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जीएसटी : केरल के लिए आपदा उपकर लगाने पर मंत्री समूह लेगा फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 29 Sep 2018 03:45 AM IST
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अरुण जेटली
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जीएसटी परिषद ने शुक्रवार को एक 7 सदस्यीय मंत्री समूह (जीओएम) के गठन का निर्णय लिया, जो आपदा प्रभावित केरल जैसे राज्यों में राहत संसाधन जुटाने के लिए एक नया उपकर लगाने के प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद रिपोर्ट देगा। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाला ये जीओएम नए अप्रत्यक्ष कर सिस्टम में अधिकतर राज्यों में कर वसूली में आई गिरावट को भी देखेगा।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 30वीं बैठक में बिहार, ओडिशा व गुजरात जैसे कुछ राज्य केरल के प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं से सहमत नहीं थे। बैठक के बाद जेटली ने बताया कि बाढ़ से तबाह हुए केरल की तरफ से राज्य में जीएसटी पर 10 फीसदी आपदा प्रबंधन उपकर लगाने के प्रस्ताव पर परिषद ने चर्चा के लिए 7 सदस्यों का जीओएम बनाया है। इस 7 सदस्यीय समिति में पूर्वोत्तर, पहाड़ी और तटीय राज्यों के सदस्य होंगे। समिति के सदस्यों के नाम का ऐलान जल्द कर दिया जाएगा।
पांच बिंदु जांचेगा जीओएम
- उपकर का दायरा राज्य में ही होगा या इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा
- क्या इसे सिर्फ कुछ लक्जरी सामानों पर ही लगाया जाना चाहिए
- क्या एनडीआरएफ या एसडीआरएफ का सिस्टम इन आपदाओं से खुद निपटने में सक्षम है
- किन परिस्थितियों में आपदा प्रबंधन उपकर लगाए जाने का निर्णय लिया जा सकता है
- जीएसटी के दायरे में इस तरह के उपकर को लगाए जाने की वैधानिक स्थिति पर विचार
उपकर लगाने में ये भी परेशानी
आपदा उपकर लगाने के लिए जीएसटी के सॉफ्टवेयर में थोड़ा बदलाव करना होगा। यह प्रस्तावित शुगर उपकर जैसा हो सकता है, जिस पर मई में परिषद की बैठक में चर्चा हुई थी। हालांकि, पिछली बैठक में शुगर उपकर का विरोध भी हुआ था। बता दें कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकारों के पास अपने स्तर से कर लगाने का अधिकार नहीं रहा है, लेकिन राज्यों की मदद के लिए जीएसटी अधिनियम में उपकर लगाने का प्रावधान है।
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 30वीं बैठक में बिहार, ओडिशा व गुजरात जैसे कुछ राज्य केरल के प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं से सहमत नहीं थे। बैठक के बाद जेटली ने बताया कि बाढ़ से तबाह हुए केरल की तरफ से राज्य में जीएसटी पर 10 फीसदी आपदा प्रबंधन उपकर लगाने के प्रस्ताव पर परिषद ने चर्चा के लिए 7 सदस्यों का जीओएम बनाया है। इस 7 सदस्यीय समिति में पूर्वोत्तर, पहाड़ी और तटीय राज्यों के सदस्य होंगे। समिति के सदस्यों के नाम का ऐलान जल्द कर दिया जाएगा।
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पांच बिंदु जांचेगा जीओएम
- उपकर का दायरा राज्य में ही होगा या इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा
- क्या इसे सिर्फ कुछ लक्जरी सामानों पर ही लगाया जाना चाहिए
- क्या एनडीआरएफ या एसडीआरएफ का सिस्टम इन आपदाओं से खुद निपटने में सक्षम है
- किन परिस्थितियों में आपदा प्रबंधन उपकर लगाए जाने का निर्णय लिया जा सकता है
