Morbi Bridge Collapse: पुल हादसे के पांच माह बाद गुजरात सरकार की बड़ी कार्रवाई, मोरबी नगरपालिका भंग
जनवरी में राज्य के शहरी विकास विभाग ने नगरपालिका को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर पूछा था कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहने के लिए इसे भंग क्यों नहीं किया जाना चाहिए।
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गुजरात के मोरबी शहर में एक पुल के ढहने से 135 लोगों की मौत के कुछ महीने बाद राज्य सरकार ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने शहर की मोरबी नगरपालिका को भंग कर दिया है। इस नगरपालिका पर भाजपा का नियंत्रण था, जो राज्य में सत्ताधारी पार्टी भी है।
झूला पुल के टूटने से हुई थी 135 लोगों की मौत
मोरबी के जिलाधिकारी जीटी पंड्या ने पीटीआई-भाषा को बताया, "राज्य सरकार ने मोरबी नगरपालिका को भंग कर दिया है।" मोरबी शहर में मछु नदी पर बना झूला पुल 30 अक्तूबर, 2022 को ढह गया था, जिसमें 135 लोगों की मौत हो गई थी। नगरपालिका के साथ हस्ताक्षरित एक समझौते के तहत ओरेवा समूह द्वारा पुल का रखरखाव और संचालन किया जा रहा था।
शहरी विकास विभाग ने नगरपालिका को जारी किया था नोटिस
जनवरी में राज्य के शहरी विकास विभाग ने नगरपालिका को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर पूछा था कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहने के लिए इसे भंग क्यों नहीं किया जाना चाहिए। सरकार के अनुसार, ओरेवा समूह ने 2018 और 2020 के बीच नगरपालिका को कई पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि पुल की स्थिति जर्जर हो गई है और अगर पुल जनता के लिए खुला रहा तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
ओरेवा समूह ने पुल के संचालन में कीं कई खामियां
'कारण बताओ नोटिस' में दावा किया गया है कि नगर निकाय ने कंपनी की इन चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया। इसमें कहा गया है कि नगरपालिका ने अनुबंध पूरा होने के बाद 2017 में कंपनी से पुल को अपने कब्जे में लेने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। नोटिस में विशेष जांच दल (एसआईटी) के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा गया है कि ओरेवा समूह ने पुल की मरम्मत, रखरखाव और संचालन में कई खामियां की हैं।
41 पार्षदों ने कहा- ओरेवा समूह के साथ समझौते के बारे में पता नहीं
नगर पालिका ने नोटिस के जवाब में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसने कभी भी पुल को ओरेवा समूह को सौंपने की मंजूरी नहीं दी थी। इसके 52 पार्षदों में से 41 ने एक अलग जवाब प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया कि उनमें से अधिकांश को उस समझौते के बारे में पता नहीं था जिसके तहत पुल को ओरेवा समूह को सौंप दिया गया था। मोरबी नगरपालिका के सभी 52 निर्वाचित पार्षद सत्तारूढ़ भाजपा से थे।
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