Sea Attack: जीटीआरआई ने सरकार को लिखा पत्र, कहा- समुद्री खतरे के कारण शिपिंग-बीमा लागत बढ़ने की उम्मीद
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अनुसार, मौजूदा स्थिति के कारण भारत दीर्घकालिक शिपिंग व्यवधानों के लिए तैयार रहना चाहिए। व्यापारी जहाजों पर ड्रोन और मिसाइलों के हमले से शिपिंग लागत और माल पहुंचाने में लगने वाले समय में बढ़ोत्तरी होती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विश्व में अब एक बार फिर समुद्री खतरा बढ़ रहा है। लाल सागर संकट बढ़ने से व्यापार पर असर पड़ रहा है। आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरआई ने इस पर चिंता जाहिर की है। जीटीआरआई ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा कि लाल सागर संकट बढ़ने से व्यापार पर असर पड़ रहा है। इससे निर्यातकों के लिए शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने की उम्मीद है। इस संकट से निपटने के लिए सरकार को निर्यातकों को वित्तीय सहायता देने पर विचार करना चाहिए। संकट के कारण शिपिंग लागत 60 प्रतिशत और बीमा प्रीमियम 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अनुसार, मौजूदा स्थिति के कारण भारत दीर्घकालिक शिपिंग व्यवधानों के लिए तैयार रहना चाहिए। व्यापारी जहाजों पर ड्रोन और मिसाइलों के हमले से शिपिंग लागत और माल पहुंचाने में लगने वाले समय में बढ़ोत्तरी होती है। इससे निर्यातकों के मार्जिन पर असर पड़ता है। पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों से कच्चे तेल के आयात में विविधता लाना आवश्यक है। भारत अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए कदम उठा सकता। हमलों के कारण, शिपर्स केप ऑफ गुड होप के माध्यम से खेप ले जा रहे हैं, जिस वजह से 20 दिनों की देरी हो रही है।
गुरुवार को लाल सागर में हूती विद्रोहियों के मालवाहक जहाजों हमले को लेकर विदेश मंत्रालय ने चिंता जाहिर की थी। समुद्री लुटेरों का फिर से सक्रिय होना पूरे विश्व के लिए एक चिंता का विषय बन गया हैं। गौरतलब है कि 2017 में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में कई देशों की नौसेना के विशेष अभियान ने इन लुटेरों का लगभग सफाया कर दिया था।