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Gujrat Lions: गुजरात के अमरेली में शेरनी का शव मिलने से मचा हड़कंप, लगातार हो रही मौतों पर उठे सवाल
Sun, 03 Aug 2025 10:18 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sun, 03 Aug 2025 10:18 PM IST
सार
गुजरात के अमरेली जिले में एक शेरनी का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। हाल के दिनों में क्षेत्र में शेरों की मौतों को लेकर लोगों में चिंता है। स्थानीय नेताओं ने वन विभाग से वायरस संक्रमण की जांच की मांग की है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया है और अधिकारियों ने किसी संक्रमण से इनकार किया है।
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शेर( सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
गुजरात के अमरेली जिले के मांडरडी गांव के पास एक शेरनी का शव मिलने के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। हाल के दिनों में क्षेत्र में शेरों की लगातार हो रही मौतों को लेकर स्थानीय नेताओं और वन्यजीव प्रेमियों ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने वन विभाग से यह जानने की मांग की है कि कहीं किसी गंभीर वायरस का प्रकोप तो इन मौतों की वजह नहीं।
शनिवार को मांडरडी गांव के पास एक खेत में शेरनी का शव मिला। वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि शव को बाबरकोट एनिमल सेंटर ले जाया गया जहां पोस्टमॉर्टम के बाद मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया। हालांकि, स्थानीय नेताओं का कहना है कि हाल ही में कई शेरों की मौत हो चुकी है, जिससे शक गहराता जा रहा है कि कहीं कोई संक्रामक बीमारी तो इसका कारण नहीं है।
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को लेकर चिंता
स्थानीय विधायक जे.वी. ककड़िया ने वन मंत्री मूलू बेड़ा को पत्र लिखकर इस मामले में जांच की मांग की है। उन्होंने आशंका जताई कि पहले भी कई शेरों की मौत कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से हो चुकी है, और हाल की मौतों के पीछे भी यह वायरस हो सकता है। हालांकि, वन विभाग ने अब तक ऐसी किसी आशंका को खारिज किया है।
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दो शावकों की हालिया मौत से और बढ़ी चिंता
वन विभाग के डिप्टी कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट धनंजय साहू ने जानकारी दी कि हाल ही में जाफराबाद रेंज से दो शेर के शावकों को बचाया गया था जो बहुत कमजोर थे। इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। प्राथमिक कारण एनीमिया और निमोनिया बताया गया। अधिकारी ने कहा कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, कई बार कुछ शावक जन्म से ही कमजोर होते हैं।
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रूटीन जांच के तहत और शेरों को किया गया रेस्क्यू
सावधानी बरतते हुए वन विभाग ने दो शेरनियों और छह शावकों को भी रूटीन चेकअप के लिए रेस्क्यू किया है। अब तक इन सभी में किसी वायरस का संक्रमण नहीं पाया गया है। अधिकारी ने साफ किया कि विभाग जो भी कार्रवाई कर रहा है वह सुरक्षा और निगरानी के तहत की जा रही है।
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वरिष्ठ वन अधिकारी ने मौके का दौरा किया
एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट जयपाल सिंह ने क्षेत्र का दौरा किया और कहा कि शेरों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैंने बचाए गए शेरों को देखा, वे स्वस्थ हैं और चिंता की कोई बात नहीं है। कर्मचारियों से चर्चा कर सभी जरूरी उपायों पर काम शुरू कर दिया गया है।
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पिछली मौतों में भी प्राकृतिक कारण ही सामने आए
जयपाल सिंह ने बताया कि अब तक हुई ज्यादातर मौतें प्राकृतिक रही हैं। एक समूह में निमोनिया के लक्षण मिले थे और एक शावक में बेहद कम हीमोग्लोबिन पाया गया था जिसे समय रहते ब्लड ट्रांसफ्यूजन देकर बचाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफवाहों की जगह तथ्य पर भरोसा करना चाहिए और वन विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है।
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शनिवार को मांडरडी गांव के पास एक खेत में शेरनी का शव मिला। वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि शव को बाबरकोट एनिमल सेंटर ले जाया गया जहां पोस्टमॉर्टम के बाद मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया। हालांकि, स्थानीय नेताओं का कहना है कि हाल ही में कई शेरों की मौत हो चुकी है, जिससे शक गहराता जा रहा है कि कहीं कोई संक्रामक बीमारी तो इसका कारण नहीं है।
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कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को लेकर चिंता
स्थानीय विधायक जे.वी. ककड़िया ने वन मंत्री मूलू बेड़ा को पत्र लिखकर इस मामले में जांच की मांग की है। उन्होंने आशंका जताई कि पहले भी कई शेरों की मौत कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से हो चुकी है, और हाल की मौतों के पीछे भी यह वायरस हो सकता है। हालांकि, वन विभाग ने अब तक ऐसी किसी आशंका को खारिज किया है।
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दो शावकों की हालिया मौत से और बढ़ी चिंता
वन विभाग के डिप्टी कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट धनंजय साहू ने जानकारी दी कि हाल ही में जाफराबाद रेंज से दो शेर के शावकों को बचाया गया था जो बहुत कमजोर थे। इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। प्राथमिक कारण एनीमिया और निमोनिया बताया गया। अधिकारी ने कहा कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, कई बार कुछ शावक जन्म से ही कमजोर होते हैं।
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रूटीन जांच के तहत और शेरों को किया गया रेस्क्यू
सावधानी बरतते हुए वन विभाग ने दो शेरनियों और छह शावकों को भी रूटीन चेकअप के लिए रेस्क्यू किया है। अब तक इन सभी में किसी वायरस का संक्रमण नहीं पाया गया है। अधिकारी ने साफ किया कि विभाग जो भी कार्रवाई कर रहा है वह सुरक्षा और निगरानी के तहत की जा रही है।
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वरिष्ठ वन अधिकारी ने मौके का दौरा किया
एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट जयपाल सिंह ने क्षेत्र का दौरा किया और कहा कि शेरों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैंने बचाए गए शेरों को देखा, वे स्वस्थ हैं और चिंता की कोई बात नहीं है। कर्मचारियों से चर्चा कर सभी जरूरी उपायों पर काम शुरू कर दिया गया है।
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पिछली मौतों में भी प्राकृतिक कारण ही सामने आए
जयपाल सिंह ने बताया कि अब तक हुई ज्यादातर मौतें प्राकृतिक रही हैं। एक समूह में निमोनिया के लक्षण मिले थे और एक शावक में बेहद कम हीमोग्लोबिन पाया गया था जिसे समय रहते ब्लड ट्रांसफ्यूजन देकर बचाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफवाहों की जगह तथ्य पर भरोसा करना चाहिए और वन विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है।