महाराष्ट्र: 'मराठी मानुष की ताकत के सामने झुक गई सरकार', हिंदी वाले आदेश को वापस लेने पर उद्धव ने साधा निशाना
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हिंदी भाषा वाले सरकारी आदेश को रद्द करने को लेकर निशाना साधा। ठाकरे ने कहा कि सरकार मराठी मानुष के सामने हार गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार मराठी और गैर-मराठी लोगों के बीच फूट डालना चाहती थी।
विस्तार
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरकार मराठी मानुष की ताकत के सामने हार गई है। उन्होंने यह बात महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी भाषा से जुड़े सरकारी आदेश (जीआर) को वापस लेने पर कही। उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार मराठी मानुष की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रही थी और मराठी तथा गैर-मराठी लोगों के बीच फूट डालना चाहती थी।
फडणवीस सरकार ने रद्द किए सरकारी आदेश
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कैबिनेट बैठक के बाद रविवार को घोषणा करते हुए कहा, 'आज तीन-भाषा नीति पर मंत्रिमंडल में चर्चा हुई। हमने तय किया है कि डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जो यह तय करेगी कि किस कक्षा से कौन-सी भाषा लागू की जाए, कैसे की जाए और छात्रों को क्या विकल्प दिए जाएं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक यह समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपती, तब तक 16 अप्रैल 2025 और 17 जून 2025 को जारी दोनों सरकारी आदेश रद्द माने जाएंगे।'
ये भी पढ़ें: Maharashtra Hindi Row: राज्य के स्कूलों में हिंदी भाषा पर नया नियम फिलहाल लागू नहीं होगा, CM फडणवीस का एलान
क्या था त्रिभाषा नीति विवाद?
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने आदेश जारी कर कहा था कि पहली से पांचवीं तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। इस पर कई शिक्षाविदों, मराठी भाषा प्रेमियों और भाषा सलाहकार समिति ने आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि प्राथमिक कक्षाओं में मातृभाषा पर ही ध्यान होना चाहिए, अन्यथा बच्चों की भाषा सीखने की क्षमता कमजोर होगी।
नई समिति क्या करेगी काम?
यह तय करना कि तीसरी भाषा कौन-सी कक्षा से शुरू हो,
भाषा लागू करने का तरीका क्या हो,
और छात्रों को कितने और कौन से विकल्प दिए जाएं।
सलाहकार समिति ने सरकार से की थी मांग
इससे पहले राज्य सरकार की तरफ से नियुक्त भाषा सलाहकार समिति ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की है कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए। पुणे में आयोजित एक बैठक में समिति के 27 में से 20 सदस्य उपस्थित थे। इस बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि कक्षा 5 से पहले किसी भी तीसरी भाषा — चाहे वह हिंदी ही क्यों न हो — को पढ़ाना उचित नहीं है। इस बैठक में मराठी भाषा विभाग के सचिव किरण कुलकर्णी भी मौजूद थे।
ये भी पढ़ें: Maharashtra Politics: विपक्ष ने सरकार का न्योता ठुकराया, लगाए आरोप; विधानसभा का मानसून सत्र में हंगामे के आसार
क्या था राज्य सरकार का आदेश?
महाराष्ट्र सरकार ने एक संशोधित आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पहली से पांचवीं तक हिंदी को आमतौर पर तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया कि अगर किसी स्कूल में हर कक्षा में कम से कम 20 छात्र किसी अन्य भारतीय भाषा को पढ़ना चाहें, तो वे हिंदी से छूट पा सकते हैं। इसके लिए या तो नया शिक्षक नियुक्त किया जाएगा या ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था की जाएगी।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.