गुजरात चुनाव: सौराष्ट्र, कच्छ, उत्तर गुजरात और दक्षिण गुजरात में BJP को कड़ी टक्कर दे रही कांग्रेस
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गुजरात में पिछले 22 वर्षों से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक फिर इतिहास रचने को अग्रसर है। अभी तक के चुनावी रुझानों में 182 सीट वाले गुजरात विधानसभा चुनावों में बीजेपी 90 सीट जीत चुकी है और 9 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस 73 सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है और 7 सीटों पर आगे चल रही है। अब हम एक नजर सौराष्ट्र, कच्छ, उत्तर गुजरात, मध्य गुजरात और दक्षिण गुजरात की सीटों के चुनावी नजीजों पर दोनों पार्टियों की वर्तमान स्थिति पर नजर डाले तो कांग्रेस यहां बीजेपी को लगातार कड़ी टक्कर दे रही है। आईए एक नजर डालते हैं क्षेत्रवार सीटों की स्थिति के रुझानों पर-
सौराष्ट्र-कच्छ (54) : कांग्रेस 29, बीजेपी 23, अन्य 2 पर आगे
उत्तर गुजरात (32) : कांग्रेस 12, बीजेपी 18, अन्य 2 पर आगे
मध्य गुजरात (63) : बीजेपी 40, कांग्रेस 21, अन्य -2 पर आगे
दक्षिण गुजरात (33) : बीजेपी 24, कांग्रेस 8 पर आगे
पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो 2012 के चुनाव में राज्य के कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस ने उसे बराबर की टक्कर दी थी। पांच क्षेत्रों में बंटे गुजरात में 2012 में हुए विधानसभा के चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो 115 सीटों पर 47.85 फीसदी वोट शेयर के साथ बीजेपी ने बढ़त हासिल की थी और सरकार बनाने में कामयाब रही थी।
लेकिन इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि कांग्रेस ने बीजेपी को बराबर की टक्कर दी थी और 38.39 फीसदी वोट शेयर के साथ 61 सीटों पर अपना कब्जा जमाया था। वहीं छह सीटों पर निर्दलीयों ने बाजी मारी थी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी की 2019 की राह आसान हो जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस चुनाव के लिए पूरा जोर लगा दिया। रिपोर्टों के मुताबिक पीएम ने इस चुनाव के लिए राज्य में 34 चुनावी सभाएं की।
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2007 की तुलना में बीजेपी ने 2012 में कुछ सीटों को खोया था
कुल 48 सीट हैं। जिसमें 30 पर बीजेपी और 15 पर कांग्रेस का कब्जा है। लेकिन अगर वोट प्रतिशत पर नजर डालें तो वो चौंकाते हैंः
बीजेपी का वोट शेयर 30 सीटों के साथ 44.9 फीसदी रहा था जबकि महज 15 सीटों के साथ कांग्रेस का वोट शेयर करीब 37 फीसदी रहा था। वहीं 3 सीटें अन्य को मिली थीं और इनका वोट शेयर भी 18.3 फीसदी था।
अगर 2007 के चुनावी नतीजों पर नजर डालें तो इस क्षेत्र में 2007 की तुलना में बीजेपी ने 2012 में कुछ सीटों को खोया था जबकि कांग्रेस में हल्की सी ग्रोथ देखी गई थी। 3 सीटों पर निर्दलीयों का कब्जा रहा था जबकि 2007 में एक भी निर्दलीय के सिर पर जीत का सेहरा नहीं बंध पाया था।
कच्छ
कुल सीट हैं 6, जिसमें 5 बीजेपी और 1 कांग्रेस के खाते में गई थी। यहां भी कांग्रेस और बीजेपी के वोट शेयर रोमांच पैदा करते हैं। 5 सीटों पर काबिज बीजेपी का वोट शेयर 45.4 फीसदी रहा था वहीं कांग्रेस का 40 फीसदी था जबकि 14.6 परसेंट निर्दलीयों के खाते में गया था। 2007 और 2012 के चुनावों में सीट को लेकर कोई बदलाव तो नहीं हुआ था लेकिन 2012 के चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा था।
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32 सीटों वाले इस क्षेत्र में कांग्रेस को महज 6 सीटें ही मिल पाईं थी
ये गुजरात का वो क्षेत्र हैं जहां चुनाव पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में चला गया था। 2007 के चुनाव में जहां बीजेपी ने राजस्थान से सटे गुजरात के इस इलाके कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया था। 32 सीटों वाले इस क्षेत्र में कांग्रेस को महज 6 सीटें ही मिल पाईं थी जबकि 2012 के चुनाव का नजारा कुछ अलग था। कांग्रेस ने इस चुनाव में मौजूदा रूलिंग पार्टी से अधिक सीटों पर कब्जा जमाया था। 2012 के चुनाव में 43.7 फीसदी वोट शेयर के साथ बीजेपी को 15 सीटें मिली थीं जबकि 44.4 फीसदी के साथ कांग्रेस ने 17 सीटों पर कब्जा जमाया था।
सेंट्रल गुजरात
66 सीटों के साथ सेट्ल गुजरात सबसे बड़ा क्षेत्र है। 2012 के चुनाव में 41 सीटों पर कब्जा कर बीजेपी ने अपनी बढ़त बनाए रखी थी। यहां पर मिले 50.2 वोट परसेंटेज ने भी बीजेपी की लाज रख ली थी। कांग्रेस 38.2 फीसदी वोट शेयर के साथ 22 सीटों पर सिमट गई थी। जबकि 11.6 फीसदी वोट शेयर के साथ 3 सीटें निर्दलीय के खाते में चली गई थीं।
दक्षिण गुजरात
सबसे अमीर माने जाने वाले दक्षिणी गुजरात में 2007 और 12 की तुलना की जाए तो कांग्रेस ने वोट शेयर में बढ़त हांसिल की है। 30 सीटों वाला दक्षिणी गुजरात में बीजेपी ने 52.2 फीसदी वोट शेयर के साथ 24 सीटों पर कब्जा कर रखा है वहीं 37.6 फीसदी वोट शेयर के साथ कांग्रेस को महज 6 सीटें ही हांसिल हो सकी थी। इस क्षेत्र में भले ही निर्दलीयों ने खाता न खोला हो लेकिन करीब 10 फीसदी वोट उनके खाते में भी गए थे।