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शीत सत्र में लोकसभा में पेश होगा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का विधेयक

Thu, 23 Nov 2017 09:22 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Thu, 23 Nov 2017 09:22 PM IST
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Government will introduce bill to give National Commission for Backward Classes

मोदी सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के लिए संसद के शीत सत्र में लोकसभा में एक विधेयक पेश करेगी। इस विधेयक के कानून बनते ही आयोग को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों और हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार मिल जाएगा।

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नाम न छापने की शर्त पर एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि 15 दिसंबर से शुरू होने जा रहे संसद के अगले सत्र में इस विधेयक को पेश कर दिया जाएगा। मोदी सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस विधेयक को ओबीसी वोटरों को अपने पक्ष में करने के मोदी सरकार के एक बड़े प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
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अन्य पिछड़ा वर्ग की सभी श्रेणियों की ओर से इस आयोग के गठन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इसके मद्देनजर इस आयोग को अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के बराबर दर्जा देने के लिए सरकार ने पिछले सत्र में एक विधेयक भी पेश किया था। लोकसभा ने इसे पारित कर दिया था।
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इसके बाद राज्यसभा में इस पर चर्चा हुई लेकिन वहां उसे कुछ संशोधनों के साथ पारित किया गया। इससे एक ही विधेयक के दो संस्करण हो गए। इसके मद्देनजर इस विधेयक को दोबारा लोकसभा में पेश करने की जरूरत आन पड़ी है।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास सीमित अधिकार हैं

Government will introduce bill to give National Commission for Backward Classes

मौजूदा समय में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की हैसियत वैधानिक संस्था की है। वर्ष 1993 में स्थापित इस संस्था के पास सीमित अधिकार हैं। यह अन्य पिछड़ा वर्ग में किसी जाति को शामिल करने या उसे बाहर करने के बारे में सरकार को सिर्फ सुझाव दे सकती है। ओबीसी की शिकायतें सुनने और उनके हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पास ही है। 

चूंकि अनुसूचित जाति आयोग के पास अनुसूचित जातियों से संबंधित शिकायतों का अंबार लगा रहता है, इसलिए ओबीसी की नालिश सुनने की उसकी क्षमता सीमित है। इसे देखते हुए पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के लिए कदम उठाया जा रहा है। इसके बाद यह आयोग ओबीसी की शिकायतें सुनने और उनके अधिकारों एवं हितों की रक्षा करने में सक्षम हो जाएगा। 

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