फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Gujarat Floods did not come without any reason stray winds caused havoc in the west instead of the northwest

Gujarat Floods: यूं ही नहीं आई गुजरात में 'जल प्रलय', उत्तर पश्चिम की बजाय भटकी हवाओं ने पश्चिम में मचाई तबाही

Thu, 29 Aug 2024 02:52 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 29 Aug 2024 02:52 PM IST
विज्ञापन
सार
फिलहाल मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने सितंबर के पहले सप्ताह तक देश के अलग-अलग हिस्सों में खासतौर से उत्तर पश्चिम और मध्य समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में तेज बारिश का अनुमान जताया है। वहीं, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के सबसे ज्यादा बादल अगस्त के आखिरी महीने में ही बरसाने का अनुमान लगाया गया था।
loader
Gujarat Floods did not come without any reason stray winds caused havoc in the west instead of the northwest
Gujarat Floods - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गुजरात में जिस तरह से लगातार जल प्रलय मची हुई है वह मौसम वैज्ञानिकों के लिए बेहद चौंकाने वाली घटना है। दरअसल जिस लो प्रेशर एरिया की हवाएं उत्तर पश्चिम की ओर बहनी थी वह अपनी दिशाएं भटक कर दूसरी दिशाओं में पहुंच गई। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो बीते कुछ वर्षों में मौसम के बदले पूरे ट्रेंड से इस बात का एहसास होता है कि अभी ऐसी ही परिस्थितियां आगे भी बनी रह सकती हैं। इन बदली हुई परिस्थितियों में रेगिस्तानी इलाकों में बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं, जबकि जबकि गंगा के मैदानी इलाकों में बारिश सामान्य की तुलना में कुछ विशेष स्पेल में कम भी हो सकती है।



फिलहाल मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने सितंबर के पहले सप्ताह तक देश के अलग-अलग हिस्सों में खासतौर से उत्तर पश्चिम और मध्य समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में तेज बारिश का अनुमान जताया है। वहीं, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के सबसे ज्यादा बादल अगस्त के आखिरी महीने में ही बरसाने का अनुमान लगाया गया था।


गुजरात में बारिश के तबाही मचाने की असली वजह बदलता हुआ मौसम और जलवायु परिवर्तन ही है। दिल्ली विश्वविद्यालय में एनवायरमेंटल स्टडीज एंड क्लाइमेट चेंज के प्रोफेसर अनुराग सिंह कहते हैं कि जिस तरीके से गुजरात में बारिश हुई है वह स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि बने हुए लो प्रेशर एरिया की दिशाएं भटक गई हैं।

वह बताते हैं कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले लो प्रेशर एरिया और उसके बाद चलने वाली हवाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित एरिया उत्तर और पश्चिम का हिस्सा ही था। लेकिन बीच में भटकी हुई हवाएं आसपास के इलाकों में बारिश करती हैं। जिस तरीके से सिर्फ गुजरात में ही बादलों ने तबाही मचाई उससे स्पष्ट होता है कि चलने वाली हवाओं ने अपना रास्ता बदल दिया। वह उत्तर पश्चिम की वजह है सीधे पश्चिम इलाके की ओर बहने लगी। नतीजतन लो प्रेशर एरिया के बनने से बदली हुई हवाओ ने गुजरात के ऊपर जल प्रलय मचा दी।

मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर अनुराग कहते हैं कि बीते कुछ वक्त से इस बात को पहले से ही ऑब्जर्व किया जा रहा था कि अपने देश में बारिश का ट्रेंड बदल रहा है। वह कहते हैं कि करीब डेढ़ से दो दशक पहले तक पूरे मानसून की बारिश 4 महीने के दौरान होती थी। यानी कि मानसून का जो वक्त होता था उसे पूरे वक्त में रिमझिम बरसाते हुआ करती थी। लेकिन धीरे-धीरे यह ट्रेंड बदलता रहा।

अनुराग सिंह कहते हैं कि बारिश के बदले हुए इस ट्रेंड का बड़ा असर केरल के एलेप्पी में आई कुछ साल पहले की महज कुछ घंटे की बारिश में दिखा था। वह कहते हैं कि जितनी बारिश पूरे मानसून में होनी थी वह महज कुछ घंटे के भीतर ही केरल के एलेप्पी में हो गई थी। इसी तरह हाल में देश की राजधानी दिल्ली में भी बारिश का एक बड़ा हिस्सा दक्षिण दिल्ली के हिस्से में बरस गया, जबकि दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट के हिस्से में बारिश नहीं हुई।

वह बताते हैं कि बीते कुछ दिनों में दक्षिण भारत के बेंगलुरु जैसे शहर में रिमझिम बारिशों का दौर खत्म हो गया है। जबकि दक्षिण में यह वह इलाके हुआ करते थे जहां पर शुरू हुई बारिश होती थी। इसकी प्रमुख वजह जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ मौसम में प्रदूषण के चलते नमी की असमानता भी है।

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ आलोक सिन्हा कहते हैं कि गुजरात में जिस तरीके से भटकी हुई हवाओ ने कम दबाव के क्षेत्र के चलते हालात बिगाड़ दिए वह आगे भी देखे जा सकते हैं। उनका मानना है कि बदली हुई हवाएं कम दबाव के क्षेत्र को सिर्फ एक बार ही नहीं डिस्टर्ब करेंगे। बल्कि आने वाले दिनों में ऐसा आगे भी होता रहेगा।

उनका मानना है कि जिस तरीके से बदली हुई दवाओं की दशाओं ने गुजरात में जल प्रलय मचा दी है। वही हवाएं आगे जाकर राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में तेज बारिश कर सकती है। हालांकि, यह बारिश इसी मानसून में होगी या आने वाले मानसून में रेगिस्तान में झमाझम बारिश के बदले हुए ट्रेंड के साथ इसका असर दिख सकता है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के रिसर्चर अक्षत गोयल कहते हैं कि यह पहले से तय था कि एल नीनो की समाप्ति और ला नीनो की शुरुआत के दौरान इस तरीके के हालात बनेंगे। वह कहते हैं क्योंकि एल नीनो मई में समाप्त हो रहा था और ला नीनो का असर उसके 60 दिनों बाद ही देखने को मिलता है। जो की अगस्त में हो रही तेज बारिश के चलते दिख रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed