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आंदोलन नहीं भटका, दिल्ली पुलिस की वजह से ही रास्ता भटक गए थे किसान
Wed, 27 Jan 2021 10:14 PM IST
गौरव पाण्डेय
राहुल संपाल, नई दिल्ली
राहुल संपाल, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 27 Jan 2021 10:14 PM IST
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लाल किले की गुंबद पर चढ़ गए थे प्रदर्शनकारी
- फोटो : पीटीआई
26 जनवरी को लाल किले पर हुई घटना के बाद किसानों के धरना स्थल गाजीपुर बॉर्डर पर माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है। ट्रैक्टर परेड में शामिल होने आए अधिकांश किसान अपने घरों को लौट चुके हैं, वहीं प्रदर्शनकारी किसान अपने जत्थों में सरकार के खिलाफ डटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि लालकिले की घटना से हम अनजान हैं। ये लोग कौन थे। ये अचानक सब कैसे हुआ। हमें इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन परेड के दौरान पुलिस ने ही हमें दिल्ली जाने के लिए रास्ता दिया था। हमारे तय रास्ते पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। पुलिस की कार्रवाई के बाद से हमारे ट्रैक्टर भी खराब हो गए हैं। उनसे सामान तक गायब हो चुका है।
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किसान नेता राकेश टिकैत ने अमर उजाला से कहा कि जिस रास्ते पर पुलिस ने हमें चलने की इजाजत दी थी उस रास्ते पर बैरिकेडिंग की गई थी। हम उस पर कैसे चल सकते थे। पुलिस ने ही किसानों के लिए दिल्ली जाने वाले रास्ते को खोल दिया था। इस मामले की पूरी जांच होना चाहिए। हमारा लाल किले पर जाने का कोई प्लान नहीं था। न हम वहां जाना चाहते थे न ही वहां पर हम झंडा फहराना चाहते थे। जिसने भी वहां झंडा फहराने की कोशिश की है उस पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। हम किसान संगठन भी इस पर अपनी तरफ से जो कार्रवाई होगी वो करेंगे। कोई तिरंगा का अपमान कैसे कर सकता है। ये एक बहुत बड़ा षड्यंत्र था।
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रास्ता बदलने के सवाल पर टिकैत कहते है, जिन लोगों ने पुलिस प्रशासन पर ट्रैक्टर चलाने की कोशिश की है उन लोगों को ये आंदोलन भी छोड़ना पड़ेगा और ये स्थान भी छोड़ना पड़ेगा। हम उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कर कार्रवाई भी करवाएंगे। लाल किले की घटना की जिम्मेदारी के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा जिस भी व्यक्ति ने ये काम किया है उस पर निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। हम हिंसा के समर्थक नहीं हैं। हमने किसानों को दिल्ली बुलाया था और परेड के बाद उन्हें सुरक्षित घर भेज दिया। शाम छह बजे तक पूरी दिल्ली हमने खाली कर दी थी। इसकी जांच होनी चाहिए कि किसानों को आखिर दिल्ली किसने जाने दिया।
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वहीं, दीप सिद्धू के सवाल पर टिकैत ने कहा, हम नहीं जानते वे कौन हैं। सिद्धू के फोटो किस-किस के साथ हैं वो सबको पता है। ये सरकार की बड़ी साजिश थी कि किसानों के बीच रहकर ऐसा काम करो। ये पूरे सिख समाज और पंजाब को बदनाम करने की साजिश है। सरकार चाहती थी कि हम लोग आंदोलन को होल्ड करें। लेकिन हमारा आंदोलन चल रहा है और आगे भी चलता रहेगा। सरकार हमारी मांगें पूरी करे।
इसके साथ ही पुलिस पर हाथ उठाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह बहुत ही गलत है। पुलिसकर्मी हमारे भाई हैं। कई किसान परिवार से आते हैं। जिन लोगों ने पुलिस के साथ गलत व्यवहार किया है उनकी पूरी वीडियो फुटेज निकालकर जांच होनी चाहिए। आज किसानों के भी 400 से ज्यादा ट्रैक्टर और 450 से ज्यादा गाड़ियां भी तोड़ी गई हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
'हम तय समय पर निकले और रास्ता बदलते ही लाल किले पहुंच गए'
गाजीपुर बार्डर से लालकिले तक जाने वाले किसान इंद्रपाल सिंह और रणजीत सिंह ने अमर उजाला को बताया कि हम लोग तय समय पर गाजीपुर बॉर्डर से परेड के लिए निकले थे। लेकिन पुलिस ने हमारे तय रास्ते पर ही बैरिकेडिंग कर दी थी। इसके बाद कुछ ट्रैक्टर दूसरे रास्ते चल दिए तो कुछ ट्रैक्टरों को पुलिस ने ही दिल्ली की तरफ जाने दिया था। पुलिस ही एक-एक कर ट्रैक्टरों को छोड़ रही थी।
उन्होंने बताया कि जैसे ही दिल्ली की सीमा पर पहुंचे तो पुलिस और किसान के बीच झड़प होने लगी। हम लोग परेड के पीछे-पीछे चलते-चलते लाल किले तक पहुंच गए। वहां से यूटर्न लेकर शाम छह बजे तक वापस बॉर्डर पर लौट आए। परेड में अधिकांश किसानों को लाल किले तक जाने का रास्ता ही नहीं पता था। परेड में कुछ लोग शामिल हो गए थे जो बाद में परेड का नेतृत्व कर लाल किले तक ले गए।
घटना से निराश हैं किसान
लाल किले की घटना के बाद गाजीपुर बॉर्डर पर माहौल बदल गया है। आम दिनों की तुलना में किसानों की संख्या में भी कमी देखने को मिल रही है। किसानों में लाल किले की घटना के बाद निराशा है। किसानों का कहना है कि झंडा फहराना हमारा मकसद नहीं था। हमारी मुख्य मांग है तीनों कानूनों को वापस लेना। सरकार अगर आज इन कानूनों को वापस ले लेती है तो हम कल दिल्ली छोड़ देंगे।