- जीएसटी के दायरे में इस तरह के उपकर को लगाए जाने की वैधानिक स्थिति पर विचार
उपकर लगाने में ये भी परेशानी
आपदा उपकर लगाने के लिए जीएसटी के सॉफ्टवेयर में थोड़ा बदलाव करना होगा। यह प्रस्तावित शुगर उपकर जैसा हो सकता है, जिस पर मई में परिषद की बैठक में चर्चा हुई थी। हालांकि, पिछली बैठक में शुगर उपकर का विरोध भी हुआ था। बता दें कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकारों के पास अपने स्तर से कर लगाने का अधिकार नहीं रहा है, लेकिन राज्यों की मदद के लिए जीएसटी अधिनियम में उपकर लगाने का प्रावधान है।
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राज्यों में कर राजस्व के घटने पर भी चिंता
बैठक के दौरान जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों में कर राजस्व घटने पर चिंताओं के बीच चर्चा की गई। बता दें कि जीएसटी लागू होने के समय पांच साल के अंदर राज्यों को कर घाटे से बाहर निकालने का प्रस्ताव रखा गया था। वित्त मंत्री जेटली ने पांच साल में इस लक्ष्य को हासिल करने का भरोसा जताया है। जेटली ने बताया कि पहले साल में जुलाई 2017 से मार्च 2018 तक राज्यों के राजस्व में औसतन 16 फीसदी की कमी आई थी, लेकिन वर्तमान वित्त वर्ष के अप्रैल से अगस्त तक पहले तिमाही में ये अंतर 13 फीसदी ही रह गया है।
ऐसे हैं जीएसटी राजस्व के आंकड़े
06 राज्य मिजोरम, अरुणाचल, मणिपुर, नगालैंड, सिक्किम व आंध्र प्रदेश में औसत से ज्यादा राजस्व संग्रह
25 राज्यों में राजस्व संग्रह में आई है गिरावट और इन सभी को मिलेगा केंद्र सरकार से मुआवजा
41,147 करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा केंद्र ने वर्ष 2017-18 के लिए जारी किया था राज्यों को
2015-16 वित्त वर्ष के राजस्व संग्रह के आधार पर राज्यों का घाटा 14 फीसदी पर सीमित करने के लिए दिया था मुआवजा
14930 करोड़ रुपये का मुआवजा केंद्र ने चालू वित्त वर्ष के जून व जुलाई महीने के लिए दिया है
04 गुना है ये मुआवजा वित्त वर्ष के पहले दो महीनों अप्रैल-मई के 3899 करोड़ रुपये के मुकाबले
इन 10 राज्यों में सबसे ज्यादा राजस्व गिरावट
राज्य राजस्व घटा
पुडुचेरी 42 फीसदी
पंजाब 36 फीसदी
हिमाचल 36 फीसदी
उत्तराखंड 35 फीसदी
जम्मू-कश्मीर 28 फीसदी
छत्तीसगढ़ 26 फीसदी
गोवा 25 फीसदी
ओडिशा 24 फीसदी
कर्नाटक 20 फीसदी
बिहार 20 फीसदी
(अप्रैल से अगस्त 2018 तक के हैं आंकड़े)
ऐसे हैं जीएसटी राजस्व के आंकड़े
06 राज्य मिजोरम, अरुणाचल, मणिपुर, नगालैंड, सिक्किम व आंध्र प्रदेश में औसत से ज्यादा राजस्व संग्रह
25 राज्यों में राजस्व संग्रह में आई है गिरावट और इन सभी को मिलेगा केंद्र सरकार से मुआवजा
41,147 करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा केंद्र ने वर्ष 2017-18 के लिए जारी किया था राज्यों को
2015-16 वित्त वर्ष के राजस्व संग्रह के आधार पर राज्यों का घाटा 14 फीसदी पर सीमित करने के लिए दिया था मुआवजा
14930 करोड़ रुपये का मुआवजा केंद्र ने चालू वित्त वर्ष के जून व जुलाई महीने के लिए दिया है
04 गुना है ये मुआवजा वित्त वर्ष के पहले दो महीनों अप्रैल-मई के 3899 करोड़ रुपये के मुकाबले
इन 10 राज्यों में सबसे ज्यादा राजस्व गिरावट
राज्य राजस्व घटा
पुडुचेरी 42 फीसदी
पंजाब 36 फीसदी
हिमाचल 36 फीसदी
उत्तराखंड 35 फीसदी
जम्मू-कश्मीर 28 फीसदी
छत्तीसगढ़ 26 फीसदी
गोवा 25 फीसदी
ओडिशा 24 फीसदी
कर्नाटक 20 फीसदी
बिहार 20 फीसदी
(अप्रैल से अगस्त 2018 तक के हैं आंकड़े)