फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Gujarat Story Karna last rites were performed here only 3 leaves are planted in this tree for thousand years

Special Story: यहां हुआ था कर्ण का अंतिम संस्कार, हजारों साल से इस पेड़ में लगे हैं केवल तीन पत्ते

Mon, 28 Nov 2022 04:08 PM IST
अभिषेक दीक्षित सूरत से अमित शर्मा की रिपोर्ट
सूरत से अमित शर्मा की रिपोर्ट Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 28 Nov 2022 04:08 PM IST
सार

गुजरात के सूरत शहर के बराछा इलाके के लोगों की मान्यता है कि कर्ण की इच्छा के अनुसार भगवान कृष्ण उनका शवदाह करने के लिए यहां आए। चूंकि केवल एक इंच भूमि ही ऐसी थी जहां इसके पहले किसी का शवदाह नहीं हुआ था और इतनी कम भूमि पर शव रखना और उसका दहन करना संभव नहीं हो सकता था, भगवान कृष्ण ने उस भूमि के टुकड़े पर एक बाण रखकर उसके ऊपर कर्ण का शरीर रखा और अंतिम क्रिया संपन्न किया।

विज्ञापन
Gujarat Story Karna last rites were performed here only 3 leaves are planted in this tree for thousand years
कर्ण के शवदाह की भूमि पर बना तुल्सीबाड़ी मंदिर। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

महाभारत में युद्ध के 17वें दिन महायोद्धा कर्ण की मृत्यु हुई थी। भगवान कृष्ण की प्रेरणा से अर्जुन ने दिव्यास्त्र की सहायता से कर्ण को मारने में सफलता पाई थी। मान्यता है कि कर्ण की वीरता और दानवीरता से प्रसन्न भगवान कृष्ण ने उनके जीवन के अंतिम क्षणों में एक वरदान मांगने को कहा था। कर्ण ने उनसे ऐसी भूमि पर अपना अंतिम संस्कार किए जाने की इच्छा जताई थी, जहां उसके पहले कभी किसी का अंतिम संस्कार न हुआ हो। कहते हैं कि भगवान को पूरी पृथ्वी पर भूमि का कोई ऐसा टुकड़ा नहीं मिला, जहां उसके पहले किसी व्यक्ति की अंतिम क्रिया न हुई हो। केवल सूरत शहर में ताप्ती नदी के किनारे एक इंच भूमि ऐसी मिली, जहां उसके पहले कभी किसी का शवदाह नहीं हुआ था। 

विज्ञापन


विज्ञापन


गुजरात के सूरत शहर के बराछा इलाके के लोगों की मान्यता है कि कर्ण की इच्छा के अनुसार भगवान कृष्ण उनका शवदाह करने के लिए यहां आए। चूंकि केवल एक इंच भूमि ही ऐसी थी जहां इसके पहले किसी का शवदाह नहीं हुआ था और इतनी कम भूमि पर शव रखना और उसका दहन करना संभव नहीं हो सकता था, भगवान कृष्ण ने उस भूमि के टुकड़े पर एक बाण रखकर उसके ऊपर कर्ण का शरीर रखा और अंतिम क्रिया संपन्न किया। सूरत शहर में यह स्थान अब 'तुल्सीबड़ी मंदिर' के रूप में जाना जाता है जिसकी आसपास के लोगों में बड़ी श्रद्धा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मंदिर में दर्शन के लिए आए एक श्रद्धालु प्रेम शंकर शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि ताप्ती नदी के किनारे इस मंदिर की बड़ी मान्यता है और हजारों लोग इसके दर्शन के लिए आते हैं। यहीं पर एक गोशाला स्थापित की गई है जहां गायों की सेवा की जाती है। पूरी एरिया में इस मंदिर के प्रति लोगों की असीम श्रद्धा है और हर वर्ग के लोग इसके दर्शन करने आते हैं। इसके समीप ही बागनाथ मंदिर भी है। 

Gujarat Story Karna last rites were performed here only 3 leaves are planted in this tree for thousand years
स्टील के घेरे में तीन पत्ते वाले बड़ की तस्वीर। - फोटो : Amar Ujala
तीन पत्ते से ज्यादा नहीं बढ़ा यह पेड़
इस मंदिर को तुलसी बाड़ी मंदिर कहा जाता है। यहां तीन पत्ता बड़ का मंदिर भी है। यहां बरगद का एक पेड़ है जिसके बारे में लोगों की मान्यता है कि इसकी उम्र हजारों साल की है, लेकिन इसमें आज तक केवल तीन ही पत्ते आए हैं। तीनों पत्ते सदाबहार रहते हैं, ये आज भी हरे-भरे हैं। लेकिन इसमें कभी कोई नया पत्ता नहीं आता। इस बड़ (बरगद) को घेरकर एक मंदिर बना दिया गया है जहां आसपास के लोग दर्शन के लिए आते हैं। अमावस और पूर्णिमा को यहां आने वाले श्रद्धालुओं-दर्शकों की संख्या बहुत बढ़ जाती है। ताप्ती नदी के किनारे तीन पत्ते बड़ वाला यह मंदिर लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed