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अब आपदाओं से महफूज रहेंगे गरीबों के आशियाने, यह है सरकार का प्लान
सीमा शर्मा /अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 12 Oct 2016 03:05 AM IST
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- फोटो : AmarUjala
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गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) गुजारा करने वालों को अब आपदाओं के कारण अपने आशियाने से वंचित नहीं होना पड़ेगा। आईआईटी के विशेषज्ञों ने देशभर के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं से इन आशियानों को महफूज करने का इंतजाम कर दिया है। इसके लिए विशेषज्ञों ने एक पोर्टल पर वे सभी उपाय और जानकारी उपलब्ध करा दी है, जिनसे गरीबों के मकान गिरने या किसी तरह के नुकसान से सुरक्षित रहेंगे।
केंद्र सरकार का ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण इलाकों में एक बीपीएल परिवार को घर बनाने के लिए डेढ़ लाख रुपये देती है। लेकिन हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी प्राकृतिक आपदा के चलते ऐसे परिवार फिर बेघर हो जाते हैं। मंत्रालय ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों से मदद मांगी थी। आईआईटी दिल्ली के ग्रामीण विकास व प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. विजय राघवन एम चारियार के मुताबिक, विशेषज्ञों की टीम देश के सभी राज्यों में गई और उनका बारीक अध्ययन किया। विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि हर क्षेत्र की अलग-अलग भौगोलिक स्थितियों के कारण प्राकृतिक आपदाएं भी अलग-अलग तरीके की होती हैं। मसलन, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भूकंप की श्रेणी में आता है जबकि उत्तर प्रदेश और के मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा रहता है।
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केंद्र सरकार का ग्रामीण विकास मंत्रालय ग्रामीण इलाकों में एक बीपीएल परिवार को घर बनाने के लिए डेढ़ लाख रुपये देती है। लेकिन हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी प्राकृतिक आपदा के चलते ऐसे परिवार फिर बेघर हो जाते हैं। मंत्रालय ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों से मदद मांगी थी। आईआईटी दिल्ली के ग्रामीण विकास व प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. विजय राघवन एम चारियार के मुताबिक, विशेषज्ञों की टीम देश के सभी राज्यों में गई और उनका बारीक अध्ययन किया। विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि हर क्षेत्र की अलग-अलग भौगोलिक स्थितियों के कारण प्राकृतिक आपदाएं भी अलग-अलग तरीके की होती हैं। मसलन, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड भूकंप की श्रेणी में आता है जबकि उत्तर प्रदेश और के मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा रहता है।
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ब्लॉक और जिला अधिकारी करेंगे मदद
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
आईआईटी दिल्ली, मंत्रालय, राज्य सरकारों और यूनाइटेड नेशन डेवलेपमेंट प्रोग्राम ने मिलकर एक पोर्टल बनाया। इस पोर्टल पर आपको क्षेत्र विशेष के लिए मकान का नक्शा, निर्माण सामग्री का इस्तेमाल और सरकारी मदद के लिए आवेदन तक की जानकारी मिल जाएगी।
इसके लिए टीम ने सबसे पहले www.ruralhousingnetwork.in पोर्टल तैयार किया, जिसमें देशभर के राज्यों के इलाकों को नाम सहित गूगल मैप से जोड़ा। जैसे ही इस पोर्टल पर कोई घर बनाने के लिए आवेदन करेगा तो उसे अपने राज्य पर क्लिक करना पड़ेगा। राज्य का नाम आते ही विंडो पर उस इलाके की संवेदनशीलता समेत प्राकृतिक आपदा की जानकारी उपलब्ध होगी। इसमें भूकंप जोन, बाढ़ का प्रभाव, भूस्खलन आदि की भी जानकारी है।
ब्लॉक और जिला अधिकारी करेंगे मदद
इस योजना का लाभ आम आदमी तक पहुंचाने के लिए मंत्रालय राज्यों को इस पोर्टल के माध्यम से जोड़ेगा। मकान बनाने के लिए आवेदन ब्लॉक विकास अधिकारी या फिर जिला ग्रामीण विकास अधिकारी के पास भरने होते हैं। इसी आवेदन के दौरान इस पोर्टल से घर के नक्शे भी पास किए जाएंगे।
इसके लिए टीम ने सबसे पहले www.ruralhousingnetwork.in पोर्टल तैयार किया, जिसमें देशभर के राज्यों के इलाकों को नाम सहित गूगल मैप से जोड़ा। जैसे ही इस पोर्टल पर कोई घर बनाने के लिए आवेदन करेगा तो उसे अपने राज्य पर क्लिक करना पड़ेगा। राज्य का नाम आते ही विंडो पर उस इलाके की संवेदनशीलता समेत प्राकृतिक आपदा की जानकारी उपलब्ध होगी। इसमें भूकंप जोन, बाढ़ का प्रभाव, भूस्खलन आदि की भी जानकारी है।
ब्लॉक और जिला अधिकारी करेंगे मदद
इस योजना का लाभ आम आदमी तक पहुंचाने के लिए मंत्रालय राज्यों को इस पोर्टल के माध्यम से जोड़ेगा। मकान बनाने के लिए आवेदन ब्लॉक विकास अधिकारी या फिर जिला ग्रामीण विकास अधिकारी के पास भरने होते हैं। इसी आवेदन के दौरान इस पोर्टल से घर के नक्शे भी पास किए जाएंगे।