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Karnataka: 'वक्फ की संपत्तियों पर बने मंदिरों को नहीं हटाएगी सरकार', CM सिद्धारमैया ने विधानसभा में दी जानकारी
Wed, 18 Dec 2024 08:04 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 18 Dec 2024 08:04 PM IST
सार
कर्नाटक विधानसभा में वक्फ बोर्ड की तरफ से किसानों, मंदिरों और कई अन्य व्यक्तियों को बेदखली नोटिस जारी करने के मुद्दे पर चर्चा के दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा, 'अगर वक्फ संपत्तियों पर मंदिर बनाए गए हैं, तो हम उन्हें नहीं हटाएंगे। मैं यह बहुत स्पष्ट कर रहा हूं। अगर कोई नोटिस जारी किया गया है, तो उन्हें (नोटिस) वापस ले लिया जाएगा।'
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सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक
- फोटो : ANI
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विस्तार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को विधानसभा को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार उन मंदिरों को नहीं हटाएगी जो वक्फ संपत्तियों पर बने हैं। इस मामले में उन्होंने आगे कहा कि, अगर उन्हें (मंदिरों को) नोटिस दिए गए हैं, तो उन्हें वापस ले लिया जाएगा
जारी किए गए नोटिस लिए जाएंगे वापस- सिद्धारमैया
विधानसभा में वक्फ बोर्ड की तरफ से किसानों, मंदिरों और कई अन्य व्यक्तियों को बेदखली नोटिस जारी करने के मुद्दे पर चर्चा के दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा, 'अगर वक्फ संपत्तियों पर मंदिर बनाए गए हैं, तो हम उन्हें नहीं हटाएंगे। मैं यह बहुत स्पष्ट कर रहा हूं। अगर कोई नोटिस जारी किया गया है, तो उन्हें (नोटिस) वापस ले लिया जाएगा।'
भाजपा ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा
जब विधानसभा में वक्फ मुद्दे को भाजपा ने इसे उठाया, तो वक्फ और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री बी जेड ज़मीर अहमद खान ने स्पष्ट किया कि अगर किसानों और मंदिरों को नोटिस दिए गए हैं, तो उन्हें वापस ले लिया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी उनके बयान को दोहराया और कहा कि किसी भी किसान को उस जमीन से बेदखल नहीं किया जाएगा, जिस पर वह खेती कर रहा है।
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केवल नोटिस वापस लेने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा- भाजपा
इस मामले में भाजपा विधायक अरागा ज्ञानेंद्र ने मांग की कि सरकारी अभिलेखों में वक्फ के रूप में दर्ज संपत्तियों को भी हटाया जाना चाहिए, क्योंकि केवल नोटिस वापस लेने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। विपक्षी भाजपा के नेता आर. अशोक ने मांग को उचित ठहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के गृह जिले मैसूर के कृष्णा राजा निर्वाचन क्षेत्र में 110 कुरुबा परिवार हैं, जो नोटिस हटाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने सिद्धारमैया को कई ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जहां लोगों को ऐसे नोटिसों से परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस पर मंत्री बी जेड ज़मीर अहमद खान ने भाजपा को याद दिलाया कि 2014 में उनके घोषणापत्र में वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण हटाने का वादा किया गया था।
संपत्तियों को बचाने की जरूरत थी- सीएम
वहीं मुख्यमंत्री ने वक्फ संपत्तियों को बचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में 1.10 लाख एकड़ वक्फ संपत्तियां थीं, जो अब इनाम उन्मूलन अधिनियम और अतिक्रमण जैसे कानून के विभिन्न प्रावधानों के कारण घटकर सिर्फ 20,000 एकड़ रह गई हैं। भाजपा विधायक अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा, 'हम (भाजपा) भी वक्फ संपत्तियों को बचाने का समर्थन करते हैं, लेकिन हमारा मुद्दा यह है कि अब नोटिस क्यों दिए गए।' इस पर सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि स्थिति ऐसी थी कि संपत्तियों को बचाने की जरूरत थी और नोटिस इसलिए दिए गए क्योंकि इसके लिए केंद्रीय कानून है। उन्होंने बताया कि अब स्पष्टीकरण इसलिए जरूरी था क्योंकि विजयपुरा से भाजपा विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने बीदर से मार्च निकाला था।
सीएम ने भाजपा पर ली चुटकी
