इशरत जहां केसः राजनाथ बोले, यूपीए सरकार ने की गड़बड़ी, जांच करेगी केंद्र सरकार
- यूपीए सरकार ने की गड़बड़ी, जांच करेगी सरकार
- मंत्रालय से गायब हैं इशरत जहां केस के दस्तावेज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लोकसभा में गरुवार को इशरत जहां मामले पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इशरत मामले पर जवाब दिया। चर्चा के दौरान गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इशरत एनकाउंटर मामले में पिछली यूपीए सरकार ने गड़बड़ी की।
उन्होंने यूपीए सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा इशरत मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को फंसाने की कोशिश की गई। राजनाथ सिंह ने बताया कि पिछली सरकार ने इस मामले में दो हलफनामे दिए जिसमें से पहले हलफनामे में इशरत को आतंकी करार दिया गया। कहा कि दोनों हलफनामे में यूपीए सरकार ने अलग-अलग तथ्य पेश किए।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के सवाल पर मजहब या जाति की बात नहीं की जानी चाहिए, आतंकी सिर्फ आतंकी होता है उसका कोई मजहब या जाति नहीं होती है। राजनाथ सिंह ने यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने आतंकवाद को धार्मिक रंग देने की कोशिश की।
यूपीए सरकार सैफरन टैरर की बात करती है। जो कि उनकी सरकार को मंजूर नहीं। उन्होंने लोकसभा में बताया कि इशरत मामले पर कई दस्तावेज गायब हैं, गृह मंत्रालय इस मसले पर आंतरिक जांच करवाएगा। लोकसभा में इशरत मामले पर चर्चा के दौरान काफी हंगामा हुआ।
मंत्रालय से गायब हैं इशरत जहां केस के दस्तावेज
इशरत जहां से जुड़े हलफनामे में तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम के कार्यकाल में तैयार किए गए बदलाव ड्राफ्ट नोट गृह मंत्रालय की फाइलों से गायब हैं। यही नहीं उस दौरान तत्कालीन अटॉर्नी जनरल की कानूनी सलाह वाला दस्तावेज भी सरकारी फाइलों से गायब है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक गायब हुए दस्तावेज साल 2009 के उस विवादास्पद फैसले से संबंधित हैं, जिसमें तत्कालीन यूपीए सरकार ने गुजरात हाई कोर्ट के समक्ष इशरत केस मामले में दाखिल किए गए अपने ही हलफनामे से इंकार कर दिया था।
वहीं केंद्र सरकार ने गुजरात हाई कोर्ट में बताया था कि साल 2004 में एक कथित मुठभेड़ के दौरान मारी गई इशरत जहां और अन्य तीन लोगों का संबंध लश्कर-ए-तैयबा से था। इशरत केस को लेकर फिर हौ-हल्ला तब शुरू हुआ जब पूर्व गृह सचिव जी. के. पिल्लै ने दावा किया कि इशरत केस में दूसरे हलफनामे में खुद पी. चिदंबरम ने बदलाव किया था।हलफनामे में केंद्र सरकार ने इशरत केस को लेकर अपना स्टैंड बदला था।