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Gyanvapi Dispute: उन महिलाओं की कहानी, जिनकी याचिका पर होगा ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वे
Fri, 21 Jul 2023 05:44 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 21 Jul 2023 05:44 PM IST
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ज्ञानवापी के लिए याचिका दायर करने वाली महिलाएं।
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अमर उजाला
विस्तार
बाबा विश्वनाथ की धरती काशी में स्थित ज्ञानवापी परिसर एक बार फिर से चर्चा में है। दरअसल, शुक्रवार को ज्ञानवापी परिसर में वजूस्थल को छोड़कर परिसर के सर्वे वाली याचिका पर आदेश आया है। कोर्ट का ये आदेश हिंदू पक्ष की चार वादिनी रेखा पाठक, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और सीता साहू की याचिका पर आया है।इन्हीं महिलाओं की याचिका की वजह से ही ज्ञानवापी परिसर का सामान्य सर्वे हुआ था। अब इसका वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा। इस बीच जानना जरुरी है कि ज्ञानवापी मामले में अभी क्या हुआ है? जिसकी याचिका पर आदेश आया वो कौन हैं?
ज्ञानवापी मामले की सुनवाई के बाद हिंदू पक्ष के अधिवक्ता, वादिनी व पैरोकार
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अमर उजाला
पहले जानते हैं हुआ क्या है?
वाराणसी जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने मां श्रृंगार गौरी मूल वाद में ज्ञानवापी के सील वजूखाने को छोड़कर बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से रडार तकनीक से सर्वे कराने के आवेदन को मंजूर कर लिया है। इसके साथ ही अब सील परिसर को छोड़कर बाकी सभी स्थानों का सर्वे होगा।
अदालत में हिंदू पक्ष की वादिनियों की तरफ से 16 मई 2023 को प्रार्थना पत्र दिया गया था। कहा गया था कि ज्ञानवापी में सील किए गए वजूखाना को छोड़कर बाकी क्षेत्र का एएसआई से रडार तकनीक से सर्वे कराया जाए। इस पर 19 मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति की थी। 14 जुलाई को सुनवाई पूरी हो गई थी। तब कोर्ट ने आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रखते हुए सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तिथि तय की थी।
वाराणसी जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने मां श्रृंगार गौरी मूल वाद में ज्ञानवापी के सील वजूखाने को छोड़कर बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से रडार तकनीक से सर्वे कराने के आवेदन को मंजूर कर लिया है। इसके साथ ही अब सील परिसर को छोड़कर बाकी सभी स्थानों का सर्वे होगा।
अदालत में हिंदू पक्ष की वादिनियों की तरफ से 16 मई 2023 को प्रार्थना पत्र दिया गया था। कहा गया था कि ज्ञानवापी में सील किए गए वजूखाना को छोड़कर बाकी क्षेत्र का एएसआई से रडार तकनीक से सर्वे कराया जाए। इस पर 19 मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति की थी। 14 जुलाई को सुनवाई पूरी हो गई थी। तब कोर्ट ने आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रखते हुए सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तिथि तय की थी।
ज्ञानवापी मामले में वादी महिलाएं कोर्ट में जाती हुईं
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अमर उजाला
याचिकाकर्ता कौन हैं?
वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट से ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दी थी। आदेश में एक कमीशन नियुक्त किया गया और इस कमीशन को छह और सात मई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में श्रृंगार गौरी की वीडियोग्राफी के आदेश दिए गए। 10 मई तक अदालत ने इसे लेकर पूरी जानकारी मांगी थी। छह मई को पहले दिन का ही सर्वे हो पाया था, लेकिन सात मई को मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। मामला कोर्ट पहुंचा। 14 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। इसी दिन से ही ज्ञानवापी के सर्वे का काम दोबारा शुरू हुआ। सभी बंद कमरों से लेकर कुएं तक की जांच हुई। इस पूरे प्रक्रिया की वीडियो और फोटोग्राफी भी हुई। 16 मई को सर्वे का काम पूरा हुआ। हिंदू पक्ष ने दावा किया कि कुएं से बाबा मिल गए हैं। इसके अलावा हिंदू स्थल होने के कई साक्ष्य मिले। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा कि सर्वे के दौरान कुछ नहीं मिला। हिंदू पक्ष ने इसके वैज्ञानिक सर्वे की मांग की। मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया। अब इसी मामले में हिन्दू पक्ष की अर्जी मंजूर हो गई है।
वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट से ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दी थी। आदेश में एक कमीशन नियुक्त किया गया और इस कमीशन को छह और सात मई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में श्रृंगार गौरी की वीडियोग्राफी के आदेश दिए गए। 10 मई तक अदालत ने इसे लेकर पूरी जानकारी मांगी थी। छह मई को पहले दिन का ही सर्वे हो पाया था, लेकिन सात मई को मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। मामला कोर्ट पहुंचा। 14 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। इसी दिन से ही ज्ञानवापी के सर्वे का काम दोबारा शुरू हुआ। सभी बंद कमरों से लेकर कुएं तक की जांच हुई। इस पूरे प्रक्रिया की वीडियो और फोटोग्राफी भी हुई। 16 मई को सर्वे का काम पूरा हुआ। हिंदू पक्ष ने दावा किया कि कुएं से बाबा मिल गए हैं। इसके अलावा हिंदू स्थल होने के कई साक्ष्य मिले। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा कि सर्वे के दौरान कुछ नहीं मिला। हिंदू पक्ष ने इसके वैज्ञानिक सर्वे की मांग की। मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया। अब इसी मामले में हिन्दू पक्ष की अर्जी मंजूर हो गई है।
ज्ञानवापी मामले में सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की महिलाएं कोर्ट पहुंचीं
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कहानी उन पांच महिलाओं की, जिनकी याचिका पर पहला सर्वे हुआ था
1. राखी सिंह
दिल्ली के हौज खास की रहने वाली राखी सिंह इस मामले की अगुवाई कर रहीं थीं। इस पूरे मामले को 'राखी सिंह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' नाम दिया गया। राखी के पति का नाम इंद्रजीत सिंह है। इनका दूसरा घर लखनऊ के हुसैनगंज में है।
2. लक्ष्मी देवी
ज्ञानवापी मामले में दूसरी याचिकाकर्ता लक्ष्मी देवी हैं। लक्ष्मी वाराणसी के महमूरगंज इलाके की रहने वाली हैं। पति डॉक्टर सोहन लाल आर्य ने भी 1996 में ज्ञानवापी को लेकर अदालत में एक मामला दर्ज कराया था। इसके बाद ज्ञानवापी का निरीक्षण भी हुआ था, लेकिन कोई सर्वे नहीं हो सका। लक्ष्मी ने मीडिया को बताया कि पति भी चाहते थे कि मैं इस मामले को उठाऊं। ये मां शृंगार गौरी का मुद्दा है। इसलिए मैंने याचिका दायर की।
3. सीता साहू
वाराणसी के चेतगंज की रहने वाली सीता साहू इस मामले में तीसरी याचिकाकर्ता हैं। सीता समाज सेविका हैं। पति का नाम बाल गोपाल साहू है। सीता का कहना है, वह कई बार मां शृंगार गौरी की पूजा करने आ चुकी हैं। उनका दावा है कि मां शृंगार गौरी का मंदिर मस्जिद के अंदर बना है, लेकिन हम लोग अंदर नहीं जा सकते। इसकी अनुमति नहीं है। सिर्फ बाहर से पैर छू पाते हैं।
4. मंजू व्यास
ज्ञानवापी मामले में चौथी याचिकाकर्ता मंजू व्यास भी वाराणसी की रहने वाली हैं। यहां उनका राम घाट में घर है। पति का नाम विक्रम व्यास है। मंजू भी समाज सेविका हैं। वह कहती हैं, रोजाना मां शृंगार गौरी के दर्शन की अनुमति होनी चाहिए। अभी हम लोग चौखट के दर्शन करके लौट आते हैं।
5. रेखा पाठक
पांचवीं याचिकाकर्ता रेखा पाठक भी वाराणसी की रहने वाली हैं। रेखा का घर वाराणसी के हनुमान फाटक के पास है। पति का नाम अतुल कुमार पाठक है। रेखा कहती हैं, ज्ञानवापी हम सभी के आस्था का केंद्र बिंदु है। इसपर कब्जा हुआ है। इसे छुड़ाने तक ये लड़ाई जारी रहेगी।
1. राखी सिंह
दिल्ली के हौज खास की रहने वाली राखी सिंह इस मामले की अगुवाई कर रहीं थीं। इस पूरे मामले को 'राखी सिंह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' नाम दिया गया। राखी के पति का नाम इंद्रजीत सिंह है। इनका दूसरा घर लखनऊ के हुसैनगंज में है।
2. लक्ष्मी देवी
ज्ञानवापी मामले में दूसरी याचिकाकर्ता लक्ष्मी देवी हैं। लक्ष्मी वाराणसी के महमूरगंज इलाके की रहने वाली हैं। पति डॉक्टर सोहन लाल आर्य ने भी 1996 में ज्ञानवापी को लेकर अदालत में एक मामला दर्ज कराया था। इसके बाद ज्ञानवापी का निरीक्षण भी हुआ था, लेकिन कोई सर्वे नहीं हो सका। लक्ष्मी ने मीडिया को बताया कि पति भी चाहते थे कि मैं इस मामले को उठाऊं। ये मां शृंगार गौरी का मुद्दा है। इसलिए मैंने याचिका दायर की।
3. सीता साहू
वाराणसी के चेतगंज की रहने वाली सीता साहू इस मामले में तीसरी याचिकाकर्ता हैं। सीता समाज सेविका हैं। पति का नाम बाल गोपाल साहू है। सीता का कहना है, वह कई बार मां शृंगार गौरी की पूजा करने आ चुकी हैं। उनका दावा है कि मां शृंगार गौरी का मंदिर मस्जिद के अंदर बना है, लेकिन हम लोग अंदर नहीं जा सकते। इसकी अनुमति नहीं है। सिर्फ बाहर से पैर छू पाते हैं।
4. मंजू व्यास
ज्ञानवापी मामले में चौथी याचिकाकर्ता मंजू व्यास भी वाराणसी की रहने वाली हैं। यहां उनका राम घाट में घर है। पति का नाम विक्रम व्यास है। मंजू भी समाज सेविका हैं। वह कहती हैं, रोजाना मां शृंगार गौरी के दर्शन की अनुमति होनी चाहिए। अभी हम लोग चौखट के दर्शन करके लौट आते हैं।
5. रेखा पाठक
पांचवीं याचिकाकर्ता रेखा पाठक भी वाराणसी की रहने वाली हैं। रेखा का घर वाराणसी के हनुमान फाटक के पास है। पति का नाम अतुल कुमार पाठक है। रेखा कहती हैं, ज्ञानवापी हम सभी के आस्था का केंद्र बिंदु है। इसपर कब्जा हुआ है। इसे छुड़ाने तक ये लड़ाई जारी रहेगी।