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दांव पर लगी है हरियाणा के इन 20 परिवारों के धुरंधरों की साख, विरासत बचाने की है चुनौती

Sat, 12 Oct 2019 06:21 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 12 Oct 2019 06:21 PM IST
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haryana assembly elections 2019: Family Dynasty is a biggest challenge in Haryana polls
Devilal, Abhay Chautala, Ajay Chautala, Omprakash Chautala - फोटो : AmarUjala
हरियाणा में विधानसभा चुनाव के अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। 21 अक्तूबर को मतदान होगा। सभी प्रत्याशियों ने अपने स्तर पर चुनावी दंगल जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। चुनाव के इस रौचक दौर में उन बीस परिवारों के नुमाइंदे कांटे की टक्कर में फंसे हैं, जिन्हें राजनीति में परिवारवाद की कहानी को आगे ले जाने की जिम्मेदारी मिली है। ऐसे उम्मीदवारों की फेहरिस्त में कांग्रेस पार्टी अव्वल है। दूसरा नंबर इनेलो का है। इनके अलावा लालू यादव के दामाद और शरद यादव के समधी भी इस चुनाव में ताल ठोक रहे हैं।
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कई धुरंधर तो त्रिकोणीय मुकाबले में फंस चुके हैं, जिनमें भूपेंद्र हुड्डा, किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई, प्रेमलता, दुष्यंत चौटाला, अभय चौटाला और रणदीप सुरजेवाला आदि नेता शामिल हैं।

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हुड्डा के सामने भाजपा के सतीश नांदल

सबसे पहले बात करते हैं प्रदेश के दस साल तक मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा की। उनके पिता एवं स्वतंत्रता सेनानी रणबीर हुड्डा आजादी के बाद पहली बार रोहतक सीट से ही जीत दर्ज करा कर संसद पहुंचे थे। वे दूसरी बार भी लोकसभा के लिए चुने गए। वे एमएलए भी रहे और बाद में राज्यसभा सांसद बने। भूपेंद्र हुड्डा चार बार सांसद और चार बार विधायक बने। भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा भी तीन बार सांसद रह चुके हैं। गत लोकसभा चुनाव में पिता-पुत्र दोनों हार गए थे।

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हुड्डा के सामने भाजपा ने सतीश नांदल को चुनाव मैदान में उतारा है। अगर भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला चल गया, तो हुड्डा के लिए मुश्किल हो सकती है। सीएम मनोहर लाल खट्टर पहले ही कह चुके हैं कि इस बार किलोई-सांपला सीट का चुनाव परिणाम दुनिया देखेगी।

भजनलाल के परिवार के सामने भी चुनौती

प्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने वाले स्व. चौधरी भजनलाल ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ग्राम पंचायत में पंच बनकर की थी। वे नौ बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने जब भी आदमपुर से चुनाव लड़ा तो वहां की जनता ने सदैव उन्हें विजयी बनाया। उनके बेटे चंद्रमोहन प्रदेश में डिप्टी सीएम रह चुके हैं। दूसरे बेटे कुलदीप बिश्नोई लोकसभा सांसद और विधायक भी रहे हैं। उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई हांसी से विधायक थी। गत लोकसभा चुनाव में उनके बेटे भव्य बिश्नोई ने हिसार सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। उन्हें आदमपुर में भी हार का सामना करना पड़ा। इस बार आदमपुर से भाजपा ने टिकटॉक गर्ल सोनाली फोगाट को टिकट दिया है।

सोनाली ने मुकाबले को कांटे का बना दिया है। बड़े भाई चंद्रमोहन पंचकुला से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने मौजूदा विधायक ज्ञानचंद गुप्ता खड़े हैं। यहां भी सीट निकालना आसान नहीं है।

बंसीलाल परिवार के तीन सदस्य मैदान में हैं

स्व: बंसीलाल तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनके बाद राजनीतिक विरासत को छोटे बेटे सुरेंद्र सिंह ने आगे बढ़ाया। सुरेंद्र सिंह, लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद और विधायक भी रहे। उन्होंने 1996 और 1998 का लोकसभा चुनाव जीता था। 2005 में एक हेलीकॉप्टर हादसे में उनकी मौत हो गई। उनके बाद पत्नी किरण चौधरी विधायक बनीं। वे लगातार तीन बार तोशाम से विधायक चुनी गईं। इस बार उनके सामने भाजपा के शशिरंजन परमार हैं। उनकी बेटी श्रुति चौधरी ने 2009 में भिवानी सीट से लोकसभा चुनाव जीता था।

2014 और 2019 में वे हार गईं। किरण चौधरी के अलावा बंसीलाल के दूसरे बेटे रणबीर महेंद्रा और दामाद सोमबीर भी चुनाव मैदान हैं। इन तीनों के सामने भाजपा ने मजबूत प्रत्याशी उतारे हैं। रणबीर महेंद्रा के सामने भाजपा के सुखविंद्र और सोमबीर को जजपा की नैना चौटाला टक्कर दे रही हैं।

विरासत बचाने में जुटा ताऊ देवीलाल का परिवार

स्व: देवीलाल, जिन्हें लोग प्यार से ताऊ कहते थे, वे भी दो बार हरियाणा के सीएम रहे हैं। इससे पहले वे पंजाब में भी विधायक बने थे। वे देश के उप प्रधानमंत्री भी रहे। देवीलाल के बाद उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने राजनीतिक विरासत संभाली। हरियाणा में चौटाला चार बार सीएम बने। चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला हरियाणा और राजस्थान में विधायक रहे हैं। वे लोकसभा सांसद भी चुने गए। बाद में शिक्षक भर्ती घोटाले में इन दोनों को 10 साल की जेल हो गई। चौटाला के छोटे बेटे अभय चौटाला ने इनेलो पार्टी की कमान संभाली। उधर, अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला भी सांसद बन गए। दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय भी राजनीति में आ गए।

अजय की पत्नी नैना चौटाला भी विधायक बन गईं। लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले इस कुनबे में दरार आ गई। दुष्यंत चौटाला ने अलग पार्टी जजपा का गठन कर लिया। इस चुनाव में दुष्यंत चौटाला ऊंचाना कलां सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी और मौजूदा विधायक प्रेमलता चुनाव मैदान में हैं। अभय चौटाला भी एलनाबाद सीट से चुनाव लड़ रहे हैं तो नैना चौटाला भी मैदान में हैं।

ये चेहरे भी परिवारवाद को आगे बढ़ाने में जुटे

चौ. छोटूराम के राजनीतिक वंशज चौधरी बीरेंद्र सिंह, जो मोदी सरकार में मंत्री रहे हैं और अब राज्यसभा सांसद हैं। बीरेंद्र सिंह पांच बार विधायक भी रहे। उनके बेटे ब्रजेंद्र सिंह गत लोकसभा चुनाव में सांसद बने हैं। बीरेंद्र की पत्नी प्रेमलता मौजूदा विधायक रही हैं। इस बार वे फिर से ऊंचाना कलां सीट से चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने दुष्यंत चौटाला खड़े हैं। मुकाबला कांटे का है। चौटाला परिवार के अलावा बीरेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। कांग्रेस उम्मीदवार नीरज शर्मा पूर्व मंत्री शिवचरण शर्मा के पुत्र हैं। वरुण चौधरी के पिता फूलचंद मुलाना हैं। कांग्रेस सरकार में मुलाना मंत्री रहे हैं। वे कांग्रेस अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस बार उन्होंने अपने बेटे को टिकट दिलाया है। मनदीप चट्ठा के पिता महेंद्र सिंह चट्ठा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं।

मनदीप के सामने खिलाड़ी सरदार संदीप सिंह चुनाव मैदान में हैं। कैप्टन अजय यादव के पिता राव अभय सिंह तीन बार विधायक रहे। खुद अजय यादव कई बार मंत्री बन चुके हैं। अब उनके बेटे चिरंजीवी राव चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने उनके सामने सुनील मुसेपुर को उतारा है। यह मुकाबला भी कांटे का बताया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने पूर्व मंत्री रहे महेंद्र प्रताप चौधरी के बेटे विजय प्रताप को इस बार बड़खल से टिकट दिया है। उनके सामने भाजपा की मौजूदा विधायक सीमा त्रिखा चुनाव लड़ रही हैं।

कुलदीप शर्मा के पिता स्व: चिरंजीलाल चार बार लोकसभा सांसद रहे हैं। कुलदीप शर्मा विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं। इस बार भी वे गन्नोर सीट से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा प्रत्यारशी निर्मल चौधरी उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

सम्राट यादव की मां अनीता यादव कांग्रेस सरकार में संसदीय सचिव रही हैं। इस बार उनके बेटे को कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया। सम्राट अब जजपा के टिकट पर मैदान में कूद पड़े हैं। कमलवीर यादव, शरद यादव के समधी हैं। महावीर गुप्ता के पिता मांगेराम गुप्ता कांग्रेस में लंबे समय तक विधायक और मंत्री रहे हैं। जींद में भाजपा के मौजूदा विधायक कृष्ण मिड्डा से उनकी टक्कर है।



रणदीप सिंह सुरजेवाला के पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और मंत्री भी रहे हैं। भाजपा ने उन्हें घेरने के लिए लीलाराम गुर्जर को टिकट दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हाल ही में उनके क्षेत्र में रैली भी की है।

 

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