Gyanvapi: विहिप ने कहा, कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर सच को सामने आने से रोक रहा मुस्लिम पक्ष
Gyanvapi: विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने अमर उजाला से कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर 393 सालों से ज्ञानवापी मामले का सच लोगों के सामने नहीं आने दिया जा रहा है। अब जबकि अदालत के आदेश के बाद वहां पर सर्वे का काम किया जा रहा है, उसे हर हाल में बाधित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है...
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सर्वोच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी मामले में हो रहे एएसआई सर्वे पर दो दिनों के लिए रोक लगा दी है। मुस्लिम पक्ष को इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने के लिए कह दिया गया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कहा है कि मुस्लिम पक्ष कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग कर सच को सामने आने से रोकता रहा है और इस बार भी वह यही काम कर रहा है। संगठन ने मांग की है कि अब इस मामले में कोई दांवपेंच स्वीकार न कर ज्ञानवापी का सर्वे कराकर सच को सामने लाना चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने अमर उजाला से कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर 393 सालों से ज्ञानवापी मामले का सच लोगों के सामने नहीं आने दिया जा रहा है। अब जबकि अदालत के आदेश के बाद वहां पर सर्वे का काम किया जा रहा है, उसे हर हाल में बाधित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। मुस्लिम पक्ष को भी यह पता था कि निचली अदालत के आदेश को सबसे पहले हाई कोर्ट में चुनौती दी जाती है, लेकिन सीधे सर्वोच्च न्यायालय आकर समय बर्बाद करने का काम किया जा रहा है। विहिप ने आरोप लगाया है कि यह सब केवल सर्वे को रोकने की कोशिश है।
विहिप ने कहा है कि बार-बार के हस्तक्षेप से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि मुस्लिम पक्ष किसी भी कीमत पर सच को सामने आने से रोकना चाहता है। ऐसे में यह व्यवस्था की जानी चाहिए कि किसी भी आपत्ति के कारण ज्ञानवापी का सर्वे और इस पर आने वाले निर्णय की प्रक्रिया प्रभावित न की जा सके।
मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया था कि सर्वे के बहाने वहां पर खुदाई कर ज्ञानवापी को प्रभावित किया जा रहा है। लेकिन अदालत और एएसआई ने स्पष्ट कर दिया है कि ज्ञानवापी में कोई खुदाई नहीं की जा रही है। वहां केवल फोटोग्राफ लेकर भवनों की स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा। प्राचीनता और निर्माण सामग्री के आकलन के लिए अधिकतम 10 ग्राम मिट्टी लेकर उसकी प्राचीनता का आकलन किया जाएगा।