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Teesta Setalvad: तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई; सरकार और जांच अधिकारी को नोटिस जारी
Wed, 25 Oct 2023 09:43 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 25 Oct 2023 09:43 PM IST
सार
जस्टिस जेसी दोशी की अदालत ने सीतलवाड़ की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान पीठ ने राज्य सरकार और जांच अधिकारी को नोटिस जारी किया। इस पर दोनों को 29 नवंबर तक जवाब दाखिल करना होगा।
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तीस्ता सीतलवाड़
विस्तार
गुजरात हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका को लेकर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में 2002 के दंगों के मामलों में कथित तौर पर फर्जी सबूत तैयार करने के लिए शहर की अपराध शाखा द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई है।
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जस्टिस जेसी दोशी की अदालत ने सीतलवाड़ की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान पीठ ने राज्य सरकार और जांच अधिकारी को नोटिस जारी किया। दोनों को जारी किए गए नोटिस पर 29 नवंबर तक जवाब दाखिल करना होगा। अदालत ने मामले में चल रही सुनवाई पर रोक लगाकर अंतरिम राहत देने की सीतलवाड़ की याचिका पर भी सरकार को नोटिस जारी किया। इस पर भी 29 नवंबर तक जवाब देना होगा। अदालत ने जांच अधिकारी को जांच में प्रगति के बारे में एक रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया।
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साथ ही याचिकाकर्ता को एक हलफनामे के माध्यम से अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने की अनुमति दी। इससे पहले, सत्र अदालत ने इस मामले में सीतलवाड की आरोपमुक्ति याचिका खारिज कर दी थी। वहीं, इसके बाद वे गुजरात हाईकोर्ट पहुंची जहां से भी उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जुलाई में उन्हें जमानत दे दी थी।
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यह है पूरा मामला
बता दें कि सीतलवाड़ को पिछले साल 25 जून को गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार और पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के साथ अहमदाबाद अपराध शाखा पुलिस द्वारा दर्ज अपराध में 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के संबंध में कथित तौर पर "निर्दोष लोगों" को फंसाने के लिए मनगढ़ंत सबूतों के इस्तेमाल करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने 30 जुलाई, 2022 को मामले में सीतलवाड़ और श्रीकुमार की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था और कहा था कि उनकी रिहाई से गलत काम करने वालों को यह संदेश जाएगा कि कोई व्यक्ति बिना किसी दंड के आरोप लगा सकता है और बच सकता है। हाईकोर्ट ने तीन अगस्त, 2022 को सीतलवाड़ की जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था और मामले की सुनवाई 19 सितंबर को तय की थी। इस बीच, उच्च न्यायालय द्वारा उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार करने के बाद उन्होंने अंतरिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट (एससी) का रुख किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दो सितंबर को उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी और उनसे तब तक ट्रायल कोर्ट में अपना पासपोर्ट जमा करने को कहा था, जब तक गुजरात हाईकोर्ट उनकी नियमित जमानत याचिका पर फैसला नहीं कर देता। शीर्ष अदालत ने उनसे मामले की जांच में जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने को भी कहा था। सीतलवाड तीन सितंबर को जेल से बाहर आई थीं।
जकिया जाफरी मामले में शीर्ष अदालत के 24 जून के फैसले के कुछ दिनों बाद सीतलवाड़ और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बता दें कि 2002 के गुजरात दंगे उस साल 27 फरवरी को गोधरा स्टेशन के पास भीड़ द्वारा साबरमती एक्सप्रेस के एक कोच में आग लगाने से भड़के थे। इस घटना में 59 यात्री, जिनमें ज्यादातर अयोध्या से लौट रहे हिंदू कारसेवक थे, जलकर मर गए थे। पिछले महीने ट्रायल कोर्ट ने मामले में आरोपमुक्त करने की पूर्व डीजीपी श्रीकुमार की याचिका भी खारिज कर दी थी। श्रीकुमार गुजरात हाईकोर्ट द्वारा दिए गए मामले में अंतरिम जमानत पर बाहर हैं। मामले के तीसरे आरोपी पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया है। जब भट्ट को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था, तो वह पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में जेल में थे।