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हार्दिक पटेल को बड़ी राहत, गुजरात हाईकोर्ट ने 2015 दंगों के लिए सजा पर लगाई रोक
एजेंसी, अहमदाबाद
Updated Thu, 09 Aug 2018 02:02 AM IST
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पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को राहत (फाइल फोटो)
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गुजरात हाईकोर्ट ने 2015 के एक दंगा मामले में पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को राहत दी है। अदालत ने इस मामले में निचली अदालत की तरफ से दो साल जेल की सजा के आदेश को निलंबित कर दिया।
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जस्टिस एसएच वोहरा ने मामले में हार्दिक पटेल की जमानत को भी मंजूरी दे दी। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार हार्दिक को मामले की सुनवाई जारी रहने तक पुलिस के सामने सरेंडर नहीं करना पड़ेगा। इससे पहले हार्दिक ने 25 जुलाई को विसनगर अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।
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ज्ञात हो कि गुजरात में 146 समुदायों को (अन्य पिछड़ा वर्ग) ओबीसी के तहत आरक्षित किया गया है, जिसमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल है। ओबीसी समुदाय को सरकारी नौकरियों में 27 फीसदी का आरक्षण मिलता है, जबकि एससी को 7.5 फीसदी और एसटी को 15 फीसदी का आरक्षण मिलता है।
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गुजरात में कब हुई थी आरक्षण की शुरुआत
गुजरात में आरक्षण की शुरुआत साल 1981 में हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी के नेतृत्व वाली सरकार ने जस्टिस ए. आर. बख्शी आयोग की सिफारिशों के आधार पर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े जातियों के लिए आरक्षण की शुरुआत की थी। उस समय भी इसको लेकर राज्य भर में पाटीदारों ने आंदोलन किया था। इन आंदोलनों ने धीरे-धीरे दंगे का रूप ले लिया था, जिसमें सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद कुछ सालों तक मामला थोड़ा शांत रहा, लेकिन 2012 में एक बार फिर पाटीदारों का मन बदला और उन्होंने फिर आरक्षण की मांग उठाई।