{"_id":"577fc5704f1c1be6567fb4e5","slug":"hajj-quota-for-private-operators-may-be-given-under-the-rules-supreme-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजी ऑपरेटरों को नियम के तहत हज के कोटे दिए जाएं: सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
निजी ऑपरेटरों को नियम के तहत हज के कोटे दिए जाएं: सुप्रीम कोर्ट
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Jul 2016 08:53 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : Getty Images
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह हज यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स को हज की परमिट दें। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह स्वीकृत नीति के तहत प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स को परिमट दें।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि वर्ष 2015 में जिन टूर ऑपरेटर्स को परमिट दिया गया था उनकेआवेदनों को 2016 के लिए विचार करना चाहिए। हां अगर सरकार ने यह पाया है कि अगर 2015 के हज कार्यक्रम के दौरान किसी टूर ऑपरेटर्स न सेवा ठीक न दी हो या सेवा अपर्याप्त तो वैसे ऑपरेटर्स के आवेदन पर विचार न करने के लिए सरकार स्वतंत्र है। लेकिन अगर ऐसा न तो तो वर्ष 2016 के लिए उनकेआवेदनों पर विचार किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
मालूम हो कि सुनवाई केदौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि कभी-कभी ऐसा ही देखने को मिला है कि टूर ऑपरेटर्स हज यात्रियों को वहां ले जाकर छोड़ देते हैं। इसलिए हमें यह देखना होता है कि टूर ऑपरेटर्स परमिट पाने के हकदार हैं या नहीं।
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि सरकार ने किसी ऑपरेटर्स के पंजीकरण को समाप्त करने का निर्णय लिया हो तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है लेकिन इसके लिए ऑपरेटर्स को पर्याप्त मौका देना आवश्यक है। लेकिन अगर उन्हें गैर पंजीकृत नहीं किया गया है तो वैसे ऑपरेटर्स के आवेदनों को वर्ष 2016 केलिए विचार करना जरूरी है, अगर किसी अन्य कारणों से वह अयोग्य न हो।
पीठ ने कहा कि अगर किसी प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स को एक बार योग्य ठहराया जा चुका है तो तब तक योग्य रहेगा जब तक केंद्र सरकार किन्हीं उचित कारणों से उसे अयोग्य नहीं करार दे देती। अगर किसी ऑपरेटर्स केबारे में कोई हज यात्री शिकायत करें या उसकेबारे में अनुचित साक्ष्य मिले तो सरकार उसे अयोग्य ठहरा सकती है।
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया है इस मसले पर कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। पीठ ने कहा है कि अगर सरकार का प्रशासनिक कार्य कानून के विपरीत हो या उसका कार्य अतार्किक हो तो, अदालत इसमें दखल दे सकती है।
Published By Rahul Sankrityayan