फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Government will abide by Supreme Court order on farm laws: President Kovind

कृषि कानूनों पर सरकार भी सुप्रीम कोर्ट के भरोसे, किसानों को अब नया प्रस्ताव नहीं

Sat, 30 Jan 2021 04:24 AM IST
Jeet Kumar हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 30 Jan 2021 04:24 AM IST
सार

  • अभिभाषण में राष्ट्रपति बोले, अदालत के फैसले का सम्मान करेगी सरकार
  • कृषि मंत्री बोले किसान संगठनों को नहीं देंगे कोई नया प्रस्ताव

विज्ञापन
Government will abide by Supreme Court order on farm laws: President Kovind
किसान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

सरकार ने कृषि कानूनों के मामले में खुद हस्तक्षेप करने से बचने और सब कुछ सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ने का साफ संदेश दिया है। बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने अभिभाषण में तो कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसी आशय का साफ संदेश दिया है। ऐसी परिस्थिति में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति की भूमिका फिर से महत्वपूर्ण हो गई है।

विज्ञापन


राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कृषि कानूनों की जमकर तारीफ की और यह भी कहा कि वर्तमान में कृषि कानूनों को लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखा है। हमारी सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पूरा सम्मान और उसका पालन करेगी।
विज्ञापन


वहीं, तोमर ने भी कहा, सरकार किसान संगठनों को कोई नया प्रस्ताव नहीं देगी। सरकार ने अपनी ओर से तीनों कानूनों को स्थगित करने और सर्वपक्षीय समिति बनाने का सबसे अच्छा प्रस्ताव पहले ही दे दिया है। अब इससे आगे सरकार कुछ नहीं करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


किसान संगठन नहीं माने तो सुप्रीम कोर्ट अहम
राष्ट्रपति के अभिभाषण और कृषिमंत्री के बयान से साफ है कि किसान संगठन अगर अपनी जिद पर अड़े रहे तो सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा करेगी। अगर इस बीच किसान संगठनों ने सरकार के प्रस्ताव पर सहमति दिखाई तो पूरे विवाद में बीच का रास्ता निकल सकता है। सुप्रीम कोर्ट की समिति को दो महीने में अपनी रिपोर्ट देनी है। इसने अपना काम शुरू भी कर दिया है।

समिति की प्रासंगिकता पर उठ रहे थे सवाल
सरकार द्वारा कृषि कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने और सभी पक्षों से बातचीत के लिए कमेटी गठन के प्रस्ताव के बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे थे।


जाहिर तौर पर अगर किसान संगठन सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते तो समिति की प्रासंगिकता खत्म हो जाती। अब सरकार और किसान संगठनों के बीच जारी रस्साकसी के बीच सरकार ने पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ने का मन बना लिया है। ऐसे में समिति की अहमियत फिर बढ़ गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed