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Gujarat Weapons Recovery: सीबीआई अदालत ने सह-साजिशकर्ता को 10 साल जेल की सजा सुनाई, जानें 22 साल पहले क्या हुआ

Tue, 27 Jun 2023 10:08 PM IST
देव कश्यप पीटीआी, नई दिल्ली।
पीटीआी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 27 Jun 2023 10:08 PM IST
सार

सीबीआई ने 29 अक्तूबर 2001 को मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जिसके बाद कोलकाता में अमेरिकन सेंटर हमले के मास्टरमाइंड आफताब अंसारी सहित चार लोगों को दोषी ठहराया गया था। जिसे 2002 में दुबई से देश लाया गया था।

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Gujarat Weapons Recovery: CBI court sentences co-conspirator to 10 years in prison
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 22 साल पहले गुजरात के पाटन में भारी मात्रा में हथियारों की बरामदगी के मामले में आतंकवादी आफताब अंसारी के सह-साजिशकर्ता को मंगलवार को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सह-साजिशकर्ता अख्तर हुसैन बसीर अहमद कथित तौर पर 26-27 अक्टूबर, 2001 की मध्यरात्रि को हथियार बरामद होने के बाद अंडरग्राउंड हो गया था और 11 साल बाद 30 मई, 2012 को एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पाटन जिले में एक ट्रक जब्त किया था। जिसमें से 14 किलोग्राम आरडीएक्स, चार किलोग्राम प्लास्टिक विस्फोटक, दो एके -47 राइफल, चार एके -56, दो पिस्तौल, दो राइफलें, एक रेडियो सेट, लोडेड मैगजीन, रिमोट कंट्रोल डिवाइस, 500 कारतूस, 250 पिस्तौल की गोलियां, डेटोनेटर और टाइमर सहित भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया था।
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सीबीआई ने 29 अक्तूबर 2001 को मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जिसके बाद कोलकाता में अमेरिकन सेंटर हमले के मास्टरमाइंड आफताब अंसारी सहित चार लोगों को दोषी ठहराया गया था। जिसे 2002 में दुबई से देश लाया गया था। मामले में पाकिस्तानी नागरिक एडम चीमा (Adam Cheema) अभी भी फरार है। विशेष न्यायाधीश सीजी मेहता ने सोमवार को अहमद को दोषी ठहराया और मंगलवार को सजा सुनाई।
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सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बताया कि अख्तर हुसैन बसीर अहमद जांच के दौरान फरार था। उसने 30 मई 2012 को अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उक्त आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया गया था। केंद्रीय एजेंसी ने 8 नवंबर 2012 को अहमद के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दायर किया था। सीबीआई ने दावा किया था कि आफताब अंसारी ने पाकिस्तान में आतंकवादियों के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की है, खासकर उमर शेख के साथ, जो 1999 में कंधार में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के अपहरण को खत्म करने के लिए भारत द्वारा रिहा किए गए तीन आतंकवादियों में से एक था।

एजेंसी ने कहा था कि जांच में इन हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी में मुख्य आरोपी के रूप में अंसारी की भूमिका सामने आई थी। यह आरोप लगाया गया था कि अंसारी ने अपने गुर्गे आकिब को पैसे भेजने के लिए हवाला ऑपरेटरों की सेवाओं का इस्तेमाल किया था, जो बदले में पाकिस्तान से देश में हथियारों की खेप लाने वाले बंदूकधारियों को भुगतान करता था। अंसारी ने कथित तौर पर आकिब को 25 लाख रुपये नकद भेजने में हवाला ऑपरेटरों की सेवाओं का इस्तेमाल किया ताकि वह खेप लाने वाले व्यक्तियों को पैसे का भुगतान कर सके।

एजेंसी ने दावा किया था कि आकिब ने पूछताछ के दौरान कहा था कि उसे सीमा से एक ट्रक में हथियार और विस्फोटक ले जाने का निर्देश दिया गया था। सीबीआई ने कहा था, सौदा आफताब अंसारी के निर्देशों और निगरानी में किया जा रहा था, जबकि निर्देश अब्दाल के नाम पर टेलीफोन के साथ-साथ ई-मेल पर भी प्राप्त हुए थे, जो कोई और नहीं बल्कि आफताब अंसारी है। अंसारी को अमेरिकन सेंटर पर हमला करने के मामले में दोषी ठहराया गया है और वह कोलकाता की जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।


बता दें, 22 जनवरी, 2002 को दो मोटरसाइकिल सवार हत्यारों ने अमेरिकन सेंटर के सुरक्षा कर्मचारियों पर गोलीबारी की थी, जिसमें चार पुलिस कांस्टेबलों सहित पांच लोग मारे गए थे और 20 घायल हो गए थे।

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