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गोयल की अपील: आयात कम करे प्लास्टिक इंडस्ट्री, 100 अरब अमेरिकी डॉलर का उद्योग बनने की क्षमता
Sat, 16 Apr 2022 10:49 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 16 Apr 2022 10:49 PM IST
सार
गोयल ने कहा कि प्लास्टिक उद्योग को आयात की मात्रा को कम करने और आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है।
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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
- फोटो : twitter/PiyushGoyal
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विस्तार
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को प्लास्टिक उद्योग से आयात पर निर्भरता कम करने और अगले 4-5 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का उद्योग बनने की इच्छा जताई। मंत्री ने कहा कि भारतीय प्लास्टिक उद्योग के लिए दुनिया का मुख्य आपूर्ति केंद्र बनने के लिए उल्लेखनीय विकास क्षमता है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक उद्योग को आयात की मात्रा को कम करने और आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। 17 अरब अमेरिकी डॉलर के आयात की मात्रा से पता चलता है कि एक बड़ा बाजार हमारी प्रतीक्षा कर रहा है।
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गोयल ने प्लास्टिक निर्यातक संस्था PLEXCONCIL द्वारा एक्सपोर्ट एक्सीलेंस अवार्ड्स में बोलते हुए कहा कि अगले 25 वर्षों में 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था के साथ मुझे यकीन है कि अगले 4-5 वर्षों में प्लास्टिक उद्योग को 100 बिलियन डॉलर का उद्योग बनाना संभव है। हमें उस स्तर तक पहुँचने की उम्मीद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी आर्थिक गतिविधियों को मौजूदा 3 लाख करोड़ रुपये से 10 लाख करोड़ रुपये के उद्योग तक ले जाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। यह बदले में रोजगार के अपार अवसर पैदा करेगा।
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गोयल ने कहा कि यह वृद्धि युवाओं को विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर प्रदान करेगी, जिसमें जरूरतमंद लोगों को रोजगार प्रदान करने की क्षमता होगी, जो विकास चक्र में पीछे रह गए हैं। PLEXCONCIL के अनुसार, वर्तमान में प्लास्टिक उद्योग 50 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है। भारत के प्लास्टिक उद्योग की आर्थिक गतिविधि सालाना 3 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से एक तिहाई निर्यात किया जाता है।
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केंद्रीय मंत्री ने भारतीय प्लास्टिक उद्योग के हितधारकों से विश्व स्तरीय, गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी, उपकरण और क्षमताओं को उन्नत करने और प्रमुख खिलाड़ी बनने का आग्रह किया। इस क्षेत्र में स्थिरता की वकालत करते हुए गोयल ने कहा कि हमें दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि भारतीय पर्यावरण के प्रति जागरूक हैं।