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गुजरात: क्या राज्य में जिग्नेश करेंगे राहुल का कंधा मजबूत, एससी कार्ड से कांग्रेस को कितना होगा फायदा
Tue, 28 Sep 2021 10:29 AM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Tue, 28 Sep 2021 10:29 AM IST
सार
एससी नेता के तौर पर तेजी से पहचान बना रहे जिग्नेश मेवानी को मायावती ने 2018 में खूब निशाने पर लिया था। मायावती ने एससी समुदाय को आगाह किया था कि वे जिग्नेश की शक्ल में कांग्रेस की चाल से बचकर रहें। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मायावती के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए मेवानी लंबा प्रवास करेंगे।
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जिग्नेश मेवानी कांग्रेस का हाथ करेंगे मजबूत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गुजरात में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री के साथ पूरे मंत्रिमंडल में बदलाव कर दिया है तो कांग्रेस भी नए चेहरे के साथ चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। जिग्नेश मेवानी राज्य में कांग्रेस का नया चेहरा बनेंगे। चुनाव में अपना हाथ मजबूत करने के लिए कांग्रेस को अनुसूचित जाति के कद्दावर चेहरे जिग्नेश मेवानी का साथ मिलने जा रहा है। मेवानी ने 26 सितंबर को पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनके साथ सीपीआई नेता कन्हैया कुमार भी कांग्रेस में शामिल होंगे। दोनों नेता राहुल गांधी और गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होंगे।
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कांग्रेस से पुराना नाता
एससी समुदाय से आने वाले 41 वर्षीय मेवानी, पहली बार हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर के साथ 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान गुजरात में भाजपा के प्रभुत्व को चुनौती देने वाले युवा चेहरे के रूप में उभरे थे। अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल और मेवाणी की तिकड़ी ने 2017 के चुनावों में कांग्रेस का साथ दिया था। कहा जाता है कि तब के चुनाव में गुजरात में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के पीछे काफी हद तक सूबे के इन तीनों युवा नेताओं की तिकड़ी का ही हाथ था। इन नेताओं ने अपनी-अपनी जातियों में गहरी पैठ के कारण कांग्रेस को सूबे में भाजपा के खिलाफ मजबूती से खड़े होने में काफी मदद की थी।
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कांग्रेस ने इसके बदले जिग्नेश जहां से निर्दलीय चुनाव लड़े थे. वहां पर अपना उमीदवार भी खड़ा नहीं किया था। हालांकि कांग्रेस ने तब 77 सीटें जीतकर अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन बहुमत नहीं पा सकी थी। उस चुनाव में भाजपा को 99 सीटें मिली थीं। अब कांग्रेस आगामी चुनाव से पहले मेवानी को शामिल करना चाहती है। अल्पेश ठाकोर भाजपा में शामिल हो चुके हैं और हार्दिक पहले ही कांग्रेस का हिस्सा बन चुके हैं।
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जिग्नेश भले ही कांग्रेस में नहीं थे,पर प्रदेश की भाजपा सरकार के सामने विरोधी पक्ष की तरह ही दिखाई दे रहे थे। कहा जा रहा है कि इस लिहाज से उनकी यह पृष्ठभूमि कांग्रेस का हाथ मजबूत करने में मददगार साबित होगी। उन्होंने 2017 के चुनाव में में उत्तरी गुजरात की आरक्षित वडगाम विधानसभा सीट से जीत हासिल की। कन्हैया कुमार की तरह वे उग्र वक्ता, वाकपटुता में माहिर हैं और विपक्ष पर तथ्यों से वार करने वाले माने जाते हैं।
हार्दिक पटेल (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
कांग्रेस को कितना होगा फायदा?
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक गुजरात में मुख्यमंत्री समेत पूरा कैबिनेट बदले जाने के भाजपा के फैसले से बहुत पहले मेवानी की कांग्रेस के साथ बातचीत चल रही थी। वे जिस समुदाय से आते हैं ऐसे में उनका इस समय कांग्रेस में शामिल होना और महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा के नए मुख्यमंत्री पटेल हैं, जबकि आम आदमी पार्टी भी राज्य में अगले साल होने वाले चुनाव में इसी समुदाय पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कांग्रेस की रणनीति भी ओबीसी और एससी को लुभाने की है तो ऐसे में मेवानी चुनावी रणनीति के मापदंड पर फिट बैठ रहे हैं। गुजरात में कांग्रेस के कई नेता इसे समय पर उठाया गया कदम बताते हैं।
उन्हें अपना पुराना दोस्त बताते हुए हार्दिक ने शनिवार को मीडिया से कहा देश के लिए काम करने और कांग्रेस को मजबूत करने के इच्छुक सभी क्रांतिकारी नेताओं का स्वागत है। उन्होंने कहा "अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और चुनौतियों की चिंता किए बिना" ऐसा करना चाहिए। पटेल के मुताबिक मेवानी के आने से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को मजबूती मिलेगी।
ऊना कांड से एससी समुदाय की आवाज बन गए मेवानी
11 जुलाई 2016 में ऊना की एक घटना ने देश को शर्मसार कर दिया था। एक गाय के शव को उठाने के बाद चार एससी समुदाय के युवकों की पिटाई कर दी गई थी। ऊना की इस घटना के बाद प्रदेश के एससी समाज के युवा सड़कों पर उतरे और मरी हुई गायों को उठाने से मना कर दिया था। जिग्नेश मेवानी इस आंदोलन का नेतृत्व करने लगे और वे अपने समुदाय की आवाज बन गए। उन्हें एससी समुदाय के साथ मुसलमानों का भी सहयोग मिला।
ऊना कांड के खिलाफ लंबे संघर्ष के कारण जिग्नेश मेवाणी गुजरात में एक युवा एससी नेता के रूप में उभरे। इस घटना की आवाज संसद में भी गूंजी और मेवानी गुजरात से बाहर भी युवाओं में लोकप्रिय होते गए। 2017 के गुजरात चुनाव में जिग्नेश ने भाजपा के खिलाफ प्रचार किया। वे निर्दलीय चुनाव भी लड़े और जीत कर विधानसभा पहुंचे।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक गुजरात में मुख्यमंत्री समेत पूरा कैबिनेट बदले जाने के भाजपा के फैसले से बहुत पहले मेवानी की कांग्रेस के साथ बातचीत चल रही थी। वे जिस समुदाय से आते हैं ऐसे में उनका इस समय कांग्रेस में शामिल होना और महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा के नए मुख्यमंत्री पटेल हैं, जबकि आम आदमी पार्टी भी राज्य में अगले साल होने वाले चुनाव में इसी समुदाय पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कांग्रेस की रणनीति भी ओबीसी और एससी को लुभाने की है तो ऐसे में मेवानी चुनावी रणनीति के मापदंड पर फिट बैठ रहे हैं। गुजरात में कांग्रेस के कई नेता इसे समय पर उठाया गया कदम बताते हैं।
उन्हें अपना पुराना दोस्त बताते हुए हार्दिक ने शनिवार को मीडिया से कहा देश के लिए काम करने और कांग्रेस को मजबूत करने के इच्छुक सभी क्रांतिकारी नेताओं का स्वागत है। उन्होंने कहा "अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और चुनौतियों की चिंता किए बिना" ऐसा करना चाहिए। पटेल के मुताबिक मेवानी के आने से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को मजबूती मिलेगी।
ऊना कांड से एससी समुदाय की आवाज बन गए मेवानी
11 जुलाई 2016 में ऊना की एक घटना ने देश को शर्मसार कर दिया था। एक गाय के शव को उठाने के बाद चार एससी समुदाय के युवकों की पिटाई कर दी गई थी। ऊना की इस घटना के बाद प्रदेश के एससी समाज के युवा सड़कों पर उतरे और मरी हुई गायों को उठाने से मना कर दिया था। जिग्नेश मेवानी इस आंदोलन का नेतृत्व करने लगे और वे अपने समुदाय की आवाज बन गए। उन्हें एससी समुदाय के साथ मुसलमानों का भी सहयोग मिला।
ऊना कांड के खिलाफ लंबे संघर्ष के कारण जिग्नेश मेवाणी गुजरात में एक युवा एससी नेता के रूप में उभरे। इस घटना की आवाज संसद में भी गूंजी और मेवानी गुजरात से बाहर भी युवाओं में लोकप्रिय होते गए। 2017 के गुजरात चुनाव में जिग्नेश ने भाजपा के खिलाफ प्रचार किया। वे निर्दलीय चुनाव भी लड़े और जीत कर विधानसभा पहुंचे।
जिग्नेश मेवानी
- फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अभी पंजाब में एक एससी समुदाय के नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद गुजरात में एससी समुदाय के एक युवा नेता को पार्टी में शामिल करने से कांग्रेस एससी समुदाय के बीच एक बार फिर विश्वास बहाली की कोशिश कर सकती है। मेवाणी भाजपा और उसके नेतृत्व के मुखर विरोधी रहे हैं और कांग्रेस को उनकी तरह एक आक्रमक नेता की जरूरत है जो पार्टी में जान फूंक सके। राज्य में तकरीबन सात फीसदी एससी आबादी है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की टीम में कुछ पूर्व वाम नेता शामिल हैं इस लिहाज से मेवानी और कन्हैया दोनों इस टीम के लिए भी फिट माने जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, प्रियंका की टीम में एक प्रमुख सदस्य संदीप सिंह हैं, जो जेएनयू के पूर्व आइसा नेता हैं। आइसा भाकपा (माले) लिबरेशन की छात्र शाखा है। आइसा के एक अन्य पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष मोहित पांडे, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग के प्रमुख रहे, जिन्हें प्रियंका अब एआईसीसी महासचिव के रूप में देखती हैं।
यूपी चुनाव में बन सकते हैं पार्टी के स्टार प्रचारक
उत्तर प्रदेश से जुड़े कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक जिग्नेश गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के स्टार प्रचारक हो सकते हैं। बसपा के एससी वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए एससी बहुल सीटों पर उन्हें चुनाव प्रचार और उम्मीदवारों की मदद के लिए उतारा जा सकता है। जिग्नेश ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार के बेगूसराय में कन्हैया कुमार के लिए भी प्रचार किया था।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की टीम में कुछ पूर्व वाम नेता शामिल हैं इस लिहाज से मेवानी और कन्हैया दोनों इस टीम के लिए भी फिट माने जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, प्रियंका की टीम में एक प्रमुख सदस्य संदीप सिंह हैं, जो जेएनयू के पूर्व आइसा नेता हैं। आइसा भाकपा (माले) लिबरेशन की छात्र शाखा है। आइसा के एक अन्य पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष मोहित पांडे, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सोशल मीडिया विभाग के प्रमुख रहे, जिन्हें प्रियंका अब एआईसीसी महासचिव के रूप में देखती हैं।
यूपी चुनाव में बन सकते हैं पार्टी के स्टार प्रचारक
उत्तर प्रदेश से जुड़े कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक जिग्नेश गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के स्टार प्रचारक हो सकते हैं। बसपा के एससी वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए एससी बहुल सीटों पर उन्हें चुनाव प्रचार और उम्मीदवारों की मदद के लिए उतारा जा सकता है। जिग्नेश ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार के बेगूसराय में कन्हैया कुमार के लिए भी प्रचार किया था।