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गुजरात दंगे: पीएम मोदी को क्लीन चिट पर सुप्रीम कोर्ट में 14 अप्रैल को सुनवाई 

Tue, 04 Feb 2020 07:58 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Tue, 04 Feb 2020 07:58 PM IST
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Gujarat riots: Hearing on February 14 in Supreme Court on clean chit to PM Narendra Modi
पीएम मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

गुजरात में 2002 में हुए दंगों में मौजूदा प्रधानमंत्री और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 63 लोगों को विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा दी गई क्लीन चिट पर सुप्रीम कोर्ट ने 14 अप्रैल को सुनवाई तय की है। इस मामले में जाकिया जाफरी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर मंगलवार को ताजा सुनवाई में याची की वकील ने स्थगन की अर्जी दी और होली के बाद सुनवाई रखने का आग्रह किया। 

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इस पर कोर्ट ने कहा, ‘मामला कई बार स्थगित हो चुका है, इसे किसी दिन तो सुनना ही होगा।’ कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को अगली तारीख पर उपस्थित रहने के लिए कहा है। जाकिया जाफरी इन दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी हैं। 
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इससे पहले जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी के समक्ष जाकिया की वकील अपर्णा भट्ट ने कहा कि मामला बेहद विवादास्पद है, 27 फरवरी 2002 से मई 2002 तक बड़े षड़यंत्र से संबंधित भी है। ऐसे में संबंधित पक्षों को नोटिस भेजा जाना चाहिए। इसे फिलहाल स्थगित कर होली के अवकाश के बाद सुना जा सकता है। 
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और मोहलत मांगे जाने पर कोर्ट ने कहा, जो भी हो, मामला कई बार स्थगित हो चुका है। इसे किसी दिन तो सुनना होगा। एक तारीख चुनी जाए और उस दिन सभी उपस्थित रहना सुनिश्चित करें। इसके बाद 14 अप्रैल को सुनवाई निर्धारित की गई।

गोधरा कांड के अगले दिन हुए दंगों में मारे गए थे जाफरी
गुजरात के गोधरा में भीड़ द्वारा साबरमती एक्सप्रेस के एस 6 कोच में लगाई आग में 59 लोग जल कर मर गए थे। इसके अगले दिन 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद में हुए दंगे में गुलबर्ग सोसाइटी में 68 लोग मारे गए थे। इनमें प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहसान जाफरी शामिल थे। मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी ने आठ फरवरी 2012 को जांच बंद करते हुए नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ अधिकारियों सहित 63 अन्य लोगों को क्लीन चिट दी थी। उसका कहना था कि इन पर मामला चलाने लायक साक्ष्य नहीं मिलते।

गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी अपील
एसआईटी के निर्णय के खिलाफ जाकिया जाफरी ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने यह अपील पांच अक्तूबर 2017 को खारिज करते हुए कहा था कि एसआईटी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई है। हालांकि मामले की आगे और जांच की जाकिया की मांग स्वीकार करते हुए उन्हें इसके लिए मजिस्ट्रेट, हाईकोर्ट पीठ या सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की छूट दी गई थी।


2018 में दाखिल मौजूदा याचिका में जाकिया का कहना है कि एसआईटी की निचली अदालत को दी गई रिपोर्ट के खिलाफ उन्होंने अर्जी दी थी, लेकिन ठोस वजहों पर विचार किए बिना इसे खारिज कर दिया गया। वहीं हाईकोर्ट ने भी याची की शिकायतों पर गौर नहीं किया।

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