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Politics: 'RSS का सिक्का 60 रुपये का होना चाहिए था, जितनी अंग्रेज सावरकर को देते थे पेंशन', कांग्रेस का तंज
Thu, 02 Oct 2025 10:28 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 02 Oct 2025 10:28 PM IST
सार
BJP Vs Congress: एक तरफ सरकार ने आरएसएस के 100 वर्ष के योगदान को सम्मान देने की कोशिश की, तो वहीं कांग्रेस ने इसे इतिहास तोड़-मरोड़कर पेश करने की कवायद बताया। एक ओर भारत माता की छवि वाले सिक्के को 'ऐतिहासिक कदम' कहा जा रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे गांधी के विचारों को दबाने की कोशिश मान रहा है।
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पवन खेड़ा, नेता, कांग्रेस
- फोटो : ANI
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विस्तार
देश में आजादी के इतिहास पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इसकी वजह है- सरकार की तरफ से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान पर डाक टिकट और 100 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी करना। लेकिन कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार इतिहास को चाहे जितना बदलने की कोशिश करे, देश हमेशा महात्मा गांधी का ही रहेगा।
यह भी पढ़ें - RSS: 'भारत बनेगा विश्वगुरु इसमें आरएसएस की भूमिका अहम'; उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने शताब्दी पर दी शुभकामनाएं
कांग्रेस नेता का RSS-BJP पर तंज
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अगर आरएसएस के नाम पर सिक्का जारी करना ही था तो वह 60 रुपये का होना चाहिए था। वही 60 रुपये जो स्वतंत्रता सेनानी कहे जाने वाले विनायक दामोदर सावरकर को अंग्रेजों से पेंशन के तौर पर मिला करता था।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर डाक टिकट जारी करना था तो वह ब्रिटिश पोस्ट का करना चाहिए था, जिससे सावरकर अंग्रेजों को अपनी दया याचिकाएं भेजते थे।'
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गांधी बनाम सावरकर पर राजनीति
पवन खेड़ा ने आरएसएस और भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चाहे कितने भी सिक्के छापे जाएं, डाक टिकट निकाले जाएं या पाठ्यक्रम में आरएसएस की विचारधारा भरी जाए, 'यह देश गांधी का था, है और रहेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि एक दिन सत्ता से बाहर होने के बाद आरएसएस-भाजपा की विचारधारा को लोग ऐसे निकाल फेंकेंगे जैसे दूध से मक्खी निकाली जाती है।
यह भी पढ़ें - Dussehra Rally: 'असली शिवसेना आज भी हमारे पास है', दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे बोले- जो भाग गए वो...
सरकार का पक्ष और मोदी का बयान
आरएसएस का स्मारक सिक्का जारी को जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह संभवतः स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार है कि भारतीय मुद्रा पर भारत माता की छवि छपी है। 100 रुपये के सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ का शेर) और दूसरी ओर वर मुद्रा में भारत माता का चित्र है। भारत माता के पास एक सिंह खड़ा है और सामने स्वयंसेवक सलामी की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। सिक्के पर संघ का मूल मंत्र भी अंकित है, 'राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय, इदं न मम।' इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने जारी किए गए डाक टिकट की ऐतिहासिक महत्ता भी बताई। उन्होंने याद दिलाया कि 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस स्वयंसेवक अनुशासन और देशभक्ति की धुनों के साथ शामिल हुए थे। नया टिकट उसी क्षण को दर्शाता है।
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पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अगर आरएसएस के नाम पर सिक्का जारी करना ही था तो वह 60 रुपये का होना चाहिए था। वही 60 रुपये जो स्वतंत्रता सेनानी कहे जाने वाले विनायक दामोदर सावरकर को अंग्रेजों से पेंशन के तौर पर मिला करता था।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर डाक टिकट जारी करना था तो वह ब्रिटिश पोस्ट का करना चाहिए था, जिससे सावरकर अंग्रेजों को अपनी दया याचिकाएं भेजते थे।'
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गांधी बनाम सावरकर पर राजनीति
पवन खेड़ा ने आरएसएस और भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चाहे कितने भी सिक्के छापे जाएं, डाक टिकट निकाले जाएं या पाठ्यक्रम में आरएसएस की विचारधारा भरी जाए, 'यह देश गांधी का था, है और रहेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि एक दिन सत्ता से बाहर होने के बाद आरएसएस-भाजपा की विचारधारा को लोग ऐसे निकाल फेंकेंगे जैसे दूध से मक्खी निकाली जाती है।
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