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Monkeypox Vaccine: मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों से सरकार हुई सतर्क, वैक्सीन और किट के लिए निकाला टेंडर

Wed, 27 Jul 2022 11:25 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 27 Jul 2022 11:25 PM IST
सार

अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि आईसीएमआर के तहत पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) ने एक मरीज के नैदानिक नमूने से मंकीपॉक्स वायरस को अलग कर दिया है।

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Govt floats expression of interest for developing monkeypox vaccine, diagnostic kits
मंकीपॉक्स का खतरा - फोटो : istock

विस्तार

देश में मंकीपॉक्स के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है। सरकार ने मंकीपॉक्स की वैक्सीन निर्माण के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्य' यानि टेंडर निकाला है। इसके अलावा मंकीपॉक्स की जांच के लिए टेस्टिंग किट का भी टेंडर निकाला गया है। वैक्सीन और टेस्टिंग किट प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप मोड से बनाई जाएगी। सरकार की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक 10 अगस्त तक कंपनियां ईओआई जमा कर सकती हैं।  अब तक देश में मंकीपॉक्स के चार केस मिल चुके हैं। इनमें से तीन केरल में और एक दिल्ली में है। दिल्ली में पाया गया मंकीपॉक्स का पहला मरीज एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह ठीक हो रहा है।

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मरीज के नमूने से मंकीपॉक्स वायरस किया अलग 
वहीं, अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि आईसीएमआर के तहत पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) ने एक मरीज के नैदानिक नमूने से मंकीपॉक्स वायरस को अलग कर दिया है। यह नैदानिक किट और बीमारी के खिलाफ टीके के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। भारत द्वारा वायरस को अलग करने के साथ आईसीएमआर ने वैक्सीन उम्मीदवार के विकास में संयुक्त सहयोग के लिए अनुभवी वैक्सीन निर्माताओं, फार्मा कंपनियों, अनुसंधान और विकास संस्थानों और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक (आईवीडी) किट निर्माताओं से ईओआई भी आमंत्रित किया है। 
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एनआईवी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा यादव ने कहा कि वायरस को अलग करना कई अनुसंधान और विकास करने की भारत की क्षमता को बढ़ाएगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने एक मरीज के नैदानिक नमूने से मंकीपॉक्स वायरस को सफलतापूर्वक अलग कर दिया है जो भविष्य में नैदानिक किट और टीके के विकास में मदद कर सकता है। चेचक के लिए जीवित क्षीण टीका अतीत में बड़े पैमाने पर टीकाकरण के लिए सफल रहा था। इसी तरह के दृष्टिकोण मंकीपॉक्स वैक्सीन बनाने के लिए आजमाए जा सकते हैं।
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संभावित टीके के विकास के लिए केंद्र के साथ चर्चा शुरू 
बुधवार को सूत्रों ने बताया कि कई दवा कंपनियों ने मंकीपॉक्स के खिलाफ संभावित टीके के विकास के लिए केंद्र के साथ चर्चा शुरू कर दी है। मंकीपॉक्स के खिलाफ वैक्सीन विभिन्न वैक्सीन निर्माण कंपनियों के साथ चर्चा में है, लेकिन इस तरह के किसी भी फैसले के लिए यह एक बहुत ही शुरुआती दौर में है। यदि इसकी जरूरत है तो हमारे पास संभावित निर्माता हैं। अगर भविष्य में इसकी जरूरत पड़ी तो विकल्पों की तलाश की जाएगी। वैक्सीन निर्माण कंपनियों में से एक ने कहा कि विशेष रूप से मंकीपॉक्स के लिए ऐसी कोई अगली पीढ़ी का टीका नहीं है और वायरस भी उत्परिवर्तित (म्यूटेंट) हो गया है। कंपनी ने कहा कि भविष्य में यदि मामले बढ़ते हैं तो वैक्सीन की आवश्यकता होगी। 

नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल बोले- घबराने की जरूरत नहीं  
कई दवा कंपनियां सरकार के साथ मंकीपॉक्स के संभावित टीके पर चर्चा में लगी हुई हैं। भारत में अब तक मंकीपॉक्स के चार मामले सामने आ चुके हैं। तीन मामले केरल के हैं जबकि एक दिल्ली का है। एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि भारत इस बीमारी के खिलाफ पूरी तरह से तैयार है और घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों की जांच के लिए हमारी रोग निगरानी प्रणाली और भी अधिक सक्रिय हो गई है। स्थिति नियंत्रण में है, चिंता और घबराने की कोई बात नहीं है। 


मंकीपॉक्स से बचने के लिए डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कही यह बात
विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख ने सलाह दी कि जिन पुरुषों के मंकीपॉक्स की चपेट में आने का जोखिम है वे फिलहाल यौन साथियों की संख्या सीमित रखने पर विचार करें। इससे पहले WHO ने मंकीपॉक्स को वैश्विक आपातकाल घोषित किया था। WHO के महानिदेशक टेड्रोस अदानोम गेब्रेयेसेस ने कहा कि मई में मंकीपॉक्स का प्रकोप शुरू होने के बाद से इससे जितने लोग संक्रमित हुए हैं, उनमें से 98 प्रतिशत गे, बाइसेक्शुअल और अन्य पुरुष हैं। ज्यादातर मामले ऐसे हैं, जिनमें पुरुष दूसरे पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं।

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