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IIT Bombay Student Death Case: मुंबई पुलिस का खुलासा, दर्शन सोलंकी ने ही लिखा था अपना सुसाइड नोट
Fri, 07 Apr 2023 01:23 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Fri, 07 Apr 2023 01:23 PM IST
सार
मुंबई पुलिस एसआईटी ने खुलासा किया कि उनकी आत्महत्या के कारणों में से एक उन पर जातिगत टिप्पणियां भी हैं, पुलिस उन छात्रों से पूछताछ कर रही है, जिनके नाम सुसाइड नोट में हैं।
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दर्शन सोलंकी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आईआईटी बॉम्बे के 18 वर्षीय छात्र दर्शन सोलंकी की आत्महत्या मामले में मुंबई पुलिस के विशेष जांच दल को सुसाइड नोट मिला था। अब पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नोट छात्र ने मरने से पहले खुद ही लिखा है। इस मामले में अब तक 35 लोगों के बयान दर्ज कराए जा चुके हैं। सामने आया है कि आत्महत्या करने से एक हफ्ते पहले दर्शन की अपने साथी छात्रों से बहस हुई थी।
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मुंबई पुलिस एसआईटी ने बताया था कि सुसाइड नोट में मृतक दर्शन सोलंकी ने साथी और वरिष्ठ छात्रों पर उसे परेशान करने और धमकी देने का आरोप लगाया है।
आत्महत्या के कारणों में जातिगत टिप्पणियां भी
जांच के बाद, मुंबई पुलिस एसआईटी ने खुलासा किया कि उनकी आत्महत्या के कारणों में से एक उन पर जातिगत टिप्पणियां भी हैं, पुलिस उन छात्रों से पूछताछ कर रही है, जिनके नाम सुसाइड नोट में हैं।
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सातवीं मंजिल से लगाई थी छलांग
18 वर्षीय दर्शन सोलंकी ने रविवार, 12 फरवरी, 2023 को आईआईटी के पवई परिसर में कथित तौर पर एक छात्रावास की इमारत की सातवीं मंजिल से छलांग लगाई थी। जिससे उसकी मौत हो गई। दाखिले के तीन माह के भीतर ही हुई इस घटना पर परिवार ने साजिश का संदेह जताया था। हालांकि, उस वक्त एक छात्र समूह ने आरोप लगाया था कि कैंपस में अनुसूचित जाति के छात्रों के साथ भेदभाव ने उसे आत्महत्या के लिए परेशान किया था।
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जिग्नेश मेवाणी ने पीएम मोदी को लिखा था पत्र
गुजरात कांग्रेस के विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने भी पीएम मोदी को पत्र लिख कर एसआईटी जांच की मांग की थी। मेवाणी ने कहा कि आईआईटी बॉम्बे में बीटेक कैमिकल ब्रांच के प्रथम वर्ष के छात्र दर्शन सोलंकी की मौत आत्महत्या थी या हत्या या रैगिंग के दौरान जाति आधारित भेदभाव का नतीजा है, यह पता लगाने के लिए एक एसआईटी जांच आवश्यक है। हालांकि, आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने संस्थान में रैगिंग, जातिगत पूर्वाग्रह के आरोपों को खारिज कर दिया था।
पिता ने पुलिस पर लगाया था प्रताड़ना का आरोप
कुछ दिनों पहले ही दर्शन के पिता ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उनके बेटे की मौत की प्राथमिकी दर्ज करने में पुलिस उनका सहयोग नहीं कर रही है। उनके परिवार को पुलिस से उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को लिखे गए पत्र में यह भी कहा गया कि परिवार पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) के सदस्यों के रवैये से "पूरी तरह से हैरान और निराश" है, जो लगभग दो सप्ताह से प्राथमिकी दर्ज करने से "इनकार" कर रहे हैं।