गुजरात चुनाव में टोटके का सिलसिला रहा बरकरार, वलसाड़ सीट पर भाजपा की जीत
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गुजरात चुनाव में टोटके के रूप में मानी-जाने वाली वलसाड़ सीट का सिलसिला इस दफे भी बरकरार रहा है। इस सीट पर भाजपा की जीत हुई है। भाजपा उम्मीदवार भरत भाई पटेल ने कांग्रेस के नरेंद्र कुमार को करीब 42092 मतों से पराजित किया है।
गौरतलब है कि हर राज्य में एक-दो सीटों को ऐसा माना जाता है जहां की हार-जीत को टोटके के रूप में देखा जाता है।
ठीक उसी तरह गुजरात के विधानसभा में वलसाड़ की सीट को टोटके के रूप में माना जाता है। इस सीट के बारे में यह बात आम जन में प्रचलित है कि 'जिसने जीता वलसाड़ उसकी बनेगी गुजरात में सरकार।' शायद यही वजह है कि भाजपा ने यहां से पुराने विधायक को ही मैदान में उतारा था। ऊपर से पीएम मोदी ने भी इस सीट पर चुनावी सभा को संबोधित कर भाजपा की जीत का सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।
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वलसाड़ को जिसने जीता उसकी बनी सरकार
वर्ष 1975 के चुनावों से वलसाड़ विधानसभा की सीट पर नजर दौड़ाएं तो जिस दल के उम्मीदवार की इस सीट से जीत हुई है। सूबे में उस दल की ही सरकार बनी है। वर्ष 1975 में जनसंघ-एनसीओ गठबंधन उम्मीदवार के रूप में यहां से केशवभाई राणा जी पटेल चुनाव जीते थे। उस वर्ष राज्य में जनसंघ-एनसीओ की साझा सरकार बनी थी। वर्ष 1980 में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में दोलत राय देसाई ने वलसाड़ से चुनाव जीता था। तब राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी।
वलसाड़ में देसाई की जीत के साथ ही सूबे में भाजपा-जनता दल गठबंधन की सरकार बनी
1985 में कांग्रेस ने देसाई का टिकट काटकर बारजोरजी पारदीवाला को उम्मीदवार बनाया था। तब देसाई यहां से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े। उक्त चुनाव में जीत कांग्रेस के पारदीवाला की हुई थी। राज्य में उस वर्ष भी कांग्रेस की सरकार बनी। 1990 में देसाई को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया। वलसाड़ में देसाई की जीत के साथ ही सूबे में भाजपा-जनता दल गठबंधन की सरकार बनी थी। उसके बाद वे 1995 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े। केशूभाई पटेल के नेतृत्व में भाजपा की अपने बूते पर राज्य में सरकार बनी।
वलसाड़ की कड़ी को समझते हुए भाजपा ने देसाई को 1998, 2002 और 2007 में भी उम्मीदवार बनाया। वे चुनाव जीतते रहे और राज्य में पार्टी की सरकार बनती रही। 2012 में भाजपा ने यहां से अपना प्रत्याशी बदलते हुए भरत भाई पटेल को उम्मीदवार बनाया। पटेल ने भाजपा नेतृत्व के उम्मीदों पर खरा उतरते हुए वलसाड़ में पार्टी की जीत सुनिश्चित की। पार्टी की पांचवी बार सूबे में सरकार बनी।
इस बार भी भाजपा ने भरत भाई पटेल पर ही दांव लगाया था। इस दफे भी वे चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। उनकी जीत के साथ ही सूबे में भाजपा की सरकार बनना तय हो गया है। राजनीतिक पंडितों की नजरें उस वक्त वलसाड़ की ओर खास गड़ गई थी जब मतगणना के वक्त कांग्रेस-भाजपा के बीच मुकाबला कांटे की लड़ाई का बन गया था। तब भाजपा के लिए सुकून की बात थी कि वलसाड़ सीट पर पार्टी उम्मीदवार आगे चल रहे थे। देर शाम तस्वीर स्पष्ट हुई तो भाजपा अपने बूते पर गुजरात की सत्ता बचाने में कामयाब रही है।