Gujarat: चुनाव पूर्व गठबंधन के दावे पर बोली कांग्रेस- AAP ने 'गलत समय पर' किया एलान, ऐसे बयान देने से बचें
Gujarat: आप के एलान पर गुजरात कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा, कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व और 'इंडिया' गठबंधन अन्य दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के बारे में अंतिम निर्णय लेगा। इस तरह के फैसले राज्य स्तर पर नहीं लिए जाते हैं।
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कांग्रेस ने गुजरात के आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख इसुदान गढ़वी की ओर से आगामी लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे के फॉर्मले के तहत लड़ने के एलान पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने कहा कि गढ़ी ने गलत समय पर यह घोषणा की है। कांग्रेस ने आप नेताओं से इस तरह के बयान देने से बचने को कहा और कहा कि गठबंधन पर फैसला देश की सबसे पुरानी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
आप नेता द्वारा गलत समय पर दिया गया बयान: मनीष दोशी
गढ़वी ने सोमवार को यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था आप और कांग्रेस गुजरात में सीट बंटवारे के फॉर्मूले के तहत आम चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगी, क्योंकि दोनों पार्टियां विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की सदस्य हैं। वहीं, गुजरात कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा, कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व और 'इंडिया' गठबंधन अन्य दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन के बारे में अंतिम निर्णय लेगा। इस तरह के फैसले राज्य स्तर पर नहीं लिए जाते हैं। इस तरह का बयान (आप का गठबंधन के बारे में) गलत समय पर दिया गया है। सभी को इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए।
इसुदान गढ़वी ने क्या कहा था?
आप नेता गढ़वी ने कहा था कि आप और कांग्रेस दोनों इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं और यह चुनावी गठबंधन गुजरात में भी लागू किया जाएगा। हालांकि उन्होंने कहा था कि गठबंधन पर बातचीत अभी प्राथमिक स्तर पर है, लेकिन यह तय है कि आप और कांग्रेस दोनों गुजरात में आगामी लोकसभा चुनाव सीट बंटवारे के फॉर्मूले के तहत लड़ेंगे।
विधानसभा में घटकर 17 रह गईं कांग्रेस की सीटें
गौरतलब है कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा ने गढ़वी के दावे को तवज्जो नहीं दी। गुजरात में 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 182 सदस्यीय सदन में रिकॉर्ड 156 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी, जबकि कांग्रेस की संख्या 2017 में जीती गई 77 सीटों से घटकर 17 हो गई। आप ने पांच सीटें जीतकर गुजरात की राजनीति में प्रवेश किया था। माना जाता है कि कांग्रेस और आप के बीच विपक्षी वोटों के विभाजन ने अन्य कारकों के बीच सत्तारूढ़ भाजपा की मदद की है।