में चौ. बंसीलाल को लेकर एक टिप्पणी की थी। इसमें कहा गया था कि हरियाणा से किसी को चंडीगढ़ आना है तो उसे पंजाब से होकर जाना पड़ता है। अब वे इस रास्ते को बंद कर सकते हैं। तब हरियाणा और पंजाब के बीच एसवाईएल नहर खुदाई का मामला बहुत अहम था।
प्रदेश के राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, एसवाईएल नहर का विवाद दशकों तक हरियाणा व पंजाब के बीच विवाद का कारण बना रहा है। चौ. बंसीलाल ने पंजाब के नेताओं की टिप्पणी का करारा जवाब दे दिया। रातोंरात चंडीगढ़ जाने के लिए एक नया रास्ता तैयार किया गया। ऐसा रास्ता जो सीधे हरियाणा से चंडीगढ़ जा रहा था। पहले किसी को हरियाणा से चंडीगढ़ जाना होता तो वह मुख्य हाइवे का इस्तेमाल करता था। यह हाइवे अंबाला के बाद पंजाब के क्षेत्र जीरकपुर से होते हुए चंडीगढ़ पहुंचता था। पंजाब के नेताओं ने कहा था, हरियाणा के मुख्यमंत्री को पंजाब की धरती से होकर राजधानी चंडीगढ़ नही जाने दिया जाएगा।
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इसके बाद चौ. बंसीलाल के निर्देश पर यमुनानगर से नारायणगढ़, रामगढ़ और बरवाला होते हुए एक सड़क पंचकुला तक तैयार कर दी गई। पंचकुला से चंडीगढ़ जाने के लिए पंजाब की सीमा से गुजरने की जरुरत नहीं पड़ती। वहां से सीधे चंडीगढ़ पहुंचा जा सकता था। सड़क तैयार होने के बाद चौ. बंसीलाल ने पंजाब के नेताओं से कहा, अब तुम दिल्ली जाकर दिखाओ। चूंकि उस वक्त पंजाब से दिल्ली जाने के लिए हरियाणा पार करना जरुरी था। आज भी पंजाब से दिल्ली जाने का रास्ता हरियाणा से ही गुजरता है। यह बात दोनों राज्यों के लोगों में खासी चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि बाद में दोनों राज्यों ने व्यवहारिक तौर पर किसी का रास्ता नहीं रोका।
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बता दें कि चौ. बंसीलाल, चार बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। 1967 में बंसीलाल पहली बार सीएम बने थे। 1972 में बंसीलाल दोबारा मुख्यमंत्री बन गए। 1985 में बंसीलाल ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। इसके बाद 1996 में बंसीलाल, चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उनके तीसरे कार्यकाल में पंजाब के नेताओं ने एसवाईएल विवाद के संदर्भ में चौ. बंसीलाल को लेकर एक टिप्पणी की थी। इसमें कहा गया था कि हरियाणा से किसी को चंडीगढ़ आना है तो उसे पंजाब से होकर जाना पड़ता है। अब वे इस रास्ते को बंद कर सकते हैं। तब हरियाणा और पंजाब के बीच एसवाईएल नहर खुदाई का मामला बहुत अहम था।
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प्रदेश के राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, एसवाईएल नहर का विवाद दशकों तक हरियाणा व पंजाब के बीच विवाद का कारण बना रहा है। चौ. बंसीलाल ने पंजाब के नेताओं की टिप्पणी का करारा जवाब दे दिया। रातोंरात चंडीगढ़ जाने के लिए एक नया रास्ता तैयार किया गया। ऐसा रास्ता जो सीधे हरियाणा से चंडीगढ़ जा रहा था। पहले किसी को हरियाणा से चंडीगढ़ जाना होता तो वह मुख्य हाइवे का इस्तेमाल करता था। यह हाइवे अंबाला के बाद पंजाब के क्षेत्र जीरकपुर से होते हुए चंडीगढ़ पहुंचता था। पंजाब के नेताओं ने कहा था, हरियाणा के मुख्यमंत्री को पंजाब की धरती से होकर राजधानी चंडीगढ़ नही जाने दिया जाएगा।
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इसके बाद चौ. बंसीलाल के निर्देश पर यमुनानगर से नारायणगढ़, रामगढ़ और बरवाला होते हुए एक सड़क पंचकुला तक तैयार कर दी गई। पंचकुला से चंडीगढ़ जाने के लिए पंजाब की सीमा से गुजरने की जरुरत नहीं पड़ती। वहां से सीधे चंडीगढ़ पहुंचा जा सकता था। सड़क तैयार होने के बाद चौ. बंसीलाल ने पंजाब के नेताओं से कहा, अब तुम दिल्ली जाकर दिखाओ। चूंकि उस वक्त पंजाब से दिल्ली जाने के लिए हरियाणा पार करना जरुरी था। आज भी पंजाब से दिल्ली जाने का रास्ता हरियाणा से ही गुजरता है। यह बात दोनों राज्यों के लोगों में खासी चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि बाद में दोनों राज्यों ने व्यवहारिक तौर पर किसी का रास्ता नहीं रोका।