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आदिवासी विज्ञापन पर लोकसभा में घिरी सरकार
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 10 Aug 2016 06:04 AM IST
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lok sabha
- फोटो : PTI
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विश्व आदिवासी दिवस पर मध्य प्रदेश में छपे एक विज्ञापन पर मोदी सरकार को मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। दरअसल इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झाबुआ जिले के अलीराजपुर कार्यक्रम की सूचना देते हुए कहा गया था कि प्रधानमंत्री आदिवासियों का उन्मूलन करेंगे।
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कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए पूछा कि क्या मोदी सरकार आदिवासियों के उत्थान की जगह उसे जड़ से ही खत्म करना चाहती है। इस दौरान प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में स्थानीय सांसद कांतिलाल भूरिया को निमंत्रण न देने पर भी हंगामा हुआ।
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शिवसेना ने इस मामले में कांग्रेस के सुर में सुर मिलाया। बाद में इस मामले में गृह मंत्री राजनाथ सिंह को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने विज्ञापन की जांच का भी भरोसा दिया।
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शून्यकाल के दौरान भूरिया ने कहा कि आदिवासी दिवस पर मोदी सरकार इस समाज को शुभकामना देने के बदले उसे जड़ से मिटानि का आह्वïन कर रही है। समाचार पत्र में छपे विज्ञापन का हवाला देते हुए भूरिया ने कहा कि इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री आदिवासियों का उन्मूलन करेंगे।
यह आदिवासी दिवस पर देश के 12 करोड़ आदिवासियों का अपमान है। भूरिया ने इस दौरान प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में खुद को शामिल न किए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और किसी बड़े मंत्री के कार्यक्रम में स्थानीय सांसद को शामिल कराने की परंपरा रही है।
उन्होंने खुद प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर कार्यक्रम में शामिल होने की इच्छा जताई थी। इसका कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद कांग्रेस के सदस्यों ने विज्ञापन देने वाले लोगों केखिलाफ कार्रवाई की मांग की।
भारी हंगामे के बाद गृह मंत्री ने देश की सभ्यता और संस्कृति में आदिवासी समाज के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विज्ञापन उन्होंने नहीं देखा है। वह इस बारे में पता लगा कर सदन को सूचित करेंगे।