गुजरात की पांच साल पुरानी कहानी: मिठाई खिलाते रह गए थे नितिन पटेल, लेकिन भाजपा आलाकमान ने रूपाणी को चुना था

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 11 Sep 2021 04:06 PM IST

सार

Vijay Rupani Resigns: अगस्त 2016 में आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। रूपाणी गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री जरूर बने, लेकिन आखिरी वक्त तक सीएम पद की दौड़ में नितिन पटेल भी शामिल थे।
2016 की इस फोटो में तब गुजरात के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए विजय रूपाणी और नितिन पटेल ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई थी।
2016 की इस फोटो में तब गुजरात के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए विजय रूपाणी और नितिन पटेल ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई थी। - फोटो : PTI
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विस्तार

गुजरात की सत्ता में नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। बड़े सियासी घटनाक्रम के तहत विजय रूपाणी ने शनिवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। साफ है कि दिसंबर 2022 में विधानसभा चुनाव होने से पहले पार्टी नेतृत्व में बदलाव चाहती है। यह घटनाक्रम पांच साल पुरानी कहानी की याद दिलाता है। उस वक्त भी भाजपा ने राज्य में नेतृत्व बदला था। जानिए पूरी कहानी... 
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2015 में हुए पाटीदार आंदोलन की वजह से भाजपा की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठ चुके थे। इसके साथ ही 2016 में आनंदीबेन पटेल की उम्र भी 75 साल हो चुकी थी। 75 प्लस नेताओं को रिटायरमेंट देने के भाजपा के फॉर्मूले पर अमल हो रहा था। नए मुख्यमंत्री के लिए भागदौड़ शुरू हो चुकी थी। मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह तब भाजपा के अध्यक्ष थे। पार्टी ने पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को गुजरात भेजा था। भाजपा ने तब विजय रूपाणी को अगले मुख्यमंत्री के रूप में चुना, लेकिन आखिर तक दौड़ में नितिन पटेल भी थे।

मिठाइयां बंट गईं, नितिन पटेल इंटरव्यू देने लगे थे

तब यह तय माना जा रहा था कि कमान नितिन पटेल को ही मिलने वाली है। बताया जाता है कि उन्होंने अपने आवास पर मिठाइयां बंटवा दी थीं। वह इंटरव्यू देने लगे थे, लेकिन शाम होते-होते हालात बदल गए। दरअसल, आनंदीबेन नितिन पटेल के समर्थन में थीं, जबकि रूपाणी भाजपा आलाकमान की पसंद थे। कहा जाता है कि इस मुद्दे पर आनंदीबेन और भाजपा आलाकमान के बीच तीखी बहस भी हुई थी। आनंदीबेन के धड़े का कहना था कि रूपाणी के पास प्रशासनिक अनुभव नहीं है, इसलिए मौका नितिन पटेल को मिलना चाहिए। 

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भाजपा ने पहली बार राज्य में डिप्टी सीएम बनाया

आखिरकार, मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में पटेल पिछड़ गए। विधायक दल की बैठक में रूपाणी के नाम पर मुहर लग गई। इसी के साथ सीएम-डिप्टी सीएम का फॉर्मूला निकाला गया। नितिन पटेल को डिप्टी सीएम बनाया गया। 1998 से प्रदेश में लगातार सरकार चला रही भाजपा ने पहली बार किसी नेता को डिप्टी सीएम बनाया था।

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