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Gujarat: गुजरात पहुंचे पीएम मोदी, कल महाकाली मंदिर पर झंडा फहराकर बनाएंगे इतिहास

Fri, 17 Jun 2022 09:03 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 17 Jun 2022 09:03 PM IST
सार

मंदिर के ट्रस्टी अशोक पंड्या ने बताया कि प्रधानमंत्री नवनिर्मित शिखर पर पारंपरिक लाल झंडा फहराएंगे। यूनेस्कों के विश्व धरोहर स्थलों में भी शामिल यह मंदिर, चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व पार्क के भीतर स्थित है। 

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Gujarat Flag to be hoisted on Mahakali temple after 500 years after dargah shifted amicably
पांच सौ साल बाद महाकाली मंदिर में झंडा फहराएंगे पीएम मोदी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को गुजरात के पंचमहल जिले में प्रसिद्ध महाकाली मंदिर पर एक पारंपरिक झंडा फहराएंगे। इसके साथ प्रधानमंत्री मोदी के नाम सदियों बाद यह ध्वज फहराने के इतिहास से भी जुड़ जाएगा। इसके लिए शुक्रवार की शाम प्रधानमंत्री अहमदाबाद पहुंच गए हैं। राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अन्य ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। 
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500 साल पहले सुल्तान बेगड़ा ने नष्ट कर दिया था मंदिर
पावागढ़ पहाड़ी पर स्थित इस 11वीं शताब्दी के मंदिर के शिखर को लगभग 500 साल पहले सुल्तान महमूद बेगड़ा ने नष्ट कर दिया था। मंदिर के पुनर्विकास (रिडेवलपमेंट) के हिस्से के रूप में इसे अब बहाल कर दिया गया है। 
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प्रधानमंत्री शनिवार पुनर्विकसित महाकाली मंदिर का उद्घाटन करेंगे। मंदिर के ट्रस्टी अशोक पंड्या ने बताया कि वह नवनिर्मित शिखर पर पारंपरिक लाल झंडा फहराएंगे। 

मंदिर, चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व पार्क के भीतर स्थित है। यह यूनेस्कों के विश्व धरोहर स्थलों में भी शामिल है और प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। ऐसा माना जाता है कि ऋषि विश्वामित्र ने पावागढ़ में देवी कालिका की मूर्ति को स्थापित किया था। 

15वीं सदी में सुल्तान महमूद बेगड़ा ने चंपानेर पर किया आक्रमण
पंड्या ने बताया कि मंदिर के मूल शिखर को सुल्तान महमूद बेगड़ा ने 15वीं शताब्दी में चंपानेर पर आक्रमण के दौरान नष्ट कर दिया था। इसके तुरंत बाद मंदिर के शीर्ष पर एक मुस्लिम संत सदानशाह पीर की दरगाह बनाई गई। 

पंड्या ने बताया कि झंडा फहराने के लिए शिखर पर एक पोल की जरूरत होती है। चूंकि कोई शिखर नहीं था, तो इन सभी वर्षों में झंडा नहीं लगाया गया था। जब कुछ साल पहले पुनर्विकास शुरू हुआ था तो हमने दरगाह के कार्यवाहकों से इसकी अनुमति देने का अनुरोध किया था। दरगाह को स्थानांति किया गया ताकि शिखर का पुनर्निर्माण किया जा सके। 

हिंदू थे सदानशाह, बेगड़ा को खुश करने के लिए अपनाया इस्लाम
लोककथाओं के मुताबिक, सदानशाह एक हिंदू सहदेव जोशी थे जिन्होंने बेगड़ा को खुश करने के लिए इस्लाम कबूल किया। यह भी माना जाता है कि सदनशाह ने मंदिर को पूर्ण विकास से बचाने में भूमिका निभाई थी। 


पंड्या ने बताया, हमारे बीच एक सौहार्दपूर्ण समझौता हुआ और दरगाह को मंदिर के नजदीक एक स्थान पर स्थानांतरिक कर दिया गया। 

पांड्या ने बताया कि पुनर्विकास में तलहटी से मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों को चौड़ा करना और आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण शामिल था। इस पर लगभग 125 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें मंदिर ट्रस्ट ने 15 करोड़ रुपये का योगदान दिया। उन्होंने बताया कि नया मंदिर परिसर तीन स्तरों पर बना है और तीस हजार वर्ग फुट में फैला है। 
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