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Gujarat: गांधीनगर में अमित शाह बोले, तकनीक की मदद से आपराधिक न्याय प्रणाली की सभी चुनौतियां होंगी दूर

Tue, 23 Jan 2024 06:23 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर (गुजरात)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर (गुजरात) Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 23 Jan 2024 06:23 PM IST
सार

Gujarat: केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि जब तक हम न्यायिक प्रक्रिया के सभी हितधारकों को फोरेंसिक साइंस के साथ नहीं जोड़ेंगे, तब तक हमें लाभ नहीं होगा। फोरेंसिक साइंस का इस्तेमाल जांच, अभियोजन और न्याय के लिए किया जाना चाहिए।

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Govt is working on `big challenge' of integration of technology in entire policing system: Amit Shah
नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह। - फोटो : एक्स/अमित शाह

विस्तार

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि अगले पांच वर्ष में टेक्नोलॉजी की मदद से आपराधिक न्याय प्रणाली की सभी चुनौतियों को दूर किया जाएगा और भारत की न्याय व्यवस्था दुनिया में सबसे आधुनिक होगी। शाह गांधीनगर में नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) के 5वें अंतरराष्ट्रीय एवं 44वें अखिल भारतीय अपराध विज्ञान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

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शाह ने कहा, यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली एक नए युग में प्रवेश कर रही है। 150 साल पुराने कानूनों को खत्म कर तीन नए कानूनों का मसौदा पेश किया जा चुका है। इन तीनों कानूनों में प्रमुख मुद्दों में से दो इसी सम्मेलन से जुड़े हैं। पहला, समय पर न्याय दिलाना और दूसरा, सजा की दर को बढ़ाकर अपराधों पर लगाम लगाना। तीनों कानूनों में इन दोनों मुद्दों को तकनीक के साथ बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इन कानूनों में निर्णय लिया गया है कि सात साल या अधिक सजा वाले अपराधों के क्राइम सीन पर फोरेंसिक साइंस अधिकारी का जाना अनिवार्य होगा। इससे जांच में जजों और अभियोजकों को भी सरलता होगी और इससे सजा की बढ़ाने में भी सफलता मिलेगी। 
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शाह ने मौजूद युवाओं से कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को हर क्षेत्र में विश्व में पहले स्थान पर पहुंचाने का सपना देखा है। इसमें फॉरेंसिक साइंस भी शामिल है और ये काम आप सभी युवाओं को करना है। नई व्यवस्थाएं बनने के बाद निश्चित रूप से भारत फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान पर होगा।
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10 वर्षों में किए युगपरिवर्तन वाले 50 काम
शाह ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 10 वर्षों में 50 से अधिक युगांतरकारी काम किए हैं। पिछले पांच वर्षों के तीन बड़े काम हैं, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, गुजरात में एनएफएसयू का विस्तार कर राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी बनाना और 150 सालों के बाद आपराधिक न्याय प्रणाली में परिवर्तन कर तीनों कानूनों को नया बनाना। गृह मंत्री ने कहा किइन तीनों परिवर्तनों को एकसाथ देखने पर शिक्षा, फॉरेंसिक साइंस और आपराधिक न्याय प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन हो सकता है। मोदी के नेतृत्व में ऐसी व्यवस्था की गई है कि पांच साल बाद हर साल देश को 9,000 से अधिक साइंटिफिक ऑफिसर्स और फोरेंसिक साइंस विशेषज्ञ मिलेंगे।

फोरेंसिक साइंस उभरता क्षेत्र...अपराध रोकने में अहम भूमिका
शाह ने कहा, फोरेंसिक बिहेवियरल साइंस एक उभरता हुआ क्षेत्र है। अपराध रोकने में जितनी भूमिका कठोर प्रशासन और अच्छे न्यायतंत्र की होती है, उतनी ही बिहेवियरल साइंस की भी हो सकती है। ये मॉडस ऑपरेंडी ब्यूरो के एक चरण आगे का विचार है। अगर हम बिहेवियर की स्टडी अच्छे से कर उसे प्राथमिक शिक्षा में स्थान देते हैं, तो अपराधी को खड़ा होने से रोक सकते हैं। फॉरेंसिक साइंस आइसोलेशन में समाज की सेवा नहीं कर सकता, न्यायिक प्रक्रिया के सभी हितधारकों के साथ फोरेंसिक साइंस का इंटीग्रेशन किए बिना हमें इसका फायदा नहीं मिल सकता।

 गृह मंत्री शाह ने कहा, फोरेंसिक साइंस का इस्तेमाल जांच, अभियोजन, न्याय प्रणाली के साथ अब इसे शिक्षा में अडॉप्ट कर एक स्टेप आगे जाने का समय आ गया है। रक्षात्मक, आगे का सोचने वाली और उत्पादक पुलिसिंग की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण और जांच में मदद के लिए एक डिजिटल फोरेंसिक एक्सीलेंस सेंटर का भी उद्घाटन हुआ है। गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत की आजादी के 10 वर्ष पूरे होंगे उस वक्त हर क्षेत्र में अग्रणी भारत के संकल्प को चरितार्थ करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किए गए सुधारों के आधार पर हमें आगे बढ़ना होगा। शाह ने कहा, आने वाले एक साल में देशभर में नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी  के नौ और कैंपस खुलेंगे।

चार चुनौतियां आपराधिक न्याय प्रणाली की

  • बेसिक पुलिसिंग के सिद्धांत के साथ समझौता किए बगैर पूरी व्यवस्था में तकनीक को स्वीकार कर सबसे आधुनिक पुलिस व्यवस्था बनना।
  • तकनीक के उपयोग से मानवीय उपस्थिति के महत्व को कम ना होने देना।
  • हाइब्रिड और बहुआयामी खतरों को पहचानकर हमारे सिस्टम को इनसे बचाने के लिए नेटवर्क तैयार करना।
  • आपराधिक न्याय प्रणाली को विश्व में सबसे आधुनिक बनाना और फोरेंसिंक की स्वीकार्यता को साहसिक स्वभाव बनाना।


न्याय मिलने की प्रक्रिया में प्रमुख समस्याएं
शाह ने कहा, हम इन चार चुनौतियों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। न्याय मिलने की प्रक्रिया में इसके उपलब्ध होने, इस तक पहुंच होने और इसे प्राप्त करने का सामर्थ्य प्रमुख समस्याएं हैं। इन तीनों का उपाय तकनीक में समाहित है। आज अपराध के स्वरूप, जरिये और तरीके हर रोज बदल रहे हैं। ऐसे में पुलिस को अपराध और अपराधियों से दो पीढ़ी आगे रहने की जरूरत है। शाह ने कहा, अपराधों को रोकने के लिए हमें तकनीक के नीति-नियमों में वैश्विक साम्यता लाने का भी प्रयास करना चाहिए।

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