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GPS Spoofing: क्या दिल्ली एयरपोर्ट पर हुआ साइबर हमला? बीते 16 महीने में स्पूफिंग की 465 घटनाएं; पढ़ें सब कुछ

Sat, 08 Nov 2025 03:15 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 08 Nov 2025 03:15 PM IST
सार

GPS Spoofing: क्या दिल्ली एयरपोर्ट जीपीएस स्पूफिंग का शिकार हुआ? अमूमन पाकिस्तान सीमा के पास होने वाली ये घटनाएं क्या अब दिल्ली तक पहुंच गई है? जीपीएस सिग्नल गड़बड़ी और आईएलएस अपग्रेड के बीच उड़ान सेवाओं में देरी के बाद ये सवाल उठ रहे हैं। पिछले दो दिन में हुई इन घटनाओं की जांच डीजीसीए कर रहा है, जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि इसके पीछे की असली वजह क्या है?

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GPS Spoofing: Was Delhi Airport a cyber attack? 465 incidents of spoofing in the last 16 months; know all
क्या दिल्ली एयरपोर्ट पर हुआ साइबर हमला? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट से संचालित 800 से अधिक विमान सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। इसके पीछे फिलहाल एटीसी की तरफ से ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम में खराबी बताया गया है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट में इस गड़बड़ी के पीछे जीपीएस स्पूफिंग जैसे साइबर अपराध की भूमिका को भी रेखांकित किया गया है। इस कारण दिल्ली, जयपुर, लखनऊ मुंबई समेत कई हवाई अड्डों से संचालित उड़ानों पर असर पड़ा है। आइए जानते क्या है जीपीएस स्पूफिंग और सरकार ने इसे लेकर अब तक कौन-सी जानकारी साझा की है।
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जीपीएस स्पूफिंग को साइबर हमला भी कहा जाता है, इस हमले में नकली सैटेलाइट सिग्नल भेजे जाते हैं ताकि विमान के नेविगेशन सिस्टम को गुमराह किया जा सके। इससे विमान को अपनी वास्तविक स्थिति की गलत जानकारी मिलती है, जिसके चलते कई उड़ानें प्रभावित हुईं है।
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उड़ानें देरी से, यात्रियों को परेशानी
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली एयरपोर्ट पर कई उड़ानों के रास्ते भटकने समेत कई की शिकायतें मिलीं। मंगलवार को दिल्ली एयरपोर्ट दुनिया में दूसरे स्थान पर सबसे ज्यादा उड़ान में व्यवधान वाला एयरपोर्ट रहा। कम से कम सात उड़ानों को जयपुर और लखनऊ जैसे नजदीकी हवाई अड्डों की ओर मोड़ना पड़ा। शुक्रवार को भी 800 से ज्यादा उड़ानें देरी से चलीं, जिन्हें आधिकारिक तौर पर एटीसी की तकनीकी खराबी बताया गया था।
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स्पूफिंग के पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ?
ईरान, तुर्किये, चीन और पाकिस्तान को स्पूफिंग (जीपीएस सिग्नल में छेड़छाड़) और अन्य साइबर हमलों से जोड़ा गया है। इन देशों पर गलत सूचना फैलाने और जीपीएस सिग्नल में दखल देने जैसे हमलों का आरोप है। यह गतिविधियां अक्सर असमान युद्ध (asymmetric warfare) की रणनीतियों का हिस्सा होती हैं, जिनका मकसद अहम ढांचे को बाधित करना और भ्रम फैलाना होता है। हाल के उदाहरणों में, भारत के हवाई क्षेत्र में विमानों को गुमराह करने के लिए जीपीएस स्पूफिंग और सरकारी व वित्तीय प्रणालियों पर साइबर हमले शामिल हैं।  

ओआरएफ के मुताबिक, ऐसी रिपोर्ट आई हैं कि भारत के हवाई क्षेत्र में विमानों को गुमराह करने के लिए जीपीएस स्पूफिंग का इस्तेमाल किया गया। इससे पायलटों में भ्रम पैदा हुआ। ऐसे मामले उत्तरी तुर्किये और इराक के आस-पास की उड़ानों को भी प्रभावित कर चुके हैं, जिससे नेविगेशन प्रणाली और पायलटों की सतर्कता पर असर पड़ा। ईरान का नाम भी ऐसे मामलों में सामने आया है। 2011 में एक अमेरिकी आरक्यू-170 ड्रोन को हैक कर लेने की घटना को ईरान से जोड़ा गया था।

यह भी पढ़ें - Airport Glitch: दिल्ली एयरपोर्ट पर 36 घंटे बाद सुधर रहे हालात, दो दिन में 800 से ज्यादा उड़ान सेवाएं प्रभावित

