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OSR: 2017 से 2022 के बीच गुजरात की पंचायतों से जुटाई सबसे ज्यादा राशि, प्रतिव्यक्ति ओएसआर में गोवा सबसे आगे
Sun, 17 Nov 2024 03:32 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Sun, 17 Nov 2024 03:32 AM IST
सार
पंचायत राज मंत्रालय के अनुसार, जुटाए आंकड़ों से पता चलता है कि इन पांच वर्षों में पंचायतों ने ओएसआर के तौर पर केवल 5,118.98 करोड़ रुपये ही जुटाए। यह राशि देशभर में 2.25 लाख ग्राम पंचायतों के लिहाज से पांच साल की अवधि में प्रति व्यक्ति 59 रुपये और प्रति पंचायत 2.27 लाख रुपये रही।
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पंचायत राज मंत्रालय
- फोटो : एक्स@mopr_goi
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विस्तार
ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अधिक वित्तीय आजादी सुनिश्चित करने और उनके अपने स्रोत से राजस्व (ओएसआर) बढ़ाने के उपाय किए जाने के बावजूद इसमें बहुत सफलता नहीं मिली है। पंचायती राज मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2017 से 2022 के बीच ग्रामीण स्थानीय निकायों का अपना औसत राजस्व मात्र 59 रुपये प्रति व्यक्ति रहा।
मंत्रालय ने दी जानकारी
पंचायत राज मंत्रालय के मुताबिक, उसकी तरफ से जुटाए आंकड़ों से पता चलता है कि इन पांच वर्षों में पंचायतों ने ओएसआर के तौर पर केवल 5,118.98 करोड़ रुपये ही जुटाए। यह राशि देशभर में 2.25 लाख ग्राम पंचायतों के लिहाज से पांच साल की अवधि में प्रति व्यक्ति 59 रुपये और प्रति पंचायत 2.27 लाख रुपये रही। राज्यों में गुजरात ने सबसे अधिक 829.75 करोड़ रुपये ओएसआर के तौर पर कमाए। केरल 802.95 करोड़ रुपये जुटाने के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
जानें कुछ राज्यों का विवरण
आंध्र प्रदेश ने 791.93 करोड़ रुपये, कर्नाटक ने 627.56 करोड़ रुपये, तमिलनाडु ने 516.3 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल ने 435.17 करोड़ रुपये जुटाए। प्रति व्यक्ति ओएसआर के लिहाज से गोवा 1,635 रुपये के साथ सूची में सबसे ऊपर है और उसके बाद पुडुचेरी (757 रुपये) का स्थान है।
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इसके साथ ही उक्त अवधि में इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाली कुल जनसंख्या 86.95 करोड़ से अधिक थी। पंचायतों को आम तौर पर केंद्र और राज्यों से अनुदान मिलता है। वहीं अपने स्तर पर बाहरी स्रोतों से राजस्व जुटाने के राज्य उन्हें कर, शुल्क, टोल आदि लगाने के लिए अधिकृत कर सकते हैं।
एक नजर ऐसे राज्य पर जहां ओएसआर है और नहीं
बात अगर यूपी, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, मणिपुर, नगालैंड, सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, लद्दाख और लक्षद्वीप उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हैं, जहां ओएसआर नियम नहीं हैं।
दूसरी ओर आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी आदि ने पंचायतों को ओएसआर जुटाने के लिए अधिकृत किया है।
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मंत्रालय ने दी जानकारी
पंचायत राज मंत्रालय के मुताबिक, उसकी तरफ से जुटाए आंकड़ों से पता चलता है कि इन पांच वर्षों में पंचायतों ने ओएसआर के तौर पर केवल 5,118.98 करोड़ रुपये ही जुटाए। यह राशि देशभर में 2.25 लाख ग्राम पंचायतों के लिहाज से पांच साल की अवधि में प्रति व्यक्ति 59 रुपये और प्रति पंचायत 2.27 लाख रुपये रही। राज्यों में गुजरात ने सबसे अधिक 829.75 करोड़ रुपये ओएसआर के तौर पर कमाए। केरल 802.95 करोड़ रुपये जुटाने के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
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जानें कुछ राज्यों का विवरण
आंध्र प्रदेश ने 791.93 करोड़ रुपये, कर्नाटक ने 627.56 करोड़ रुपये, तमिलनाडु ने 516.3 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल ने 435.17 करोड़ रुपये जुटाए। प्रति व्यक्ति ओएसआर के लिहाज से गोवा 1,635 रुपये के साथ सूची में सबसे ऊपर है और उसके बाद पुडुचेरी (757 रुपये) का स्थान है।
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इसके साथ ही उक्त अवधि में इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाली कुल जनसंख्या 86.95 करोड़ से अधिक थी। पंचायतों को आम तौर पर केंद्र और राज्यों से अनुदान मिलता है। वहीं अपने स्तर पर बाहरी स्रोतों से राजस्व जुटाने के राज्य उन्हें कर, शुल्क, टोल आदि लगाने के लिए अधिकृत कर सकते हैं।
एक नजर ऐसे राज्य पर जहां ओएसआर है और नहीं
बात अगर यूपी, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, मणिपुर, नगालैंड, सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, लद्दाख और लक्षद्वीप उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हैं, जहां ओएसआर नियम नहीं हैं।
दूसरी ओर आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी आदि ने पंचायतों को ओएसआर जुटाने के लिए अधिकृत किया है।