फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Governor Balram Das tandon passes away at the age of 90, during emergency he was jailed

छह दफा विधायक रहे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन का निधन

Tue, 14 Aug 2018 03:04 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Updated Tue, 14 Aug 2018 03:04 PM IST
विज्ञापन
Governor Balram Das tandon passes away at the age of 90, during emergency he was jailed

दिल का दौरा पड़ने से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामदास टंडन का रायपुर के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में निधन हो गया। वह 91 साल के थे। आज सुबह करीब 8 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें राजभवन के अस्पताल में प्रारंभिक जांच के तुरंत बाद रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।  जहां डाक्टरों ने जांच के उपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया। राज्यपाल बलरामदास टंडन को सुबह करीब साढ़े 9 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जानकारी के मुताबिक अस्पताल में तत्काल उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया। डॉक्टरों की लंबी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

विज्ञापन


राज्याल बलरामदास टंडन की तबीयत का हाल जानने मुख्यमंत्री रमन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल सहित कई मंत्री और विधायक भी पहुंचे थे। उन्होंने 18 जुलाई 2014 को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का पदभार संभाला था। उनका जन्म 1 नवंबर 1927 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। इसके बाद वह लगातार सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रियता से हिस्सा लेते रहे। समाज सेवा और जनकल्याण कार्य करने की वजह से टंडन पंजाब की जनता के बीच मशहूर थे। 
विज्ञापन


टंडन साल 1953 से 1967 के बीच अमृतसर में नगर निगम पार्षद और वर्ष 1957, 1962, 1967, 1969 एवं 1977 में अमृतसर से विधानसभा के सदस्य के तौर पर चुने गए। साल 1997 के विधानसभा चुनाव में वह   राजपुरा विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे। उन्होंने पंजाब मंत्रिमंडल में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री के रूप में उद्योग, स्वास्थ्य, स्थानीय शासन, श्रम एवं रोजगार आदि विभागों में कार्य किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


साल 1979 से 1980 के दौरान टंडन पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। उन्होंने नेपाल की राजधानी काठमांडू में सार्क देशों के स्थानीय निकाय सम्मेलन में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। साल 1975 से 1977 तक वह आपातकाल के दौरान जेल में रहे। साल 1991 में उन्होंने अमृतसर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। इस दौरान उनपर कई बार आतंकी हमले हुए जिनमें बाल-बाल बच गए।


साल 1947 में देश के विभाजन के समय पाकिस्तान से आने वाले लोगों के लिए टंडन ने बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जीवन पर उनके बेटे संजय टंडन ने किताब ‘एक प्रेरक चरित्र‘ लिखी है। उन्हें खेलों से काफी लगाव था। वह कुश्ती, वॉलीबॉल, तैराकी और कबड्डी जैसे खेलों के सक्रिय खिलाड़ी रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed