वाइब्रेंट गुजरात: राज्य के हर कोने का विकास करेगी गुजरात सरकार, हर जिलों में होंगे इन्वेस्टर समिट
सरकार ने 9-10 अक्टूबर को राज्य के उत्तरी हिस्से के मेहसाणा जिले में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कांफ्रेरेंसेज (VGRC) का आयोजन किया है। तीन महीने बाद जनवरी में इसे राजकोट में आयोजित किया जायेगा जिसमें राज्य के सौराष्ट्र और कच्छ के क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा।
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गुजरात सरकार ने राज्य के हर कोने का विकास करने के लिए विशेष योजना बनाई है। इसके अंतर्गत पहले राउंड में अब तक राजधानी गांधी नगर या अहमदाबाद में होने वाली इन्वेस्टर समिट वाइब्रेंट गुजरात को राज्य के चार अलग-अलग हिस्सों उत्तरी गुजरात, दक्षिणी गुजरात, राजकोट और वरोडा में ले जाया जाएगा। दूसरे राउंड में सरकार इसे इन जोन के जिलों के स्तर पर ले जाएगी। 'एक जिला, एक उत्पाद' की तर्ज पर हर जिले में इन्वेस्टर समिट कराकर गुजरात के जिलों को उनकी क्षमता के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों के क्लस्टर के रूप में विकसित किया जायेगा। इनमें उत्पादित वस्तुओं की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की रखी जाएगी जिससे वे किसी भी बाजार में टिक सकें।
राज्य सरकार ने अपने अनुभव में पाया है कि राजधानी में होने वाली इन्वेस्टर समिट में निवेशक उन्हीं क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता देते हैं जहां पहले से ही संबंधित उद्योग स्थापित हैं और उनका व्यापार हो रहा है। इससे इन इन्वेस्टमेंट समिट का लाभ राज्य के दूसरे हिस्सों को नहीं मिल पाता था और ऐसे क्षेत्र विकास की दौड़ में पिछड़ जाते हैं। जबकि इनकी तुलना में पहले से विकसित क्षेत्र और अधिक विकसित हो रहे हैं। ऐसे में सरकार की योजना है कि पहले चरण में राज्य को चार जोन में बांटकर इन्वेस्टमेंट समिट हो। बाद में इसे जिलों के स्तर पर ले जाया जाए। इससे राज्य के सभी क्षेत्रों का विकास होगा।
सरकार ने 9-10 अक्टूबर को राज्य के उत्तरी हिस्से के मेहसाणा जिले में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कांफ्रेरेंसेज (VGRC) का आयोजन किया है। तीन महीने बाद जनवरी में इसे राजकोट में आयोजित किया जायेगा जिसमें राज्य के सौराष्ट्र और कच्छ के क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। मार्च के लगभग राज्य के दक्षिणी हिस्से सूरत में और वडोदरा में इम्वेस्टर समिट का आयोजन होगा। जनवरी 2027 में राज्य स्तरीय इन्वेस्टर समिट राजधानी गांधी नगर या अहमदाबाद में आयोजित किया जा सकता है।
'स्किल्ड लेबर देगी सरकार'
गुजरात के औद्योगिक मामलों के मंत्री बलवंत सिंह राजपूत ने अमर उजाला से कहा कि गुजरात के अलग-अलग जिलों में स्थानीय विशेषताओं के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में विकास करने की संभावना है। सरकार इन क्षमताओं का उपयोग इन क्षेत्रों के विकास में करेगी। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई निवेशक किसी क्षेत्र में कोई उद्योग लगाने के लिए रजिस्टर करता है, उससे उसी समय यह जानकारी ले ली जाती है कि उसे किस ट्रेड में कितने स्किल्ड कामगारों की आवश्यकता होगी। इसके बाद जब तक कंपनी का मूलभूत ढांचा तैयार होता है, उतने समय में युवाओं को राज्य की 528 के करीब आईटीआई सेंटरों पर प्रशिक्षित कर दिया जाता है। इससे कंपनी को पहले दिन से योग्य कर्मचारियों की उपलब्धता हो जाती है, वहीं युवाओं को भी नौकरी का अवसर मिल जाता है।
'70 प्रतिशत निवेश जमीन पर उतरे'
राज्य के औद्योगिक विभाग की प्रमुख सचिव ममता वर्मा ने अमर उजाला को बताया कि राज्य सरकार एक दशक से इन्वेस्टमेंट समिट आयोजित कर रही है। हर समिट में दर्जनों बड़ी कंपनियां निवेश में रुचि दिखाती हैं। लेकिन कम से कम 70 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतरते हैं। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र की एंकर कम्पनी के आने से उस क्षेत्र की दर्जनों सहयोगी उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी निवेश करने लगती हैं जिससे बेहतर परिणाम मिलता है।
'3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना लक्ष्य'
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को 'वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कांफ्रेरेंस' की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य गुजरात के सभी जिलों का विकास करना है। गुजरात की अर्थव्यवस्था का आकार 2023 में 280 बिलियन डॉलर है जिसे 2047 तक 3.5 ट्रिलियन डॉलर करना है। इसके लिए एक समग्र नीति से राज्य को विकास पथ पर आगे लेकर चलना है। आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल बुद्धिमत्ता से युवाओं को लैस किया जायेगा।