सीएम सिद्धारमैया ने चुटकी लेते हुए कहा, 'भाजपा में राजनीतिक विभाजन है, लेकिन मैं आपके आंतरिक मामले पर चर्चा नहीं करूंगा।' उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और याद दिलाया कि राज्य में माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश के बावजूद भाजपा हाल ही में तीनों विधानसभा क्षेत्रों चन्नपटना, संदूर और शिगगांव में हुए उपचुनाव हार गई। कांग्रेस सरकार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट न होने पर भाजपा ने विधानसभा से वाकआउट कर दिया।
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जारी किए गए नोटिस लिए जाएंगे वापस- सिद्धारमैया
विधानसभा में वक्फ बोर्ड की तरफ से किसानों, मंदिरों और कई अन्य व्यक्तियों को बेदखली नोटिस जारी करने के मुद्दे पर चर्चा के दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा, 'अगर वक्फ संपत्तियों पर मंदिर बनाए गए हैं, तो हम उन्हें नहीं हटाएंगे। मैं यह बहुत स्पष्ट कर रहा हूं। अगर कोई नोटिस जारी किया गया है, तो उन्हें (नोटिस) वापस ले लिया जाएगा।'
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भाजपा ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा
जब विधानसभा में वक्फ मुद्दे को भाजपा ने इसे उठाया, तो वक्फ और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री बी जेड ज़मीर अहमद खान ने स्पष्ट किया कि अगर किसानों और मंदिरों को नोटिस दिए गए हैं, तो उन्हें वापस ले लिया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी उनके बयान को दोहराया और कहा कि किसी भी किसान को उस जमीन से बेदखल नहीं किया जाएगा, जिस पर वह खेती कर रहा है।
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केवल नोटिस वापस लेने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा- भाजपा
इस मामले में भाजपा विधायक अरागा ज्ञानेंद्र ने मांग की कि सरकारी अभिलेखों में वक्फ के रूप में दर्ज संपत्तियों को भी हटाया जाना चाहिए, क्योंकि केवल नोटिस वापस लेने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। विपक्षी भाजपा के नेता आर. अशोक ने मांग को उचित ठहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के गृह जिले मैसूर के कृष्णा राजा निर्वाचन क्षेत्र में 110 कुरुबा परिवार हैं, जो नोटिस हटाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने सिद्धारमैया को कई ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जहां लोगों को ऐसे नोटिसों से परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस पर मंत्री बी जेड ज़मीर अहमद खान ने भाजपा को याद दिलाया कि 2014 में उनके घोषणापत्र में वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण हटाने का वादा किया गया था।
संपत्तियों को बचाने की जरूरत थी- सीएम
वहीं मुख्यमंत्री ने वक्फ संपत्तियों को बचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में 1.10 लाख एकड़ वक्फ संपत्तियां थीं, जो अब इनाम उन्मूलन अधिनियम और अतिक्रमण जैसे कानून के विभिन्न प्रावधानों के कारण घटकर सिर्फ 20,000 एकड़ रह गई हैं। भाजपा विधायक अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा, 'हम (भाजपा) भी वक्फ संपत्तियों को बचाने का समर्थन करते हैं, लेकिन हमारा मुद्दा यह है कि अब नोटिस क्यों दिए गए।' इस पर सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि स्थिति ऐसी थी कि संपत्तियों को बचाने की जरूरत थी और नोटिस इसलिए दिए गए क्योंकि इसके लिए केंद्रीय कानून है। उन्होंने बताया कि अब स्पष्टीकरण इसलिए जरूरी था क्योंकि विजयपुरा से भाजपा विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने बीदर से मार्च निकाला था।
सीएम ने भाजपा पर ली चुटकी
सीएम सिद्धारमैया ने चुटकी लेते हुए कहा, 'भाजपा में राजनीतिक विभाजन है, लेकिन मैं आपके आंतरिक मामले पर चर्चा नहीं करूंगा।' उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और याद दिलाया कि राज्य में माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश के बावजूद भाजपा हाल ही में तीनों विधानसभा क्षेत्रों चन्नपटना, संदूर और शिगगांव में हुए उपचुनाव हार गई। कांग्रेस सरकार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट न होने पर भाजपा ने विधानसभा से वाकआउट कर दिया।
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