ग्राउंड रिपोर्ट रामपुर: गर्भवतियों में खून कम, बच्चों में नहीं दम, पर्याप्त पोषाहार को तरसे
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- अप्रैल से नवंबर तक 22.76 फीसदी गर्भवतियों में खून की कमी पाई गई
- आठ माह में जन्म के समय 10.20 प्रतिशत बच्चे कम वजन के मिल रहे
- रामपुर में माननीयों के गोद लिए गांवों में भी नहीं मिल रहा पर्याप्त पोषाहार
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विस्तार
लाल है तो काल है। पीला है तो ढीला है। हरा है तो भरा है। बच्चों के वजन केआधार पर बना यह स्लोगन कुपोषण की जंग में कारगर साबित हो सकता है, लेकिन भ्रष्ट तंत्र और आर्थिक तंगी कोख की खुराक में सुराख लगा रहे हैं। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत गर्भवतियों और बच्चों की संख्या के हिसाब से पोषाहार नहीं मिल रहा है। मां की ममता खून की कमी से जूझ रही है। गर्भवतियों में खून की कमी से बच्चों का वजन कम हो रहा है। आठ महीने की जांच में रामपुर की 22.76 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिक पाई गईं।
इसमें 6.31 फीसदी महिलाएं सीवियर एनीमिक रहीं। वहीं 10.20 प्रतिशत बच्चे जन्म के समय कम वजन के पाए गए। ऐसे में मासूमों का बचपन वजन के चक्कर में लाल, पीले और हरे घेरे में गुजर रहा है। रामपुर में डीएम के गोद लिए गांव उदयराज की मढै़या, प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक के गोद लिए गांव काशीपुर, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के ग्राम पंचायत दनियापुर शंकरपुर, ग्राम पंचायत हकीमपुर के हालात और सरकारी आंकड़े कुछ ऐसी ही तस्वीर पेश करती हैं। वहीं इन हालातों के बीच एक साल में 11,956 कुपोषित बच्चे स्वस्थ हो गए।
लॉकडाउन में महिलाएं नहीं करने देती थीं बच्चों का वजन
डीएम के गोद लिए गांव उदयराज की मढै़या में दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जहां जीरो से छह साल के 261 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें दो अतिकुपोषित और 11 कुपोषित बच्चे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सर्वेश देवी और सुषमा शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। महिलाएं अपने बच्चों का वजन नहीं करने देती थीं। घर-घर जाकर पोषाहार बांटा था। गांव के विक्की रस्तोगी होटल पर काम करते हैं। उनकी चार साल की बेटी प्रियांशी अतिकुपोषित है। जन्म के समय उसका वजन 600 ग्राम था। हालांकि अब छह किलो 200 ग्राम हो गया है। मां शालू रस्तोगी का कहना है कि माली हालत ठीक नहीं है। काम छोड़कर पोषण पुनर्वास केंद्र में कैसे भर्ती करें।
एक ही परिवार में चार बच्चे अतिकुपोषित
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के ग्राम पंचायत दनियापुर शंकरपुर में एक ही परिवार में चार बच्चे अतिकुपोषित मिले। मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करने वाले गांव के धर्मेंद्र की बेटियां प्रियंका, कल्पना, शिवानी और बेटा कपिल अतिकुपोषित हैं। कपिल दूसरी बीमारी से भी जूझ रहा है। धर्मेंद्र की पत्नी रानी बतातीं हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र से दलिया कभी कभार ही मिलता था। इस बार तो (नवंबर में) गेहूं-चावल मिला है। इससे क्या होगा, बच्चों के लिए दूध का इंतजाम नहीं कर पाते हैं। लॉकडाउन में मजदूरी भी नहीं मिल सकी थी। बेटे का इलाज अलीगढ़ से कराना पड़ रहा है।
एनआरसी में ठीक, घर पर नहीं बढ़ता वजन
रामपुर के प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक के गोद लिए गांव में दस आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां तीन केंद्रों पर ही 13 अतिकुपोषित बच्चे मिले, जबकि 17 बच्चे कुपोषित हैं। ये अतिकुपोषित और कुपोषित बच्चे मजदूर परिवारों के हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सेंटर पर निर्धारित बच्चों और गर्भवतियों की संख्या के हिसाब से राशन नहीं मिलता है। ऐसे में सभी को अनाज कहां से दें।
गांव के अतिकुपोषित बच्चे रहमान को तीन बार पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया। वहां ठीक रहता है, लेकिन घर आने के बाद उसका वजन नहीं बढ़ता है। यही हाल चार वर्षीय बिलाल का है। मां शमशाद जहां बताती हैं कि जन्म के समय बिलाल का वजन 800 ग्राम था। तीन साल पहले एनआरसी में भर्ती कराया था। हालांकि दो साल का अरहान नवंबर में पीली श्रेणी से हरी श्रेणी में आ गया।
तीन बच्चों को कराया एनआरसी में भर्ती
गांव हकीमगंज के आंगनबाड़ी केंद्र पर 175 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें सात अतिकुपोषित और 11 कुपोषित बच्चे हैं। 32 गर्भवती और 26 धात्री महिलाएं हैं। गांव के अतिकुपोषित तालीम, इल्मा और माहेनूर को एनआरसी में भर्ती कराया गया था। जहां तीनों का वजन बढ़ा, लेकिन घर आने के बाद फिर से तीनों लाल श्रेणी में पहुंच गए। मजदूर आजम के जुड़वां बेटे अरहान और अरमान भी अतिकुपोषित हैं। यहां भी दलिया और अनाज पूरा नहीं मिलने की बात सामने आई।
वर्ष 2020 में अप्रैल से नवंबर तक के आंकड़े
- प्रसव के दौरान या प्रसव के बाद 34 महिलाओं की मौत हुई।
- 62,715 गर्भवतियों की जांच में 10,313 एनीमिया और 3,963 गंभीर रूप से एनीमिक पाई गईं।
- प्रसव के दौरान या बाद में 169 महिलाओं को खून चढ़ाना पड़ा।
- जन्म के 28 दिन के भीतर 334 बच्चों की मौत हो गई, इसमें 191 लड़के और 143 लड़कियां शामिल हैं।
- जन्म के समय 2,630 बच्चे कम वजन के पाए गए।
मार्च 2020 में जिले में कुपोषित बच्चों की स्थिति
कुल कुपोषित बच्चों की संख्या : 30,552
अतिकुपोषित : 6,775
कुपोषित : 23,777
पांच साल में एनआरसी रामपुर में 900 बच्चे स्वस्थ
वर्ष 2015 में जिला अस्पताल रामपुर में शुरू हुए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) को कोरोना संक्रमण काल में बच्चों का इंतजार है। इस साल जुलाई से नवंबर तक सिर्फ 24 बच्चों को ही भर्ती किया गया। वहीं पांच साल में 900 से अधिक बच्चे वजन बढ़ाकर यहां से जा चुके हैं। एनआरसी रामपुर प्रदेश में लगातार दो साल दूसरे नंबर पर रहा। पिछले साल एनआरसी में तीस बच्चों को खून भी चढ़ाया गया।
किस साल कितने बच्चे एनआरसी में भर्ती हुए
साल---------संख्या
2015------61
2016------150
2017------205
2018------225
2019------215
2020------77
नोट: ये आंकड़े 21 दिसंबर, 2020 तक के हैं।