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CDSCO: दवाएं वापस मंगाने पर सरकार को देनी होगी जानकारी, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

Sun, 07 Jan 2024 06:01 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 07 Jan 2024 06:01 AM IST
सार

बता दें कि पिछले एक-दो वर्ष में भारत में बनी दवाओं से विदेश में बच्चों की मौत के आरोप लगे हैं। इसके चलते केंद्र सरकार ने फार्मा उद्योग को गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कहा, लेकिन इसके बाद भी कई मौकों पर घटिया और नकली दवाएं मिली हैं।

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Government will have to give information on recall of medicines Health Ministry issued new guidelines
Mansukh Mandaviya - फोटो : Social Media

विस्तार

दवा निर्माता कंपनियों को अब दवाओं को वापस मंगाने पर इसकी पूरी जानकारी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को देनी होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा कंपनियों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि दवाओं की गुणवत्ता की जिम्मेदारी निर्माता पर होगी। कोई दवा इस्तेमाल के लिए उपयुक्त है या नहीं, दवा के इस्तेमाल से किसी मरीज की जिंदगी खतरे में तो नहीं आएगी अब यह दवा निर्माता की जिम्मेदारी होगी। कंपनियां अगर किसी दवा को वापस बुलाती हैं, तो उन्हें लाइसेंसिंग अथॉरिटी को इसकी जानकारी देनी होगी। साथ ही उत्पाद में आई खराबी व उत्पादन की पूरी जानकारी देनी होगी। सरकार ने इस बारे में बीते 28 दिसंबर को एक अधिसूचना जारी कर कंपनियों को निर्देश दिया है।

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ऐसी दवाएं बनाएं जो दुनियाभर में हों स्वीकार्य
नए दिशा-निर्देशों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि छोटी दवा निर्माता कंपनियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पाद बनाने के लिए दवाओं की जांच भी दुनियाभर के मौसम के मुताबिक करनी चाहिए। दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि कंपनियां उच्च गुणवत्ता की जवाएं बनाएं, जिसकी दुनियाभर में स्वीकार्यता हो। साथ ही तैयार दवा तभी बाजार में भेजी जाए जब सभी परिणाम संतोषजनक मिले।

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रखने होंगे पर्याप्त नमूने  
नई अधिसूचना में कहा गया है कि फिर से जांच के लिए या किसी बैच के सत्यापन के लिए कंपनियों को अंतिम उत्पाद के पर्याप्त नमूने रखे जाएं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले वर्ष अगस्त में बताया था कि दिसंबर 2022 से अगस्त 2023 के दौरान 162 दवा फैक्टरियों का निरीक्षण किया गया। इनमें कच्चे माल की जांच नहीं की जा रही थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक भारत की 8,500 छोटी दवा फैक्टरियों में से एक-चौथाई से भी कम डब्ल्यूएचओ के मानकों पर खरी उतर पाएंगी।

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नकली दवाओं से बच्चों की मौत के आरोप लगे  
बता दें कि पिछले एक-दो वर्ष में भारत में बनी दवाओं से विदेश में बच्चों की मौत के आरोप लगे हैं। इसके चलते केंद्र सरकार ने फार्मा उद्योग को गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कहा, लेकिन इसके बाद भी कई मौकों पर घटिया और नकली दवाएं मिली हैं। इसके अलावा जांच में भी कई कंपनियों के सैंपल फेल हुए हैं। भारत की फार्मा इंडस्ट्री 5,000 करोड़ डॉलर की है। ऐसे में सरकार के लिए इस उद्योग के दवाब में आए बिना लोगों के हित में नए मानकों को लागू करना चुनौतिपूर्ण होगा।

 

 

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