सूरत में घर जाने की मांग कर रहे प्रवासी मजदूरों का हंगामा, पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े
लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूर लगातार अपने घर लौटने की मांग कर रहे हैं। इस बीच गुजरात के सूरत में प्रवासी मजदूरों और पुलिस के बीच झड़प हो गई है। सूरत में सोमवार को पुलिस के ऊपर प्रवासी मजदूरों ने पत्थर बरसाए। जिसके बाद पुलिस ने उन लोगों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में लेना का प्रयास किया और आंसू गैस के गोले दागे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सूरत के कडोदरा इलाके में रहने वाले मजदूर कई दिनों से घर जाने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन बार-बार उन्हें भरोसा दे रहा था, लेकिन आज मजदूरों ने आपा खो दिया और घरों से बाहर निकलकर हंगामा करने लगे। मजदूरों ने आस-पास खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की।
कोरोना वायरस के चलते तीसरी बार लॉकडाउन बढ़ने के बाद इन प्रवासियों की मांग थी कि उन्हें अब अपने पैतृक स्थान पर भेजा जाए। मामला इतना बढ़ गया कि स्थिति संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े हैं। घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। विवाद की वजह का भी अभी पता नहीं चल पाया है।
गुजरात से एक दिन में 18 ट्रेनें रवाना
लॉकडाउन के चलते रोजी-रोटी छिनने से बेसहारा हुए हजारों श्रमिकों का अपने-अपने राज्यों को लौटना जारी है। सोमवार को गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, बड़ोदरा, नादियाड़, पालनपुर सहित विभिन्न स्टेशनों से 18 ट्रेंने श्रमिकों को लेकर रवाना हुईं। इनमें प्रत्येक में करीब 1200 श्रमिक थे। इनमें सात ट्रेनें ओडिशा, छह यूपी, चार बिहार और एक झारखंड के लिए निकली है। ओडिशा में 8,830 श्रमिकों की वापसी हो चुकी है।
पास के बहाने बीच से लौटाया
सूरत के पंडेसारा क्षेत्र में 50 प्रवासी मजदूरों का बीच रास्ते से लौटा दिया गया जब वो बस में सवार होकर उत्तर प्रदेश और झारखंड के लिए निकले थे। मजदूरों का आरोप है कि दो दिन पहले बसों को गुजरात से निकलने की अनुमति दी गई थी।
जब बस सूरत के कोसांबा पहुंची तो स्थानीय प्रशासन ने बैरंग लौटा दिया और कहा कि जो पास मिला है वो पर्याप्त नहीं है। मजदूरों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन संकट की इस घड़ी में भी मनमानी कर रहा है।
रेड जोन के बाहर स्थित बाजार और दुकानें खुलीं
गुजरात के छह बड़े शहरों और उतने ही नगरपालिका क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सभी हिस्सों में दुकान, बाजार और अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान सोमवार को खोले गए। कोरोना वायरस संक्रमण पर नियंत्रण करने के लिए तीसरे चरण का बंद सोमवार से लागू हो गया। राज्य सरकार ने रविवार को रेड, ऑरेंज तथा ग्रीन जोन में रियायतों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे।
करीब 40 दिनों तक घर में रहने के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोग बड़ी संख्या में बाजार में नजर आए। वहीं, लोग अपने कार्यालय भी जाते दिखे। जामनगर, जूनागढ़, मेहसाना, द्वारका, राजपीपला के स्थानीय बाजारों (अकेली दुकानें) में लोग खरीदारी के लिए निकले। इन जगहों पर निश्चित समय के लिये बाजार खोलने की अनुमति दी गई है।
रियायतों की घोषणा के बाद कई औद्योगिक इकाइयों में भी कार्य बहाल किया गया है। रविवार को राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, गांधीनगर, भावनगर और राजकोट में प्रतिबंधों में रियायत नहीं मिलेगी। गुजरात में संक्रमण के ज्यादातर मामले इन्हीं शहरों से सामने आए हैं। वहीं बोटाद, बोपाल, खंभात, बारेजा, उमरेठ और गोधरा नगरपालिका क्षेत्रों में भी रियायतें नहीं है।
ये छह बड़े शहर और छह नगपालिका क्षेत्र रेड जोन में आते हैं। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पान की दुकानें और शराब की दुकानें रियायत के दायरे में नहीं आती हैं।
वहीं, जूनागढ़ (ग्रीन जोन) में हार्डवेयर, गैराज, चप्पलों की दुकानें, कपड़े की दुकानें सोमवार को खोली गईं। जूनागढ़ के कलेक्टर सौरभ पार्धी ने कहा, जरूरी सामानों (जैसे-दूध) की बिक्री करने वाली दुकानें सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक खुलेंगी। इसके बाद दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक अन्य दुकानें खुलेंगी।
कलेक्टर ने बताया कि हालांकि स्कूल, मॉल, पान दुकानों को अभी खोले जाने की अनुमति नहीं है। ऑरेंज और ग्रीन जोन वाले क्षेत्रों में लॉन्ड्री, मिठाई, सैलून और आभूषण की दुकानों को भी दिन में खोलने की अनुमति दी गई है।