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Morbi: पीएम मोदी को बड़ा दर्द दे गया मोरबी कांड, राहुल गांधी ने कहा, नहीं बनाएंगे राजनीति का मुद्दा
सार
केंद्र ने मोरबी हादसे में मारे गए लोगों के परिवार वालों की भावनाओं का ध्यान रखने के लिए विशेष निर्देश दिए हैं। केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक के अधिकारियों को पीड़ितों के परिजनों को सभी आवश्यक सूचनाएं और सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
मोरबी हादसे (Morbi) ने पीएम नरेंद्र मोदी को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। उनके राजनीतिक जीवन में गोधरा कांड के बाद यह दूसरा अवसर है जब वे अपने गृहराज्य में घटी किसी घटना पर इतने व्यथित दिखाई पड़े हैं। सोमवार सुबह आयोजित नेशनल यूनिटी डे के कार्यक्रम में बोलते हुए उनका गला रुंध गया। मंगलवार सुबह वे स्वयं पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे और उन्हें सांत्वना देंगे। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि वे इस मुद्दे पर कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं करेंगे क्योंकि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में लोगों ने जान गंवाई है, ऐसा करना इन पीड़ित परिवारों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना होगा।
केंद्र ने मोरबी हादसे में मारे गए लोगों के परिवार वालों की भावनाओं का ध्यान रखने के लिए विशेष निर्देश दिए हैं। केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक के अधिकारियों को पीड़ितों के परिजनों को सभी आवश्यक सूचनाएं और सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। प्रधानमंत्री ने स्वयं मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों से बातचीत कर हालात का जायजा लिया है। गृहमंत्री अमित शाह भी अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
सोमवार को इस घटना की चर्चा करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गला भर आया। इसके पहले गुलाम नबी आज़ाद का राज्यसभा में कार्यकाल ख़त्म होने के समय गुजरात दंगों की बात याद करते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। पीएम की यह संवेदनशीलता बताती है कि अपने गृहराज्य में घटी किसी घटना को लेकर वे कितने संवेदनशील हैं। पीड़ितों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के एनी नेताओं ने अपने सभी राजनीतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए। राजधानी दिल्ली में भी पार्टी ने अपने कई कार्यक्रम मोरबी घटना को देखते हुए रद्द कर दिए।
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विपक्ष ने दी बेहद सधी प्रतिक्रिया
इस घटना के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस दुःख की घड़ी में वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं। कांग्रेस पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को भी घटनास्थल पर पहुंचने और पीड़ितों की यथासंभव मदद करने का निर्देश दिया। राहुल गांधी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस मुद्दे पर कोई राजनीति न करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करना उन पीड़ित परिवारों की भावनाओं के प्रति अपमानजनक होगा जिन्होंने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में अपने परिजनों की जान गंवाई है।
गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन भाई मोडवाडिया ने कहा कि उनके गृहराज्य के लिए यह बेहद दुखद घडी है। लेकिन वे सभी पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं और अपनी तरफ से हर संभव मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों का भी धन्यवाद दिया जो दुर्घटना होने के तुरंत बाद घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे और नदी में डूब रहे लोगों को बचाने और पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने में प्रशासन की मदद की।
कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल
हालांकि, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मामले को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर लापरवाही का मामला है। इस दुर्घटना में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। यह पता चलना चाहिए कि किसकी लापरवाही के कारण इतने लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अधिकारियों ने कहा है कि उनकी अनुमति के बिना पुल को जनता के लिए खोल दिया गया। उन्होंने कहा कि यह पता चलना चाहिए कि किसकी अनुमति के बाद इस पुल को जनता के लिए खोल दिया गया।
पुल पर लोगों की भारी संख्या में उपस्थिति को लेकर भी प्रश्न उठाये जा रहे हैं। श्रीनेत ने कहा है कि यह पता चला है कि पिछले पांच दिनों में वहां 12 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे थे। कहा जा रहा है कि पुल की क्षमता केवल सौ लोगों का भार सहन करने की थी। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में लोग वहां कैसे पहुंचे और ऐसे समय में प्रशासन क्या कर रहा था। उन्होंने इस दुर्घटना के लिए अब तक किसी की स्पष्ट जिम्मेदारी तय न होने को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
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केंद्र ने मोरबी हादसे में मारे गए लोगों के परिवार वालों की भावनाओं का ध्यान रखने के लिए विशेष निर्देश दिए हैं। केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक के अधिकारियों को पीड़ितों के परिजनों को सभी आवश्यक सूचनाएं और सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। प्रधानमंत्री ने स्वयं मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों से बातचीत कर हालात का जायजा लिया है। गृहमंत्री अमित शाह भी अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
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सोमवार को इस घटना की चर्चा करते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गला भर आया। इसके पहले गुलाम नबी आज़ाद का राज्यसभा में कार्यकाल ख़त्म होने के समय गुजरात दंगों की बात याद करते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। पीएम की यह संवेदनशीलता बताती है कि अपने गृहराज्य में घटी किसी घटना को लेकर वे कितने संवेदनशील हैं। पीड़ितों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के एनी नेताओं ने अपने सभी राजनीतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए। राजधानी दिल्ली में भी पार्टी ने अपने कई कार्यक्रम मोरबी घटना को देखते हुए रद्द कर दिए।
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विपक्ष ने दी बेहद सधी प्रतिक्रिया
इस घटना के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस दुःख की घड़ी में वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं। कांग्रेस पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को भी घटनास्थल पर पहुंचने और पीड़ितों की यथासंभव मदद करने का निर्देश दिया। राहुल गांधी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस मुद्दे पर कोई राजनीति न करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करना उन पीड़ित परिवारों की भावनाओं के प्रति अपमानजनक होगा जिन्होंने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में अपने परिजनों की जान गंवाई है।
गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन भाई मोडवाडिया ने कहा कि उनके गृहराज्य के लिए यह बेहद दुखद घडी है। लेकिन वे सभी पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं और अपनी तरफ से हर संभव मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय लोगों का भी धन्यवाद दिया जो दुर्घटना होने के तुरंत बाद घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे और नदी में डूब रहे लोगों को बचाने और पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने में प्रशासन की मदद की।
कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल
हालांकि, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मामले को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर लापरवाही का मामला है। इस दुर्घटना में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। यह पता चलना चाहिए कि किसकी लापरवाही के कारण इतने लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अधिकारियों ने कहा है कि उनकी अनुमति के बिना पुल को जनता के लिए खोल दिया गया। उन्होंने कहा कि यह पता चलना चाहिए कि किसकी अनुमति के बाद इस पुल को जनता के लिए खोल दिया गया।
पुल पर लोगों की भारी संख्या में उपस्थिति को लेकर भी प्रश्न उठाये जा रहे हैं। श्रीनेत ने कहा है कि यह पता चला है कि पिछले पांच दिनों में वहां 12 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे थे। कहा जा रहा है कि पुल की क्षमता केवल सौ लोगों का भार सहन करने की थी। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में लोग वहां कैसे पहुंचे और ऐसे समय में प्रशासन क्या कर रहा था। उन्होंने इस दुर्घटना के लिए अब तक किसी की स्पष्ट जिम्मेदारी तय न होने को लेकर भी सवाल उठाए हैं।