मोदी सरकार के दो साल: जीएसटी, भूमि अधिग्रहण बिल लटकने से थमा विकास
- राज्यसभा में जीएसटी, भूमि अधिग्रहण जैसे अहम विधेयक लटकने से लक्ष्य पर ग्रहण
- कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को मिली उड़ान लेकिन आर्थिक सुधारों की राह में बड़ी बाधाएं
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दो साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खाते में कई उपलब्धियां दर्ज हुईं लेकिन मोदी के विकास मॉडल पर राज्यसभा का कमजोर संख्या बल ब्रेक लगाता रहा। कांग्रेस मुक्त भारत के उनके सपने को नई उड़ान मिली पर जीएसटी और भूमि अधिग्रहण बिल जैसे अहम विधेयकों के लटक जाने से लक्ष्य पर ग्रहण की स्थिति कायम रही। मोदी सरकार दो साल में इस गुत्थी को सुलझा नहीं पाई।
जीएसटी बिल के लटक जाने से आर्थिक सुधारों की गति प्रभावित हुई जबकि भूमि अधिग्रहण बिल को ठंडे बस्ते में डालने की मजबूरी से रोजगार के अवसरों पर धुंध की गहरी परत छाई रही। विकास के मोदी मॉडल के तहत भूमि अधिग्रहण बिल को पारित कर नए उद्योगों के लिए नई जमीन तैयार किया जाना था। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते थे जिसका वादा सत्ता में आने से पहले भाजपा ने किया था। इसी तरह जीएसटी बिल के पारित होने से बिक्री कर की समान व्यवस्था आर्थिक सुधारों के प्रयासों के गति देने की राह आसान कर सकता था। लेकिन लगभग ऐसे महत्वपूर्ण बिल राज्यसभा में अटक गए। दो साल में मोदी सरकार इन विधेयकों को पारित कराने के लिए आम सहमति बनाने में सफल नहीं हो पाई।
राज्यसभा में 53 सदस्यों की विदाई के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में यह मलाल व्यक्त भी हुआ। अब कांग्रेस के समर्थन के बगैर इन बिलों का पारित करा लेने की क्षमता का दावा किया जा रहा है लेकिन इसके लिए क्षेत्रीय दलों की मेहरबानी जरूरी होगी। सियासी गणित के फार्मूले अब भी राज्यसभा में मोदी सरकार को बहुत राहत देते नजर नहीं आते। चूंकि जीएसटी बिल संविधान संशोधन से जुड़ा है इसलिए इसे पारित कराने में दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।
बीजेपी का मानना है कि जीएसटी पर 154 सदस्य सहमत
भाजपा मानती है कि भाजपा और सहयोगी दल मिलाकर लगभग 110 सदस्य जीएसटी बिल के पक्ष में हैं। अन्य दलों के 44 सदस्यों का भी इस बिल को समर्थन हासिल है। यह आंकड़ा भी 154 तक ही पहुंचता है। अगर भाजपा 10 और सदस्यों का समर्थन जुटा पाती है तो दो तिहाई बहुमत के लिए 164 सदस्यों की जरूरत पूरी हो सकती है। अब मानसून सत्र में जीएसटी बिल को पारित कराने का प्रयास होगा।
राज्यसभा के खाली हो रही 57 सीटों को 15 राज्यों से भरा जाना है। ग्यारह जून को होने वाले चुनाव में भाजपा को इस बार तीन सीटों का फायदा हो रहा है। महाराष्ट्र से कांग्रेस के प्रवीण राष्ट्रपाल के निधन के बाद एक और सीट महाराष्ट्र से आ सकती है। इस तरह भाजपा की राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 49 से बढ़कर 53 पर पहुंच सकती है।
कांग्रेस की राज्यसभा में वर्तमान संख्या सदस्य संख्या 64 है जो घटकर 60 पर पहुंच सकती है। कांग्रेस फिर भी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी होगी लिहाजा मोदी के विकास मॉडल की जो राह राज्यसभा होकर गुजरती है, वह अब भी पथरीली है।