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गुजरात का अनूठा गांव: 24 बैंक शाखाएं, सात हजार करोड़ जमा, 50 फीसदी ग्रामीण नहीं लेते सरकारी योजनाओं का लाभ

Wed, 07 Feb 2024 07:18 AM IST
यशोधन शर्मा संतोष सिंह
संतोष सिंह Published by: यशोधन शर्मा Updated Wed, 07 Feb 2024 07:18 AM IST
सार

माधापर गांव भुज मुख्यालय के करीब है। 2001 के भूकंप के बाद गांव की आबादी 16,280 हो गई है। इसकी गिनती एशिया के सबसे धनी गांवों में होती है। गांव के विनोद पी सोलंकी, मनोज, पारूलबेन आर कारा, हितेशभाई एच खंडोर और लेफ्टिनेंट नरेशभाई माहेश्वरी गुजरात के प्रमुख कारोबारियों की सूची में शामिल हैं।

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Gujarat Unique village 50 percent villagers do not take benefit government schemes
कच्छ जिले का माधापर गांव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भूकंप से तबाही झेलने वाले गुजरात के कच्छ जिले के माधापर गांव में अलग-अलग बैंकों की 24 शाखाएं हैं। इनमें 7,000 करोड़ से ज्यादा रुपये जमा हैं। 80 फीसदी ग्रामीणों का बैंक खाता खुला है। ज्यादातर परिवारों के लोग इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नैरोबी और दक्षिण अफ्रीका में रहते हैं। सब गांव से जुड़े रहते हैं। कमाई का ज्यादातर हिस्सा गांव की बैंकों में जमा कराते हैं। जो ब्याज मिलता है, उसका कुछ हिस्सा गांव के विकास में लगाते हैं। माधापर गांव भुज मुख्यालय के करीब है। 2001 के भूकंप के बाद गांव की आबादी 16,280 हो गई है। इसकी गिनती एशिया के सबसे धनी गांवों में होती है। गांव के विनोद पी सोलंकी, मनोज, पारूलबेन आर कारा, हितेशभाई एच खंडोर और लेफ्टिनेंट नरेशभाई माहेश्वरी गुजरात के प्रमुख कारोबारियों की सूची में शामिल हैं।

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वेबसाइट पर जानकारी
माधापर में कोर्ट स्कूल भी है। इसे खासतौर से गांव के बच्चों को पढ़ाने के लिए बनवाया गया। इंग्लैंड में बसे माधापर के पाटीदार समाज ने एक वेबसाइट भी बनाई है। वेबसाइट के मुताबिक, माधापर गांव में मिस्त्री समाज के लोग भी रहते थे। 1576 के आसपास पाटीदार समाज के लोग आकर बस गए।
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खेती का भी योगदान
गांव के किसान धान और चावल की परंपरागत खेती की जगह मूंग, तिल, बाजारा, ज्वार, अल्फाल्फा और सब्जी की बोआई करते हैं।

माटी से जुड़े एनआरआई
वहीं सरपंच माधापर गंगा बेन नारायण ने बताया कि सशक्त भारत की मजबूत नींव ग्रामीण क्षेत्रों से होती है। इसका आदर्श उदाहरण माधापर है। गांव के ज्यादातर लोग एनआरआई हैं, फिर भी अपनी माटी से जुड़े रहते हैं। 
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आम सहमति से चुनाव
गांव में आम सहमति से चुनाव होता है। वोटिंग की नौबत कम ही आती है। ग्रामीण शिक्षित हैं। गांव में सड़क, पानी, बिजली की बेहतर व्यवस्था है। ग्रामीणों ने मिलकर भव्य द्वार बनवाया है। माधापर को कच्छ और भुज की खास पहचान के रूप में जाना जाता है।

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