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Nithyananda: हाईकोर्ट में दो बेटियों पर दावा खारिज; खंडपीठ बोली- दोनों खुश, अपनी मर्जी से चुनी आध्यात्मिक राह

Sun, 04 Feb 2024 06:03 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 04 Feb 2024 06:03 PM IST
सार

स्वयंभू बाबा नित्यानंद से जुड़े मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने दो बेटियों पर दावा करने वाले शख्स की याचिका खारिज कर दी है। दो जजों की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि 21 और 18 साल की बेटियां खुश हैं। कानूनी रूप से बालिग दोनों ने अपनी मर्जी से आध्यात्म की राह चुनी है।

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Gujarat High Court daughters not in illegal confinement of Godman Nithyananda
गुजरात हाईकोर्ट में अपनी 2 बेटियों पर दावा करने वाले शख्स की याचिका खारिज - फोटो : amar ujala graphics

विस्तार

गुजरात हाईकोर्ट में एक शख्स की याचिका खारिज हो गई। याचिकाकर्ता ने 21 और 18 साल की दो बेटियों को अपना बताते हुए दावा किया था कि दोनों स्वयंभू बाबा नित्यानंद की अवैध कैद में हैं। इस व्यक्ति ने हाईकोर्ट से दोनों बेटियों को मुक्त कराने की गुहार लगाई थी, लेकिन दो जजों की खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एवाई कोगजे और न्यायमूर्ति राजेंद्र एम सरीन की खंडपीठ ने जनार्दन शर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर कहा कि अदालत दोनों बेटियों की स्थिति से संतुष्ट है। दोनों स्वयंभू बाबा और भगोड़े स्वामी नित्यानंद की अवैध कैद में नहीं, बल्कि खुश हैं और आध्यात्मिक पथ पर चल रही हैं।
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वीडियो लिंक के माध्यम से बेटियों की पेशी
21 साल और 18 साल की बेटियों को सशरीर कोर्ट में पेश करने की अपील वाली याचिका (Habeas Corpus) पर गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शुक्रवार को आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि बेटियां अपने निवास स्थान पर खुश हैं। 10 जनवरी, 2024 को वीडियो लिंक के माध्यम से दोनों को कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने कहा, दोनों बेटियों के बयान और उनकी स्थिति देखने के बाद संकेत मिलता है कि वे किसी की 'अवैध कैद' में नहीं हैं। अदालत ने कहा कि दोनों बालिग हैं और पूरे होशोहवास में आध्यात्मिक रास्ते पर चलने का फैसला लिया है।
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'दोनों खुश हैं और अपनी मर्जी से आध्यात्मिक रास्ता चुना'
अदालत ने साफ किया, दोनों के साक्षात्कार के बाद कोर्ट संतुष्ट है कि दोनों वयस्क हैं। अपनी भलाई का फैसला लेने के लिए परिवक्व और पूरी तरह सक्षम हैं। यह भी साफ है कि दोनों फिलहाल जहां रह रही हैं, वहां खुश हैं और अपनी मर्जी से आध्यात्मिक रास्ते पर चल रही हैं। खबरों के मुताबिक वर्चुअल बातचीत को रिकॉर्ड किया गया है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को मुकदमे के हिस्से के रूप में वीडियो रिकॉर्डिंग को सहेजने का निर्देश भी दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि तथ्यों और वीडियो इंटरव्यू के आधार पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) खारिज की जाती है।
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अहमदाबाद स्थित आश्रम में अवैध रूप से कैद रखने के आरोप
कोर्ट ने दोनों बेटियों की तरफ से संचालित आध्यात्मिक सत्रों को भी नोट किया। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों ने संकेत दिया है कि दुनियाभर में कई लोग उनका अनुसरण कर रहे हैं। यह बयान भरोसेमंद है और यह मानने का कोई आधार नहीं कि उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा है, या उन्हें कैद में रखा गया है। नवंबर, 2019 में दायर याचिका में जनार्दन शर्मा ने दावा किया था कि उनकी दोनों बेटियों को नित्यानंद के अहमदाबाद स्थित आश्रम में अवैध रूप से कैद रखा गया है। उन्होंने कहा था कि नित्यानंद के भारत से भागने के बाद दोनों बेटियों को अगवा कर लिया गया।


कौन है स्वयंभू नित्यानंद?
साल 2019 में नित्यानंद ने दावा किया कि उसने 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा' नाम से एक देश की स्थापना की है। हालांकि इसे 'फर्जी देश' माना जाता है। कैलासा की वेबसाइट पर दर्ज विवरण में यहां की आबादी में 'दो अरब हिंदू धर्मावलंबी' शामिल हैं। नित्यानंद भारत में बलात्कार और यौन उत्पीड़न के कई आरोपों में वांछित है। हालांकि, उसने आरोपों से इनकार किया है। फिलहाल, नित्यानंद एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर है।
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