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Gujarat High Court: मेहुल चोकसी को झटका, 2017 के धोखाधड़ी मामले को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज
Wed, 11 Oct 2023 10:09 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 11 Oct 2023 10:09 PM IST
सार
गुजरात हाईकोर्ट ने भगोड़े चोकसी के 2017 के धोखाधड़ी मामले को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि पहली नजर में चोकसी और अन्य के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी का मामला बनता है।
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Gujrat high court
- फोटो : social media
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विस्तार
भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी की मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं। भगोड़े चोकसी की 2017 के धोखाधड़ी मामले को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज हो गई है। बुधवार को गुजरात हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि मेहुल ने अपनी फर्म गीतांजलि ज्वैलरी की फ्रेंचाइजी के जरिए एक महिला के साथ धोखाधड़ी की थी। जिसके बाद महिला ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। मेहुल ने एफआईआर को रद्द करने के लिए एक याचिका दायर की थी, जिसको गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। मेहुल 13 हजार करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में वांछित आरोपी है।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि पहली नजर में चोकसी और अन्य के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी का मामला बनता है। यह कहते हुए कोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। बता दें कि दिव्यनिर्माण ज्वैलर्स फ्रेंचाइजी के मालिक दिग्विजय जड़ेजा, गीतांजलि समूह के प्रबंध निदेशक मेहुल चोकसी और गीतांजलि समूह के दो निदेशकों को मामले में आरोपी बनाया गया था।
वहीं चोकसी के वकील ने दावा किया कि याचिकाकर्ताओं और शिकायतकर्ता के बीच मामला सुलझ गया था और उसने 25 अगस्त, 2017 को लिखे अपने पत्र में कहा था कि वह आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस बचाव को स्वीकार नहीं किया।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया में यह पाया गया कि फ्रेंचाइजी के झूठे वादे करने के बाद ऐसे शोरूम बंद कर दिए जाते है। जिन ग्राहकों ने अपना पैसा निवेश किया है। हर उस जगह जहां गीतांजलि जेम्स की फ्रेंचाइजी थी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह भी सत्य है कि केवल निदेशक होने के कारण उन्हें आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है लेकिन वर्तमान मामले में आरोपों की प्रकृति देखते हुए यह बड़ा घोटाला लगता है।
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सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि पहली नजर में चोकसी और अन्य के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी का मामला बनता है। यह कहते हुए कोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। बता दें कि दिव्यनिर्माण ज्वैलर्स फ्रेंचाइजी के मालिक दिग्विजय जड़ेजा, गीतांजलि समूह के प्रबंध निदेशक मेहुल चोकसी और गीतांजलि समूह के दो निदेशकों को मामले में आरोपी बनाया गया था।
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वहीं चोकसी के वकील ने दावा किया कि याचिकाकर्ताओं और शिकायतकर्ता के बीच मामला सुलझ गया था और उसने 25 अगस्त, 2017 को लिखे अपने पत्र में कहा था कि वह आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस बचाव को स्वीकार नहीं किया।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया में यह पाया गया कि फ्रेंचाइजी के झूठे वादे करने के बाद ऐसे शोरूम बंद कर दिए जाते है। जिन ग्राहकों ने अपना पैसा निवेश किया है। हर उस जगह जहां गीतांजलि जेम्स की फ्रेंचाइजी थी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह भी सत्य है कि केवल निदेशक होने के कारण उन्हें आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है लेकिन वर्तमान मामले में आरोपों की प्रकृति देखते हुए यह बड़ा घोटाला लगता है।