GPS Spoofing: Was Delhi Airport a cyber attack? 465 incidents of spoofing in the last 16 months; know all
क्या जीपीएस स्पूफिंग शिकार हुआ दिल्ली एयरपोर्ट? - फोटो : Adobe Stock
जानकारी और साइबर हमले
चीन और पाकिस्तान पर आरोप है कि उन्होंने भारत की रक्षा प्रणालियों को बाधित करने के लिए फर्जी वेबसाइटों और गलत सूचनाओं का इस्तेमाल किया। सरकार समर्थित 'एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट' (एपीटी) समूह भारत की वित्तीय संस्थाओं और सरकारी संस्थानों को निशाना बना चुके हैं, जिनका संबंध चीन, तुर्किये, ईरान आदि देशों से बताया जाता है। इन समूहों ने रैनसमवेयर और डेटा चोरी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया। ईरान का 'फॉस्फोरस ग्रुप' इस्राइली और अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाते हुए  स्पीयर फिशिंग (किसी खास व्यक्ति या समूह को निशाना बनाना) अभियानों में शामिल पाया गया है।

असली कारण: जीपीएस स्पूफिंग या तकनीकी गड़बड़ी?
हालांकि शुक्रवार की देरी को एटीसी सिस्टम की समस्या बताया गया, लेकिन जांच में यह बात सामने आ रही है कि जीपीएस सिग्नल की गड़बड़ी भी एक बड़ा कारण हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को नेविगेशन इंटीग्रिटी कैटेगरी वैल्यू, जो विमान की स्थिति की सटीकता मापती है, सामान्य स्तर 8 से गिरकर 0 पर आ गई थी। यह स्थिति बेहद असामान्य मानी जाती है।

डीजीसीए ने मामले की जांच शुरू की
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए)ने इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। इस मामले में पायलटों ने बताया कि यह गड़बड़ी दिल्ली से 60 नॉटिकल मील (लगभग 110 किमी) की सीमा में ज्यादा दिखाई दी।


 

GPS Spoofing: Was Delhi Airport a cyber attack? 465 incidents of spoofing in the last 16 months; know all
क्या है जीपीएस स्पूफिंग? - फोटो : Adobe Stock
आईएलएस बंद होने से बढ़ी दिक्कत
दिल्ली एयरपोर्ट के मुख्य रनवे का इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) फिलहाल अपग्रेड के लिए बंद है। इसे कैटेगरी-III सिस्टम में बदला जा रहा है, जिससे सर्दियों में घने कोहरे के बीच भी दोनों दिशाओं से लैंडिंग संभव हो सकेगी। इस सिस्टम के अस्थायी रूप से बंद रहने के कारण विमान अब सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन पर निर्भर हैं, जो उन्हें स्पूफिंग के लिए अधिक संवेदनशील बनाता है।

क्या है जीपीएस स्पूफिंग?
जीपीएस स्पूफिंग एक साइबर हमला है, जिसमें नकली सिग्नल भेजकर किसी भी डिवाइस को गलत लोकेशन दिखाई जाती है। जैसे आपके फोन की लोकेशन अचानक चार किमी दूर दिखने लगे, वैसा ही विमानों के साथ होता है। जब यह विमान के साथ होता है, तो उसका नेविगेशन सिस्टम गलत दिशा में जा सकता है, जिससे दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाता है।

यह भी पढ़ें - Airport Glitch: क्या ATC ने जुलाई में मिली चेतावनी की अनदेखी की? अहमदाबाद एअर इंडिया हादसे के बाद आया था अलर्ट



बॉर्डर इलाकों में जीपीएस स्पूफिंग आम, अब दिल्ली में असर
इससे पहले भारत सरकार ने लोकसभा में बताया था कि नवंबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच 465 जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएं भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र (अमृतसर और जम्मू) में दर्ज की गईं। वहीं अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (आईएटीए) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में 4.3 लाख जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2023 की तुलना में 62% अधिक हैं।

भारत ही नहीं दुनिया के अन्य देश भी शिकार
जीपीएस स्पूफिंग की घटना दुनिया के तमाम देशों में भी देखने को मिली है। दिसंबर 2024 में कजाकिस्तान में अजरबैजान एयरलाइंस का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 38 लोग मारे गए। इस हादसे के लिए यह माना जाता है कि यह जीपीएस स्पूफिंग और जैमिंग के कारण रूसी रक्षा प्रणाली की गलती से हुआ। वहीं मार्च 2025 में म्यांमार में राहत सामग्री लेकर जा रहे भारतीय वायुसेना के विमान को भी चीन समर्थित सिस्टम से जीपीएस स्पूफिंग का सामना करना पड़ा।

सीमा से आती तकनीकी दिक्कतें
हालांकि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात जीपीएस जैमर्स, जो पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए लगाए गए हैं, कभी-कभी उत्तर भारत के भीतर उड़ान भरने वाले विमानों को भी प्रभावित करते हैं।
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