फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Gujarat ›   Gujarat Election: Political experts believe that if AAP strengthens, will directly benefit BJP

Gujarat Election: केजरीवाल की वजह से इतिहास रच सकते हैं मोदी! ‘झाड़ू' चलने पर भाजपा को कैसे होगा फायदा?

Thu, 03 Nov 2022 12:35 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 03 Nov 2022 12:35 PM IST
सार

Gujarat Election: राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि गुजरात विधानसभा चुनाव में भी उत्तराखंड और गोवा जैसी परिस्थितियां बनती दिखाई पड़ रही हैं। यदि यहां आप मजबूत हुई और उसने कांग्रेस के पांच से सात फीसदी वोट काटने में भी सफलता हासिल कर ली, तो इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा...

विज्ञापन
Gujarat Election: Political experts believe that if AAP strengthens, will directly benefit BJP
Gujarat Election 2022: पीएम मोदी और सीएम केजरीवाल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

गुजरात के 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक ऐसा इतिहास रचा था, जिसे आज तक कोई तोड़ नहीं पाया। माधव सिंह सोलंकी के नेतृत्व में चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस ने कुल 182 सीटों वाली विधानसभा में 149 सीटों पर सफलता हासिल की थी। कोई दूसरा दल अब तक इस आंकड़े के आसपास भी नहीं पहुंच पाया। कांग्रेस ही इसके पहले यानी 1980 के चुनाव में 141 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई थी। लेकिन सब कुछ ठीकठाक रहा तो प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में भाजपा इस बार यह रिकॉर्ड तोड़ सकती है। उसकी इस जीत में सबसे बड़ी भूमिका अरविंद केजरीवाल ही निभा सकते हैं, जिन्हें गुजरात में इस समय भाजपा का सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी बताया जा रहा है।

विज्ञापन


विज्ञापन



दरअसल, इसी साल की फरवरी में संपन्न हुए उत्तराखंड और गोवा विधानसभा चुनाव परिणाम के आंकड़े बताते हैं कि इन राज्यों में भाजपा को लगभग उतने ही प्रतिशत वोटों के अंतर से जीत मिली, जितनी कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने हासिल की थी। चुनावी अंकगणित कहता है कि यदि आम आदमी पार्टी इन चुनावी मैदान में न होती, तो ये वोट कांग्रेस को जाते और वह इन राज्यों में सरकार बना सकती थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

गुजरात में क्या है स्थिति

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि गुजरात विधानसभा चुनाव में भी उत्तराखंड और गोवा जैसी परिस्थितियां बनती दिखाई पड़ रही हैं। यदि यहां आम आदमी पार्टी मजबूत हुई और उसने कांग्रेस के पांच से सात फीसदी वोट काटने में भी सफलता हासिल कर ली, तो वोटों के इस विभाजन का सीधा लाभ भाजपा को होगा और वह बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब हो सकती है। दरअसल, पीएम मोदी की लोकप्रियता के कारण भाजपा यहां पहले ही मजबूत स्थिति में है। उसका सरकार बनाना भी लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन इस बार उसकी जीत का अंतर कितना रह सकता है, इस पर बहस हो रही है।


राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडे ने अमर उजाला से कहा कि अब तक जो परिस्थिति बनती दिख रही है, आम आदमी पार्टी कांग्रेस के ही वोट काटती दिख रही है। जबकि भाजपा ने अपने कोर वोटरों पर अभी भी पकड़ बरकरार रखी है। पीएम के कारण ‘गुजराती अस्मिता’ के नाम पर एक दूसरा बड़ा वोटर वर्ग भी भाजपा के साथ लामबंद है। केजरीवाल काफी कोशिश करने के बाद भी इस वोटर वर्ग को तोड़ने में सफल होते दिखाई नहीं पड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की कमजोर तैयारियों की चर्चा के बीच गैर-भाजपाई दलों को वोट देने वाले मतदाताओं में एक भ्रम की स्थिति दिखाई पड़ रही है। यही कारण है कि केजरीवाल कांग्रेस के मतदाताओं को तेजी से अपनी ओर खींचने में कामयाब हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी गुजरात में जितनी अधिक मजबूत होगी, गैर-भाजपाई मतदाताओं में उतना ही ज्यादा विभाजन होगा और इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा। इससे मोदी का गुजरात में नया इतिहास रचने का स्वप्न साकार हो सकता है।

इन सीटों पर फोकस

भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में लगभग दो दर्जन से ज्यादा सीटें 10 हजार से भी कम मतों के अंतर से जीती थीं। जिन 83 सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था, उनमें 30 से अधिक सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की हार का अंतर दो हजार से 10 हजार वोटों का ही रहा था। इनमें सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात की सीटें सबसे ज्यादा हैं। यदि इन सीटों पर गैर-भाजपाई वोटरों में विभाजन होता है, तो इसका लाभ भाजपा को होगा और उसकी जीत की राह आसान हो जायेगी। इससे उसकी सीटों की संख्या में बढ़ोतरी तय है।

गोवा में क्या हुआ

इसी साल की फरवरी में हुए गोवा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की। भाजपा को इस चुनाव में 33.3 फीसदी वोट हासिल हुए। कांग्रेस को 23.5 फीसदी मत प्राप्त हुए। कांग्रेस को भाजपा से 9.8 फीसदी वोट कम हासिल हुए। जबकि इसी चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को 6.8 फीसदी और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (AITC) को 5.2 फीसदी वोट प्राप्त हुए।

माना जा सकता है कि यदि इस चुनाव में आम आदमी पार्टी या तृणमूल कांग्रेस न होती, तो गैर-भाजपाई दल के रूप में इन मतदाताओं की प्राथमिकता कांग्रेस की होती और वह बहुत आसानी से गोवा में जीत हासिल कर सकती थी।  

उत्तराखंड में क्या हुआ

इसी साल की शुरुआत में यूपी और उत्तराखंड के साथ पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुआ था। भाजपा को इस चुनाव में 44.3 फीसदी मत मिले, जबकि कांग्रेस 37.9 फीसदी मतों के साथ दूसरे नंबर पर रही। कांग्रेस को भाजपा से 6.4 फीसदी कम वोट मिले। लेकिन इसी चुनाव में पहली बार भाग्य आजमा रहे केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को 3.3 फीसदी और बहुजन समाज पार्टी को 4.82 फीसदी वोट मिले।

माना जा सकता है कि यदि अरविंद केजरीवाल इस चुनाव में हाथ न आजमाते, तो गैर-भाजपाई दल को वोट देने की इच्छा रखने वाले मतदाताओं की प्राथमिकता कांग्रेस की होती। ऐसे स्थिति में राज्य का चुनाव परिणाम कुछ और भी हो सकता था। यदि केजरीवाल अपेक्षा के अनुरूप मजबूत हुए, तो इसी तरह का परिणाम गुजरात चुनाव में भी आ सकता है जिसका लाभ भाजपा को मिल सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed